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हरियाणा सरकार में एक और घोटाला, धूल फांक रही 936 करोड़ के घोटाले की फाइल

Wed, 13 Jul 2016 12:09 AM IST
जितेंद्र राठी/अमर उजाला, गुड़गांव
जितेंद्र राठी/अमर उजाला, गुड़गांव Updated Wed, 13 Jul 2016 12:09 AM IST
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936 crore scam files gathering dust in Chandigarh
- फोटो : amar ujala

भ्रष्टाचार के आरोप में नगर निगम के आठ अधिकारी निलंबित क्या हुए। अब और भी मामले निकलकर सामने आने लगे हैं। नया मामला करीब 936 करोड के घोटाले से जुड़ा है, जिसकी जांच होने के बावजूद अब तक आरोपियों पर सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की है।

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निवर्तमान सीनियर डिप्टी मेयर यशपाल बत्रा ने इस मुद्दे को लेकर भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अब इस मामले को एक बार फिर मुख्यमंत्री के संज्ञान में लाया जाएगा।
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नगर निगम का नाम आते ही घोटालों की कहानी सामने आने लगती है। यहां एक नहीं कई घोटालों की जांच हुई और फाइलों में दबकर रह गई। जो काफी शिकायतों के बावजूद बाहर नहीं आ पा रही हैं।

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भेजी गई फाइल चंडीगढ़ में धूल खा रही है

936 crore scam files gathering dust in Chandigarh

आखिर निगम में खेल पावर का चल रहा है या पैसे का, यह कहना मुश्किल है, लेकिन जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद भी अधिकारियों पर कार्रवाई न होना, कहीं न कहीं भ्रष्टाचार की जड़ों को मजबूत कर रहा है।

शहर में फुट ओवर ब्रिज (एफओबी) मामले में भी 936 करोड़ का घोटाला किए जाने की बात सामने आ रही है। निगमायुक्त द्वारा जांच कर कार्रवाई के लिए भेजी गई यह फाइल चंडीगढ़ कार्यालय में धूल फांक रही है।

बिना ई-टेंडरिंग के 23 करोड़ के विकास कार्य कराने के मामले में छह एक्सईएन समेत आठ अधिकारियों के फंसने के बाद अब पुराने मामले भी उखड़ने लगे हैं। मामला अप्रैल 2014 का बताया जा रहा है, जिसकी शिकायत निगम अधिकारियों से लेकर लोकायुक्त और सीएम तक की गई।

13 फुट ओवरब्रिज में अनियमितता

936 crore scam files gathering dust in Chandigarh

इस पर निगम अधिकारियों ने जांच की और पाया कि सभी नियमों को दरकिनार कर एफओबी का काम एक एजेंसी को सौंपा गया। यही नहीं इस कार्य में एजेंसी को करोड़ों का लाभ पहुंचाने का खेल खेला गया, लेकिन मामले की फाइल को चंड़ीगढ़ मुख्यालय में दबा दिया गया।

बतौर बत्रा 2014 में गांव कन्हई निवासी सतीश यादव ने मुख्यमंत्री को शिकायत भेजी थी कि साइबर सिटी में जगह-जगह 13 फुट ओवरब्रिज बनाने के काम में अनियमितता बरती गई।

कोटेशन के आधार पर एक एजेंसी को करीब 18 करोड़ रुपये में इसका काम सौंपा गया। शिकायत के बाद डायरेक्टर ने इसकी जांच निगमायुक्त को सौंपी, जिसके लिए एक कमेटी बनाई गई।

गाइडलाइन को ताक पर रखकर निर्माण

936 crore scam files gathering dust in Chandigarh
scam - फोटो : File

जांच रिपोर्ट में सामने आया कि जिस एजेंसी को काम सौंपा गया, उसे काम ई-टेंडरिंग द्वारा नहीं दिया गया। रिपोर्ट में हैरानी जताई गई कि इस कोटेशन की फाइल पर कहीं भी डिस्पैच नंबर तक नहीं लगाया गया। बड़ी तेजी के साथ टेंडर देने की कार्रवाई की गई।

यहीं नहीं फाइनेंस एंड कांट्रैक्ट कमेटी (जिसमें मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर व दो पार्षद शामिल थे) से भी इजाजत नहीं ली गई। काम देने के बाद अधिकारियों ने नगर निगम सदन से मंजूरी की जरूरत समझी, लेकिन भ्रष्टाचार का मुद्दा देखते हुए मेयर ने इसे एजेंडे में शामिल नहीं किया।

आरोप है कि बिना सर्वे घर बैठे एफओबी बनाने की फाइल तैयार की गई। 27 दिनों में सब कुछ बड़ी तेजी के साथ किया गया। कई गाइडलाइन को ताक पर रखकर एफओबी का निर्माण भी शुरू कर दिया गया।

घोटाले की जद में बन गए चार एफओबी

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13 में से चार एफओबी बन भी गए। इस पूरे प्रकरण में तत्कालीन  मुख्य अभियंता बीएस सिंगरोहा कठघरे में आए। सीएम कार्यालय में शिकायत पहुंचने के बाद एफओबी का काम बीच में रोक दिया और मामले की जांच निगमायुक्त को सौंपी गई, लेकिन ताज्जुब यह है कि अब तक इस प्रकरण से जुड़े अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं की गई।

बत्रा ने सवाल उठाया कि बिना ई-टेंडरिंग और सभी नियमों को ताक पर रखकर जल्दबाजी में एक एजेंसी को टेंडर दिया जाना अपने आप में यह दर्शाता है कि इसमें बड़ा गोलमाल किया गया है। उन्होंने गोलमाल का खुलासा करते हुए बताया कि 18 करोड़ में 13 एफओबी का निर्माण करने वाली एजेंसी को 20 साल के लिए यह एफओबी विज्ञापन के लिए लीज पर दिया गया।

हर एफओबी से प्रत्येक माह करीब 30 लाख रुपये की कमाई होनी थी। 13 एफओबी की यह कमाई सालाना 46.80 करोड़ होती। 20 वर्ष में इससे 936 करोड़ की कमाई होती, जो कि निर्माण करने वाली एजेंसी के खाते में जाती।

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