फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   AAP banks on facilities but BJP wins in campaign game

दिल्ली विधानसभा चुनावः आप को सुविधाओं का सहारा, भाजपा ने प्रचार में बाजी मारी

Thu, 06 Feb 2020 03:32 AM IST
दुष्यंत शर्मा शरद गुप्ता, नई दिल्ली
शरद गुप्ता, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 06 Feb 2020 03:32 AM IST
विज्ञापन
AAP banks on facilities but BJP wins in campaign game
Delhi Assembly election 2020 - फोटो : twitter

मुफ्त बिजली, मुफ्त पानी, मुफ्त शिक्षा, मुफ्त इलाज, बुजुर्गों के लिए मुफ्त तीर्थ यात्रा और महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा। अरविंद केजरीवाल की इस 'मुफ्त सरकार' को दोबारा चुनकर आने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए थी। लेकिन पिछले दस दिनों में दिल्ली का सियासी माहौल कुछ बदला सा दिख रहा है। अब आप भाजपा से एक कड़ी चुनौती का सामना कर रही है।

विज्ञापन

 

विज्ञापन


इसकी एक वजह भारतीय जनता पार्टी का आक्रामक चुनाव प्रचार तो है ही, वहीं दूसरी ओर अपनी पार्टी में भी केजरीवाल अकेले पड़ते नजर आ रहे हैं। खासतौर पर पिछले चुनाव में उनके सहयोगी रहे अधिकतर बड़े नेता उनका साथ छोड़ चुके हैं। यही नहीं बल्कि हर गली मोहल्ले में आम आदमी पार्टी की टोपी पहने दिखने वाले उनके वालंटियर भी इस बार किसी हद तक नदारद हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन


इससे पहले हर चुनाव में आप के वालंटियर पूरे देश से दिल्ली आते थे और हर सड़क, हर गली, हर बस स्टॉप और मेट्रो स्टेशन पर सिर्फ आप की टोपी लगाए लोग ही दिखाई देते थे। इससे आम आदमी पार्टी के पक्ष में एक माहौल बन जाता था। इंडिया अगेंस्ट करप्शन के दिनों से शुरू होकर यह माहौल पिछले विधानसभा चुनाव तक रहा।

लेकिन इस बीच एक-एक कर केजरीवाल के अधिकतर वरिष्ठ सहयोगी उनका साथ छोड़ गए। चाहे वे कर्नाटक हाई कोर्ट के पूर्व न्यायधीश जस्टिस संतोष हेगडे हों, एडमिरल रामदास, पत्रकार आशुतोष, सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण,  कवि कुमार विश्वास, सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव, मेधा पाटकर, मुंबई के मयंक गांधी, प्रीति शर्मा मेनन या अंजलि दमानिया सभी ने पार्टी छोड़ने की वजह आप में आंतरिक लोकतंत्र का अभाव और केजरीवाल का तानाशाही व्यवहार बताई। वे अपने सहयोगियों के साथ भी कई बार बहुत कठोर और अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करते हैं।


केजरीवाल के एक पूर्व सहयोगी का कहना है कि वे आम आदमी पार्टी में व्यवस्था परिवर्तन के लिए शामिल हुए थे। लेकिन जब उन्होंने पाया कि पार्टी तो खुद ही व्यवस्था का हिस्सा बन गई और दूसरी पार्टियों के सभी गुण और अवगुण उसमें आ गए तो इससे उनका मोहभंग हो गया।

पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग ने हाल ही में कहा कि पिछले चुनाव में 70 में से 67 सीटें जीतने के बाद अरविंद केजरीवाल मानो मदांध हो गए थे। वे चाहते थे हर काम उनकी मर्जी से हो। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed