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रेलवे की तीसरी आंख से बच नहीं सकेंगे अपराधी: 756 स्टेशन होंगे वीएसएस से लैस, निर्भया फंड से अब प्लेटफार्म पर लगेगा पैनिक बटन

Thu, 07 Jul 2022 04:24 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: विजय पुंडीर Updated Thu, 07 Jul 2022 04:24 AM IST
सार

अगले साल जनवरी तक 756 रेलवे स्टेशनों को वीडियो निगरानी प्रणाली से लैस किया जाएगा। आधुनिक तकनीक वाले कैमरे से स्टेशन में प्रवेश करने वाले अपराधी भी बच कर नहीं निकल सकेंगे।

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756 railway stations to be equipped with video surveillance system by January
ट्रेन - फोटो : istock

विस्तार

ट्रेनों में सुरक्षा के साथ ही अब स्टेशन के प्लेटफार्म पर भी संकट की स्थिति से यात्रियों को बचाने की कवायद शुरू हो गई है। रेलवे ने प्लेटफार्म पर पैनिक बटन लगाने का निर्णय लिया है। यह स्टेशन के हर प्लेटफार्म पर दो-दो पैनिक बटन लगेगा। खास बात इसमें यह भी है कि बटन सक्रिय होते ही ऑपरेटर वर्कस्टेशन पर संबंधित कैमरे के पॉप-अप के माध्यम से संकट में फंसे यात्री को स्क्रीन पर देख सकेगा। कैमरा मूव करेगा और पैनिक बटन पर जूम करके संकटग्रस्त व्यक्ति को देख सकेगा।

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रेलवे जल्द ही 756 प्रमुख स्टेशनों पर वीडियो निगरानी प्रणाली (वीएसएस) से लैस करने जा रहा है। भारतीय रेलवे व रेलटेल निर्भया सुरक्षा कोष से इस काम को अगले साल जनवरी तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी कहा है कि रेलवे में नई तकनीक को तेजी से समाहित करने की जरूरत। जैसे कि रोलिंग स्टॉक, निर्माण, सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, या ऐसी स्थितियों में जहां मानव इंटरफेस हो।
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रेलवे के तीसरी आंख से बच नहीं सकेंगे अपराधी
स्टेशन पर लगे कैमरे से अपराधी बचकर नहीं निकल पाएगा। वीएसएस (सीसीटीवी) सिस्टम लाइव सीसीटीवी वीडियो फीड से चेहरे की छवियों को कैप्चर करेगा। ब्लैकलिस्ट मैच होने पर लगातार अलर्ट मिलेगा। यानी अपराधियों के छवि को पहले से ही सिस्टम में अपलोड रहेगा। जैसे ही कोई अपराधी स्टेशन परिसर में प्रवेश करेगा उसकी सूचना मिल जाएगी। दरअसल, वीडियो एनालिटिकल और फेस रिकग्निशन सिस्टम से लैस किया गया है।

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इसके लिए 4 प्रकार के आईपी कैमरे लगे होंगे। इनमें डॉम टाइप, बुलेट टाइप, पैन टिल्ट जूम टाइप और अल्ट्रा एचडी-4के स्थापित किया जाएगा ताकि रेलवे परिसरों के भीतर अधिकतम कवरेज सुनिश्चित हो सके। इससे रेल सुरक्षा बल अधिकारियों को अतिरिक्त सहायता मिल सकेगी। सीसीटीवी कैमरों से मिलने वाली वीडियो फीड की रिकॉर्डिंग 30 दिनों के लिए स्टोर की जा सकेगी।

तीन स्तरों पर स्टेशन की मॉनिटरिंग
स्टेशनों पर लगे सीसीटीवी कैमरे और वीडियो फीड को 3 स्तरों पर मॉनिटर किया जाएगा ताकि रेलवे परिसरों की संरक्षा और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। कैमरों, सर्वर, यूपीएस और स्विचों की मॉनिटरिंग के लिए नेटवर्क मैनेजमेंट सिस्टम (एनएमएस) की व्यवस्था भी की जाएगी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से रेलवे संचालन क्षेत्रों में प्रवेश करने वाले घुसपैठ का पता लगाने। कैमरों से छेड़छाड़ करने वाले, मानव और वाहन का पता लगाने के लिए किया जाएगा।

आधुनिक सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल
इस प्रोजेक्ट में सबसे आधुनिक सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर का इस्तेमाल किया जाएगा। वीएसएस सिस्टम आईपी बेस्ड होगा। इसमें सीसीटीवी कैमरों का एक नेटवर्क होगा। कैमरे ऑप्टिकल फाइबर केबल पर काम करेंगे और सीसीटीवी कैमरों की वीडियो फीडिंग न केवल स्थानीय आरपीएफ पोस्टों पर बल्कि मंडल और जोनल स्तर पर सेंट्रलाइज सीसीटीवी कंट्रोल रूम में भी प्रदर्शित करेगा।
-अरुणा सिंह, रेलटेल अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक

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