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नाराजगी दूर करने के साथ ही AAP ने विश्वास को दी ये बड़ी चुनौती

Sat, 06 May 2017 04:34 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 06 May 2017 04:34 PM IST
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aap gave big challenges to kumar vishwas after all
कुमार व‌िश्वास - फोटो : pti

आम आदमी पार्टी (आप) ने राजस्थान का प्रभार देकर बेशक अपने संस्थापक सदस्य कुमार विश्वास की नाराजगी दूर करने की कोशिश की है। लेकिन पार्टी ने विश्वास को चुनौती भी दी है कि वह प्रदेश अगले साल होने वाले विधान सभा चुनाव में साबित करके दिखायें। पंजाब, गोवा विधान सभा व दिल्ली निगम चुनाव में प्रदर्शन को देखते हुये विश्वास के लिये यह काम आसान नहीं होगा।

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पार्टी सूत्र बताते हैं कि बुधवार को आप की राजनीतिक मामलों की समिति की करीब तीन घंटे चली बैठक में काफी वक्त तक केजरीवाल व कुमार विश्वास ने आपस में बात की। प्रदेश का प्रभार संभालने से राजी होने के बाद चर्चा इस पर भी हुयी कि अगले साल होने वाले चुनाव में विश्वास को किस तरह काम करना होगा।
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सूत्रों की मानें तो केजरीवाल ने विश्वास को साफ-साफ कहा है कि 2018 में प्रदेश में होने वाले चुनाव में विश्वास को खुद को साबित करना होगा। इसके लिये उनके किसी योजना में पार्टी का ज्यादा दखल नहीं होगा।

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राज्य में संगठन मजबूत करने से लेकर सब काम व‌िश्वास को

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संजय स‌िंह और कुमार व‌िश्वास - फोटो : गेटी इमेज

राज्य में संगठन मजबूत करने से लेकर, टिकट बंटवारे, प्रचार अभियान की रूपरेखा तैयार करने तक का काम खुद विश्वास को करना होगा। इसके लिये वह अपने विश्वस्तों की टीम भी बना सकते हैं। केजरीवाल ने कहा है कि राजस्थान के बेहतर प्रदर्शन के बाद इस मसले में आगे कोई बात होगी।

हालांकि, कवि के तौर पर कुमार विश्वास युवाओं को खासे लोकप्रिय हैं। उनमें भीड़ जुटाने और उसे बांधे रखने की क्षमता भी है। विरोधियों पर चुटीले अंदाज में वह तंज करने में माहिर भी हैं। लेकिन अब असल परीक्षा सियासी काबिलियत दिखाने की है।

बीते लोकसभा चुनाव में उन्होंने अमेठी में अपने हाथ आजमाने की कोशिश भी की थी, लेकिन वह पूरी तरह नामकायाब रहे थे। अब प्रदेश के उनको नये सिरे से राजस्थान में खुद को साबित करना बड़ी चुनौती होगी।

पार्टी का संस्थापक सदस्य होने के बाद भी पहली बार मिली बड़ी जिम्मेदारी
पार्टी का संस्थापक सदस्य होने के बाद भी उन्हें संगठन के स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी नहीं मिली थी। इस मामले में एक अपवाद एनआरआई सेल का प्रभार दिया गया था। जबकि दूसरे नेताओं संजय सिंह, आशुतोष, पंकज गुप्ता व गोपाल राय जैसे दूसरे नेताओं को अलग-अलग राज्यों को प्रभार मिलता रहा है। अब उन्होंने आवाज उठाई, तो भी नेतृत्व ने उन्हें राजस्थान का प्रभार सौंपकर मुश्किल में डाल दिया है।

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