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लीलाधर जगूड़ी को 28वां व्यास सम्मान, बोले कविता में विचार महत्वपूर्ण
Thu, 31 Oct 2019 05:42 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 31 Oct 2019 05:42 AM IST
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सम्मान समारोह...
- फोटो : अमर उजाला
केके बिरला फाउंडेशन की ओर से वर्ष 2018 का 28वां व्यास सम्मान सुप्रसिद्ध साहित्यकार लीलाधर जगूड़ी को दिया गया। वर्ष 2013 में प्रकाशित प्रसिद्ध कविता संग्रह ‘जितने लोग उतने प्रेम’ के लिए उन्हें यह सम्मान मिला।
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इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में हुए समारोह में सुप्रसिद्ध साहित्यकार और मुख्य अतिथि गोविंद मिश्र, वरिष्ठ साहित्यकार व व्यास सम्मान चयन समिति के अध्यक्ष प्रो. विश्वनाथ प्रसाद त्रिपाठी, केके बिरला फाउंडेशन के निदेशक डॉ. सुरेश ऋतुपर्ण ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया।
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हिंदी की उत्कृष्ट साहित्यिक कृति के लिए मिले इस सम्मान के तहत उन्हें प्रशस्ति पत्र, 4 लाख रुपये की राशि और केके बिरला फाउंडेशन का प्रतीक चिन्ह दिया गया।
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अपने पुरस्कृत कविता संग्रह से उन्होंने 21वीं सदी की कविताओं में निरंतर बदलती काव्य संवेदना एवं शिल्प को एक नया स्वरूप और स्वर प्रदान किया है। मुख्य अतिथि गोविंद मिश्र ने कहा कि इस प्रदूषित वायु वाली नगरी में ‘प्रेम’ शब्द एक ताजगी लाता है। जगूड़ी जी ने प्रेम को बाहर से देखा कि इसके कितने रूप निकलते हैं। प्रेम को लिखने के लिए उन्होंने अलग ढंग से दृष्टि ली।
प्रशस्ति पाठ में डॉ. सुरेश ऋतुपर्ण ने कहा कि जगूड़ी की काव्य भाषा सृजक मन की व्यग्रता और नया रचने के लिए सांचों को तोड़ने के लिए तत्पर दिखाई देती है। हिंदी के वरिष्ठ साहित्यकार विश्वनाथ प्रसाद तिवारी ने कहा कि जैसे-जैसे समय आगे बढ़ेगा, वैसे-वैसे कविता की जरूरत बढ़ती जाएगी। कविता का चक्र पाठक पर जाकर पूरा होता है।
अकथनीय को कथनीय बनाती है कविता : जगूड़ी
सम्मान पाने के बाद साहित्यकार लीलाधर जगूड़ी ने कहा कि कविता एक अकथित को कहती है, जो अब तक कहा और सुना नहीं गया। अकथनीय को भी कविता कथनीय बना देती है। कविता के बिना गद्य पूरा नहीं होता। इसलिए कविता से छुटकारा नहीं मिल सकता। उक्ति विशेष ही कविता है। कविता में भाषा नहीं, बल्कि विचार महत्वपूर्ण है।