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आप नेता आतिशी ने अमर उजाला से की सीधी बात, बोलीं- कांग्रेस का वजूद दिल्ली में खत्म
Tue, 14 Jan 2020 02:32 AM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Vikas Kumar
Updated Tue, 14 Jan 2020 02:32 AM IST
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आप नेता आतिशी
- फोटो : अमर उजाला
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आम आदमी पार्टी (आप) की शिक्षा क्रांति की मजबूत स्तंभ मानी जाने वाली आतिशी फिलहाल दिल्ली चुनाव के उन मसलों को तय करने में जुटी हैं, जिन मुद्दों को लेकर पार्टी जनता के बीच जाएगी। घोषणा पत्र समिति की अध्यक्ष के तौर पर वह चुनावी वादों का दस्तावेज तैयार करने में जुटी हैं। आतिशी ने कहा कि दिल्ली में कांग्रेस का वजूद लगभग खत्म है जबकि भाजपा भी बैकफुट पर है। अमर उजाला संवाददाता संतोष कुमार ने आतिशी से आप की चुनावी रणनीति पर बातचीत की। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश।
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सवाल: पिछले चुनाव में आप ने सबसे पहले उम्मीदवारों के नामों का एलान कर दिया था। इस बार देरी की वजह? क्या विपक्ष से डर लग रहा है?
जवाब: असल में 2013 में जब हम चुनाव लड़ रहे थे तो आप नई पार्टी थी। कोई हमें ठीक से जानता ही नहीं था। इसलिए हमें घर-घर जाकर लोगों को बताना था कि एक नई पार्टी बनी है और हमारे नेता अरविंद केजरीवाल हैं। झाडू चुनाव निशान है। इसलिए चार महीने पहले उम्मीदवारों के नामों का एलान कर दिया था। इस बार स्थिति अलग है। पांच साल से अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री हैं। बिजली, पानी, शिक्षा सरीखे कामों के बारे में दिल्ली के लोग जानते हैं। इसलिए इस बार का कैंपेन अलग तरह का है। हालांकि, अभी प्रत्याशियों के नामों की घोषणा नहीं हुई है पर नेता और कार्यकर्ता जनता के बीच हैं। लिस्ट भी जल्द आ जाएगी।
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सवाल: इस बार दिल्ली वालों के लिए घोषणा पत्र में क्या नया होगा?
जवाब: दो चीजें हैं। एक तो जो कुछ हो रहा है, वह जारी रहेगा। इस बीच बहुत सारी चीजें बुनियादी जरूरतों से जुड़ी हैं। मतलब पिछले पांच साल में हमने बुनियाद तैयार की। इस बार का फोकस है कि दिल्ली को हम वैश्विक शहर कैसे बना सकते हैं। इसमें सार्वजनिक परिवहन अहम है। अगले पांच साल में हम ऐसा सिस्टम बनाएंगे, जिससे लोग अपने वाहन छोड़कर बसों में सफर करें। अगर हम आज यह कह रहे हैं, तो बीते कामों से भरोसा भी जगा सकते हैं। इसी तरह सड़क ठीक करना है। एमसीडी के साथ मिलकर साफ-सफाई करनी है। हवा व नदी का प्रदूषण खतम करना है।
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सवाल: एमसीडी के साथ मिलकर काम करने की बात कह रही हैं। लेकिन पांच साल में से चार साल तो आपकी सरकार एमसीडी व केंद्र सरकार से लड़ती रही। कैसे समझाएंगे लोगों को?
जवाब: देखिए, एक-दो साल से तो हम सहयोग से ही काम कर रहे हैं। इसमें बड़ी बात सुप्रीम कोर्ट के फैसले से हुई है। कोर्ट ने दोनों सरकारों के बीच की लाइन खींच दी हैं। भरोसा है कि जैसे कच्ची कॉलोनियों के विकास में एमसीडी के साथ मिलकर हमने काम किया है, वैसे ही आगे साफ-सफाई समेत दूसरे मसले भी हल किए जाएंगे।
सवाल: मुकाबला किसे मानती हैं, भाजपा या कांग्रेस से?
जवाब: कांग्रेस तो दिल्ली से खत्म हो गई है। आजकल सारे सर्वे में कांग्रेस का वोट शेयर दो अंकों में नहीं जा पा रही। कांग्रेस रेस से बाहर है। लड़ाई आप व भाजपा में है। लेकिन मुझे लगता है कि भाजपा भी बैकफुट पर है। इसकी बड़ी वजह उनके पास अरविंद केजरीवाल के सामने किसी चेहरे का न होना है। जबकि लोग यह जानना चाहते हैं। मतदाता वोट भरोसे पर करते हैं। दिल्लीवालों को अरिंवद केजरीवाल पर भरोसा है। भाजपा अभी द्वंद्व में है कि चेहरा दें या न दें।
सवाल: लेकिन भाजपा इसको अपनी ताकत मानती है। वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे को आगे कर रही है?
जवाब: यह कहने की बात है। चेहरा न आने की वजह उनकी आपसी लड़ाई है। हरदीप सिंह पुरी एक दिन मनोज तिवारी को मुख्यमंत्री का चेहरा बताते हैं, लेकिन दो घंटे में पलट जाते हैं। जबकि लोग जानना चाहते हैं कि वादे कौन पूरा करेगा। और मोदी जी का चेहरा जो रखने की बात है तो जब प्रधानमंत्री का चुनाव था तो जनता ने उनमें भरोसा जताया।
सवाल: दूसरी पार्टी से बड़े नेता आप में आ रहे हैं। क्या आपको अपने नेताओं, विधायकों पर भरोसा नहीं रहा?
जवाब: हम तो शुरू से कह रहे हैं कि और दलों से जो भी लोग, जिन्हें लगता है कि बेहतर राजनीति होनी चाहिए, उनका आप में स्वागत है।
सवाल: लेकिन चुनाव से पहले ही क्यों? टिकट आदि देने का भरोसा तो नहीं दिया?
जवाब: देखिए, चुनाव एक मौका होता है, राजनीतिक गतिविधियों के उफान पर होने का और पार्टी से जुड़ने का। और अभी क्यों, पिछले साल भर से बहुत से लोग पार्टी में शामिल हुए हैं। 2015 में भी बहुत से लोग आए थे। टिकट आदि देने के भरोसे से कभी भी पार्टी ने किसी को ज्वाइन नहीं करवाया।
सवाल: कुछ विधायकों के टिकट भी कटेंगे?
जवाब: इसके लिए सर्वे करवाया जा रहा है। विधायकों के प्रदर्शन के आधार पर पार्टी इस पर फैसला लेगी।
सवाल: आपके साथ लोकसभा के दूसरे उम्मीदवार भी चुनाव में उतरेंगे क्या?
जवाब: पार्टी का जो भी आदेश होगा, हम लोग उसको मानेंगे।