{"_id":"5b698d3c4f1c1b61508b78eb","slug":"about-38-children-by-rescue-in-nuh-children-shelter-home","type":"story","status":"publish","title_hn":"मुजफ्फरपुर और देवरिया के बाद नूंह में बाल संरक्षण आयोग का छापा, हाई प्रोफाइल यौन शोषण की आशंका","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मुजफ्फरपुर और देवरिया के बाद नूंह में बाल संरक्षण आयोग का छापा, हाई प्रोफाइल यौन शोषण की आशंका
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 07 Aug 2018 05:45 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
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बिहार के मुजफ्फरपुर और यूपी के देवरिया के बाद अब हरियाणा से भी एक हाईप्रोफाइल यौन शोषण का मामला सामने आ रहा है। यह मामला गुरुग्राम से सटे नूंह के एक बाल गृह का है।
जानकारी के अनुसार नूंह जिले के सेसौला गांव में एक एनजीओ द्वारा संचालित बाल गृह में अनियमितताओं का मामला सामने आया है। कहा जा रहा है कि यहां बगैर रिकॉर्ड के ही 38 लड़के-लड़कियों को रखा गया था। ये बच्चे किसी धर्म विशेष के बताए जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि इन बच्चों को अपने परिवार से मिलने की अनुमति भी नहीं दी जाती।
एक जो बहुत चौंकाने वाली बात इस मामले में सामने आ रही है कि यहां रह रहे बच्चों से लिखवाया गया था कि किसी बच्चे के साथ कोई दुर्घटना हो जाती है तो उसमें संस्था जिम्मेदार नहीं होगी।
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नूंह के इस बालगृह पर जब राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने जब छापेमारी की तो ऐसी ही कई अन्य चौंकाने वाली बातें सामने आईं। आयोग ने आशंका जताई हैं कि इन बच्चों का यौन शोषण किया जाता है।
इस मामले में आयोग ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है और कड़ा एक्शन लेने की मांग की है। यह बाल गृह 2016 से चल रहा है और यहां तक पहुंचने के लिए तीन किलोमीटर तक पक्की सड़क भी नहीं है। यहां सभी नियमों को ताक पर रख दिया गया।
फाइव स्टार की तर्ज पर बने इस बाल गृह में तहखाने भी हैं, जिसमें कंट्रोल रूम की तरह कंप्यूटर भी रखे हुए हैं। एक ऑफिस के जरिए तहखाने में जाने का रास्ता है, जिसे ढक्कन से बंद करके रखा जाता है। जब बाल गृह से पूछा गया कि बच्चों को गोद लेने की प्रक्रिया में क्यों नहीं लाते तो संस्था इसका जवाब नहीं दे पाई।
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जानकारी के अनुसार नूंह जिले के सेसौला गांव में एक एनजीओ द्वारा संचालित बाल गृह में अनियमितताओं का मामला सामने आया है। कहा जा रहा है कि यहां बगैर रिकॉर्ड के ही 38 लड़के-लड़कियों को रखा गया था। ये बच्चे किसी धर्म विशेष के बताए जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि इन बच्चों को अपने परिवार से मिलने की अनुमति भी नहीं दी जाती।
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एक जो बहुत चौंकाने वाली बात इस मामले में सामने आ रही है कि यहां रह रहे बच्चों से लिखवाया गया था कि किसी बच्चे के साथ कोई दुर्घटना हो जाती है तो उसमें संस्था जिम्मेदार नहीं होगी।
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नूंह के इस बालगृह पर जब राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने जब छापेमारी की तो ऐसी ही कई अन्य चौंकाने वाली बातें सामने आईं। आयोग ने आशंका जताई हैं कि इन बच्चों का यौन शोषण किया जाता है।
इस मामले में आयोग ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है और कड़ा एक्शन लेने की मांग की है। यह बाल गृह 2016 से चल रहा है और यहां तक पहुंचने के लिए तीन किलोमीटर तक पक्की सड़क भी नहीं है। यहां सभी नियमों को ताक पर रख दिया गया।
फाइव स्टार की तर्ज पर बने इस बाल गृह में तहखाने भी हैं, जिसमें कंट्रोल रूम की तरह कंप्यूटर भी रखे हुए हैं। एक ऑफिस के जरिए तहखाने में जाने का रास्ता है, जिसे ढक्कन से बंद करके रखा जाता है। जब बाल गृह से पूछा गया कि बच्चों को गोद लेने की प्रक्रिया में क्यों नहीं लाते तो संस्था इसका जवाब नहीं दे पाई।