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'आधार' ही बना लोगों से ठगी का आधार, 200 से 300 रुपये में बिक रहा लोगों का सीक्रेट
Thu, 20 Feb 2020 03:31 PM IST
Trainee Trainee
गौरव शर्मा, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
गौरव शर्मा, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
Published by: Trainee Trainee
Updated Thu, 20 Feb 2020 03:31 PM IST
सार
- फर्जी आधार कार्ड व पैन कार्ड से क्रेडिट कार्ड बनवाकर बैंकों से करते थे ठगी
- 200 से 300 रुपये में खरीदते थे निजी डाटा
- गाजियाबाद के एक, राजस्थान के एक और दिल्ली के आरोपियों की तलाश
- क्रेडिट कार्ड की स्ट्रिप स्वैप कर निकालते थे रुपये, पुलिस ने किया गिरफ्तार
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सरकार की मंशा हर व्यक्ति को आधार कार्ड देने और प्रत्येक योजना को आधार कार्ड से जोड़ने की है। आधार कार्ड में लोगों की निजी जानकारी होती है, लेकिन कोरियर सर्विस, बैंककर्मी, टेली कॉलिंग कर्मियों की बदौलत दिल्ली, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर समेत अन्य शहरों के लोगों की निजी जानकारी 200 से 300 रुपये में बाहर बेची जा रही है।
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एसटीएफ की गिरफ्त में आए आरोपियों से पूछताछ में चार अन्य आरोपियों के नाम और विवरण भी हाथ लगे हैं। इनमें से एक आरोपी गाजियाबाद, एक राजस्थान और दो दिल्ली हैं। चारों ही कोरियर सर्विस, जस्ट डायल जैसी टेली कॉलिंग सर्विस व बैंक से जुड़े हुए थे।
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आरोपी निजी या सरकारी बैंक के कर्मी और कोरियर सर्विस व टेली कॉलर से 200 से 300 रुपये में जानकारी जुटा लेते थे। इसके बाद फर्जी दस्तावेज तैयार कर क्रेडिट कार्ड बनवाकर रुपये उड़ा लेते थे। एसटीएफ की तफ्तीश में सामने आया है कि वर्ष 2014 में बैंकों की ओर से मैग्नेटिक स्ट्रिप युक्त कार्ड जारी किए जाते थे।
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उपभोक्ताओं को धोखाधड़ी से बचाने के लिए क्रेडिट कार्ड आधा काटकर मंगाया जाता था, ताकि अन्य कोई स्वैप नहीं कर सके। पकड़े गए आरोपियों ने बैंक में काम करते समय स्ट्रिप सुरक्षित रखने का तरीका सीख लिया था। उसी को बचाकर आधा हिस्सा काटकर उपभोक्ता को देते और फिर पैसे निकाल लेते थे।