श्री रविशंकर के कार्यक्रम में सेना की मदद के लिए केजरीवाल के मंत्री ने लिखी थी चिट्ठी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आर्ट ऑफ लिविंग के कार्यक्रम 'विश्व सांस्कृतिक महोत्सव' के आयोजन में सेना की भूमिका के संबंध में चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। असल में दिल्ली की केजरीवाल सरकार के पर्यटन मंत्री कपिल शर्मा ने केंद्रीय रक्षा मंत्रालय को पत्र लिखकर यमुना पर पुल बनाने के लिए सेना की मदद मांगी थी।
एएनआई के मुताबिक कपिल शर्मा ने 16 फरवरी को रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर को पत्र लिख कर इस कार्यक्रम में लोगों के आने जाने के लिए पांटून पुल बनाने में सेना की मदद मांगी थी।
बता दें कि यमुना को होने वाले नुकसान के चलते पहले से ही यह कार्यक्रम विवाद में रहा है। इस बीच सेना के द्वारा इस कार्यक्रम में पुल बनाने की तस्वीरें सामने आने के बाद एक नया विवाद पैदा हो गया।
मामला इतना गंभीर हो गया कि विपक्ष ने संसद में इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए सवाल खड़ा किया कि किसी प्राइवेट कार्यक्रम में सेना को क्यों लगाया गया?
बता दें कि इस कार्यक्रम से पहले सुरक्षा एजेंसियों ने चेतावनी देते हुए स्पष्ट किया था कि बड़ी संख्या में भीड़ जुटने से भगदड़ की स्थिती पैदा हो सकती है। आवागमन को आसान बनाने के लिए ही यमुना पर पांटून पुलों के निर्माण का सुझाव दिया गया था।
सदन में लगे सेना के गलत इस्तेमाल न करने के नारे
दिल्ली पुलिस के इस सुझाव के बाद ही रक्षा मंत्रालय ने सेना को निर्माण स्थल पर पांटून पुल बनाने का आदेश दिया था। भारतीय सेना ने यहां दो पुलों का निर्माण किया है।
इस कार्यक्रम में सेना की भूमिका पर सवाल उठाते हुए सीपीआईएम के महासचिव सीताराम येचुरी ने राज्य सभा में सवाल उठाया था कि आखिर किसी निजी कार्यक्रम में सेना के इस्तेमाल की अनुमति क्यों दी गई।
हालांकि इस सवाल के बाद संसद में 'सेना का गलत इस्तेमाल मत करो, रक्षा करो' के नारे भी गूंजे। सवाल का जवाब देते हुए संसदीय कार्य राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि श्रीश्री रविशंकर पर्यावरण संरक्षण के प्रति पूरी तरह समर्पित हैं और उनकी मंशा पर सवाल नहीं खड़ा किया जाना चाहिए।
साथ ही वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस मामले पर सफाई देते हुए कहा कि चूंकि यह मामला पहले से ही राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) में लंबित है इसलिए, सदन में इस पर चर्चा नहीं होनी चाहिए।