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दिल्लीवासियों के घरों में 24 घंटे जलापूर्ति का लक्ष्य हासिल करने में लग सकते हैं कई वर्ष
Mon, 24 Jun 2019 03:00 PM IST
पूजा त्रिपाठी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: पूजा त्रिपाठी
Updated Mon, 24 Jun 2019 03:00 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Social Media
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सभी दिल्लीवासियों के घरों में 24 घंटे जलापूर्ति का लक्ष्य हासिल करने में दिल्ली सरकार के सामने कई अड़चनें हैं। जलापूर्ति के दौरान पानी की बर्बादी, लीकेज, कम समय और कम दबाव होने सहित पाइपलाइन डालने के रास्ते में कई रुकावटें हैं, जिसे दूर करने में वर्षों लग सकते हैं।
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पायलट परियोजना के तहत 24 घंटे पानी की आपूर्ति के लिए की पहल के तहत पिछले साढ़े वर्ष में महज 1250 घरों में यह सुविधा मुहैया की जा सकी। अभी भी आलम यह है कि पानी की आपूर्ति से रोजाना करीब 205 एमजीडी कम पानी की दिल्ली जल बोर्ड की ओर से आपूर्ति की जा रही है।
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24 घंटे पानी की आपूर्ति की परियोजना के लक्ष्य को हासिल करने के लिए नए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनाने, यमुना के बाढ़ क्षेत्र में पानी को इकट्ठा करने सहित पाइपलाइन डालने के कार्य किए जा रहे हैं। वहीं कई क्षेत्रों में बोरवेल और टैंकरों के जरिये लोग अपनी जरूरतें पूरी कर रहे हैं। पानी की बर्बादी, चोरी के अलावा लीकेज के कारण भी बोर्ड को लगातार चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
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दिल्ली जल बोर्ड ने 2009 में इस दिशा में पहले करते हुए 2013 में 24 घंटे पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सुएज ग्रुप के साथ करार किया था। इसके तहत मालवीय नगर, वसंत विहार सहित आसपास के क्षेत्रों में 24 घंटे जलापूर्ति के लिए शुरू पायलट परियोजना को दिसंबर 2014 तक पूरा करने का लक्ष्य था।
लेकिन करीब साढ़े छह वर्ष बीतने के बाद भी नवजीवन विहार और गीतांजली इंक्लेव महज 800 घरों के अलावा वसंत विहार के वेस्ट एंड कॉलोनी के 450 घरों में यह सुविधा मुहैया की जा सकी। अधिकारियों के मुताबिक जिस क्षेत्र में पायलट परियोजना की शुरुआत की गई वहां अभी भी 80 एमजीडी की बजाय 65 एमजीडी पानी की आपूर्ति की जा रही है।
दिल्ली जल बोर्ड के अध्यक्ष अरविंद केजरीवाल ने भी बैठक में नए पानी के मीटर के लिए जटिल नियमों की बजाय इसे आसान बनाने के निर्देश दिए थे। बोर्ड के सदस्य शलभ कुमार के मुताबिक पायलट परियोजना के तहत पानी की बर्बादी में कमी आई और गैर राजस्व वाले पानी की मात्रा 62 से कम होकर 36 फीसदी तक पहुंच गई।