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पीठ से फेफड़े में घुसा सूआ, AIIMS के डॉक्टरों ने किया सफल ऑपरेशन

Tue, 21 Nov 2017 12:46 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 21 Nov 2017 12:46 PM IST
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a big needle entered in a man's back, aiims doctors successful in removing it
मरीज राकेश की पीठ में धंसा सूआ ,एम्स के डॉक्टर्स ने सफल ऑपरेशन कर निकाला - फोटो : अमर उजाला

देश के सबसे बड़े चिकित्सीय संस्थान एम्स के डॉक्टरों ने दिल्ली के ही एक युवक को नया जीवन दिया है। राह चलते एक विवाद के कारण पीठ में घुसा सूआ को लेकर 28 वर्षीय घायल तीन दिन तक विभिन्न अस्पतालों के चक्कर काटता रहा।

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लेकिन जब उसे कहीं भी उम्मीद नहीं दिखी तो वह एम्स के ट्रामा सेंटर पहुंचा, जहां कुछ ही दिन पहले डॉक्टरों ने उसकी सर्जरी कर सूआ निकालने में कामयाबी हासिल की। फिलहाल मरीज स्वस्थ्य है।
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डॉक्टरों ने बताया कि उत्तरी दिल्ली निवासी राकेश की पीठ में किसी ने सूआ घोंप दिया था। छह इंच की लंबाई वाला सूआ इस कदर घोंपा गया था कि राकेश की पीठ से होता हुआ वह बांये फेफड़े में जाकर फंस गया था।
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आमतौर पर ऐसे मामलों को देखने के लिए एम्स के पास काफी कुशल डॉक्टरों की टीम मौजूद है। जो बगैर किसी चीर फाड़ के भी इस तरह के केस का निपटारा कर सकती है। राकेश को लेकर भी ऐसा ही हुआ। एम्स के डॉक्टरों ने वीडियो असिस्टेड थोरेस्कोपिक सर्जरी से ऑपरेशन करके सूआ निकाल लिया।
 

फिल्मों को देख नहीं लें सीख 

a big needle entered in a man's back, aiims doctors successful in removing it
मरीज की एक्सरे फिल्म - फोटो : अमर उजाला

इस तकनीक में मरीज के शरीर मे छोटे-छोटे होल (छेद) करके उसमें दूरबीन की मदद से कोई रॉड या रॉडनुमा चीज निकाली जाती है। ट्रामा सेंटर के डॉ. बिप्लब मिश्रा बताते हैं कि ऐसे ऑपरेशन में मरीज को बेहोशी के लिए दिए जाने वाले एनेस्थीसिया में भी डॉक्टर को पारंगत होने की जरूरत होती है।

इस केस में एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉक्टर ज्ञानेंद्र ने साथ दिया। उन्होंने बताया कि सबसे पहले डबल लंग्स वेंटीलेशन पद्घति के जरिए डॉक्टरों ने एक फेफड़े को एनेस्थीसिया दिया ताकि मरीज किसी भी तरह से सांस ले सके।

डॉ. बिप्लब ने अमर उजाला को बताया कि आमतौर पर एम्स में इस तरह के केस आते रहते हैं। कुछ वर्ष पहले एक केस आया था जिसमें सरिया शरीर के आरपार थी। इसलिए यह नया केस नहीं है। लेकिन लोगों को यह जानकारी होना जरूरी है कि फिल्मों से सीख कतई न लें।

अक्सर देखने को मिलता है कि किसी के शरीर में कोई चीज घुस जाती है तो लोगों को लगता है कि इसे तुरंत निकाल देना चाहिए। जबकि ऐसा करने से घायल की उम्र ही कम होती है। कोई भी चीज शरीर से केवल ऑपरेशन थियेटर में ही निकालना सुरक्षित हो सकता है। अगर आप कोई चीज शरीर से बाहर निकालते हैं तो ब्लीडिंग की वजह से मरीज की जान भी जा सकती है। 

ट्रॉमा सेंटर के प्रमुख डॉ. राजीव मल्होत्रा ने बताया कि इस तरह के मामलों में एम्स के ट्रामा सेंटर के नाम कई उपलब्धियां दर्ज हैं। गंभीर मरीजों को तत्काल उपचार देने की कोशिशें डॉक्टर लगातार करते आ रहे हैं।

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