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शहीदों के परिवारों को ढूंढ़ रही है ये फैमिली

Fri, 14 Feb 2014 11:16 PM IST
अमर उजाला, गाजियाबाद
अमर उजाला, गाजियाबाद Updated Fri, 14 Feb 2014 11:16 PM IST
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a couple is looking for the families of martyrs with their son

देश की आजादी के लिए जान देने वाले शहीद भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव के परिवार किस हाल में हैं? देश के आखिरी मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर के उत्तराधिकारी कहां है? इसकी जानकारी बहुत कम लोगों को है।

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हकीकत ये है कि देश की आजादी दिलाने वाले इन महान विभूतियों के परिवार गुमनामी और गुरबत में जीवन जीने को मजबूर हैं। सरकार से इन्हें कोई मदद तक नहीं मिली। इन्हें खोजने में जुटा है हॉट सिटी का एक दंपति और उनका बेटा। जिससे इन परिवारों की आर्थिक मदद के लिए कुछ किया जा सके।
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इंदिरापुरम के ज्ञानखंड तृतीय स्थित शिप्रा रिवेरा सोसायटी निवासी शिवनाथ झा और उनकी पत्नी नीना झा के साथ ही बेटे आकाश ने इस दिशा में कदम उठाया।

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खुदीराम बोस, भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, बटुकेश्वर दत्त, तात्या टोपे, अशफाकउल्लाह खान, सत्येंद्र नाथ बोस, दामोदर हरि, बहादुर शाह जफर, चंद्र शेखर आजाद सहित 22 महापुरुषों के परिवारों को खोजकर दंपति और उनके बेटे ने 60 मिनट की एक डाक्युमेंट्री ‘एक खोज भारत की’ बनाई।

जिससे लोगों को पता लगे कि भारत को आजादी दिलाने वाली महान विभूतियों के परिवार वर्तमान में किस हाल में हैं। फिल्म का मकसद रहा कि इनके परिवारों को सरकार की ओर से आर्थिक मदद मिले। फिल्म के जरिए इन्हें सरकार से गुमनामी के अंधेरे से बाहर निकालने के लिए प्रयास किया जा रहा है।

शिवनाथ झा बताते हैं कि बहुत ही शर्म की बात है कि देश के लिए जान देने वालों के परिवारों का बुरा हाल है, जबकि इन्हें राष्ट्रीय परिवार घोषित किया जाना चाहिए। इसके साथ ही दंपति ने ‘एक खोज भारत की’ पुस्तक भी लिखी, जिससे परिवारों की आर्थिक मदद हो सके।


'काफी टेबल बुक' से खुले कई अहम राज
बहादुर शाह जफर की पौत्रवधु सुल्ताना बेगम कोलकाता से पांच किलोमीटर दूर शिबपुर में गुमनाम जीवन बिता रही थीं। शिवनाथ झा ने कॉफी टेबल बुक तैयार की, जिसे प्राइम मिनिस्टर्स ऑफ इंडिया-भारत भाग्य विधाता का नाम दिया गया। इसमें बादशाह जफर के उत्तराधिकारियों की जिंदगी को बखूबी बयां किया गया। किताब में भारत के प्रधानमंत्रियों के बारे में भी बताया गया।

शिव नाथ झा बताते हैं कि वर्ष 2007 में सुल्ताना बेगम से मिले और गुरबत के जीवन को देखते ही उनके लिए कुछ करने की ठानी। जिसके लिए पत्नी का सहयोग मिला और यह किताब सफल हो पाई। इस किताब को लाने का मकसद था कि सुल्ताना बेगम की 33 वर्षीय बेटी मधु का विवाह कराया जा सके। किताब के जरिए जमा राशि को उनके नाम से बैंक में जमा कराया गया। एक फार्मा कंपनी के मदद से निवास का इंतजाम भी किया गया। इसके पहले शिवनाथ झा अपने लेखनी के माध्यम से शहनाई उस्ताद और भारत रत्न बिस्मिल्ला खान और तात्या तोपे के उत्तराधिकारियों के लिए फंड इकट्ठा कर सहयोग किया गया।

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