शर्मनाक: नोएडा में अधिकारियों की संवेदनहीनता से खराब हो रहे 22 लावारिस शव, बर्फ तक का इंतजाम नहीं; देखें Video
शवों को बिना डीप फ्रीजर के बाहर ही खुले में ही छोड़ दिया गया है। 24 घंटे से अधिक समय होने के बाद शव खराब होना शुरू हो गए हैं। उनसे उठ रही दुर्गंध के कारण वहां आने वाले लोगों तक का खड़ा होना दुश्वार बना हुआ है।
विस्तार
लू की वजह से बढ़े मौत के मामलों के बाद पोस्टमार्टम हाउस पर तीसरे दिन हालात और अधिक बिगड़ गए। अधिकारियों की संवेदनहीनता की वजह से यहां भयावह मंजर बना हुआ है। पोस्टमार्टम हाउस के अंदर गुरुवार को जहां कमरों से लेकर गलियारे तक में शव लावारिस पड़े हुए थे। इनको बिना डीप फ्रीजर के बाहर ही खुले में ही छोड़ दिया गया है। 24 घंटे से अधिक समय होने के बाद शव खराब होना शुरू हो गए हैं। उनसे दुर्गंध तक उठने लगी है। इसके बाद भी असंवेदनशील अधिकारी शवों को खराब होने से बचाने के लिए बर्फ तक का इंतजाम नहीं कर पाए।
गुरुवार को भी 28 शवों का पोस्टमार्टम डॉक्टरों की टीम ने किया। ऐसे में मंगलवार से अब तक 72 घंटे में 79 शवों का पोस्टमार्टम किया जा चुका है। इनमें से 22 शव अज्ञात बताए जा रहे हैं। गुरुवार को एक शव की पहचान हो पाई। मौके पर मौजूद एक पुलिसकर्मी ने बताया कि परिजनाें को जब शव सौंपा गया। वह खराब हो चुका था। किसी तरह परिजनों को इसे अंतिम संस्कार कराने के लिए सौंपा गया। पोस्टमार्टम हाउस का मंजर यह है कि मुख्य प्रवेश द्वार से लेकर अंदर पोस्टमार्टम हॉल के अलावा गलियारा, कूड़ा रखने के लिए बना कमरा, शव रखने के लिए बना कोल्ड रूम जोकि अब उपयोगी नहीं रहा, तक में शव रखे गए हैं। पोस्टमार्टम के बाद परिजन और पुलिसकर्मियों तक को अंदर अपने परिचित का शव लेने के लिए जमीन पर पड़े शवों के बीच से होकर जाना पड़ रहा था।
एडीसीपी नोएडा मनीष मिश्र का कहना है कि अज्ञात शव के पोस्टमार्टम के बाद 72 घंटे के लिए शव को पोस्टमार्टम हाउस पर रखती है। यह नियम है। इस दौरान अगर शव की पहचान नहीं होती और परिजन शव लेने नहीं आते। ऐसे में लावारिस मानते हुए शव का अंतिम संस्कार कराया जाता है। शव खराब नहीं हो, यह जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की है।
कोल्ड रूम नहीं तो बर्फ भी नहीं आई
शव खराब नहीं हों। इसके लिए उनको डीप फ्रीजर या कोल्ड रूम में रखा जाता है। पांच में से चार डीप फ्रीजर खराब पड़े हुए हैं। केवल एक में ही चार शव रखने की व्यवस्था है। हालात बिगड़े तो बाकी को भी ठीक कराने का काम अब शुरू हो पाया है। कोल्ड रूम पर अभी काम ही शुरू नहीं हो पाया है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग को बर्फ का इंतजाम यहां करना चाहिए था। प्रभारी अधिकारी डॉ. जैसलाल से जब इस बारे में पूछा गया तो वह उचित जबाव तक नहीं दे पाए। सीएमओ भी इसे अप्रत्याशित घटना बताकर पूरे मामले को टालने का ही प्रयास करते रहे।
12 घंटे से अधिक का लग रहा समय
पोस्टमार्टम हाउस में केवल अज्ञात शवों की ही बेकदरी नहीं हो रही है। यहां जिन शवों के लिए परिजन मौजूद हैं, उनके भी पोस्टमार्टम 12 घंटे से अधिक समय के बाद तक हो पा रहे हैं। तिलपता में ट्रक के अंदर ही गर्मी से नितेश की मौत के बाद सुबह छह बजे उसका शव पोस्टमार्टम हाउस पहुंचा। परिजनों ने बताया कि दोपहर में एक बजे डॉक्टर के आने के बाद पोस्टमार्टम शुरू हो पाए। इसी तरह रोजा जलालपुर में बुलंदशहर के एक व्यक्ति के मर्डर के मामले में भी बुधवार की शाम को ही शव पहुंच गया। इसका पोस्टमार्टम अगले दिन दोपहर दो बजे तक नहीं हो पाया।
शमशान घाट पर भी नहीं बुझ पा रही चिताएं
बुरा हाल केवल पोस्टमार्टम हाउस का ही नहीं हैं। सेक्टर-94 में बने शवदाह गृह पर भी अंतिम संस्कार की गिनती बढ़ी हुई है। देर शाम तक यहां शवों के अंतिम संस्कार कराए जाते रहे। दोपहर में तो एक साथ छह चिंताएं यहां जलीं। कर्मचारियों का कहना है कि शाम तक 18 शवों का अंतिम संस्कार यहां कराया जा चुका है। आम दिनों की तुलना में यह करीब तीन गुना है।
देर रात हालात देखने पहुंचे सीएमओ
पोस्टमार्टम हाउस पर भले ही हालात बिगड़े हुए हों। इसके उलट अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर हालात संभालने तक की जरूरत नहीं समझी। स्वास्थ्य विभाग के अलावा जिला प्रशासन के अधिकारी भी संवेदनहीन बने हुए हैं। तीसरे दिन हालात भयावह होने के बाद सीएमओ डॉ. सुनील कुमार शर्मा अपनी टीम के बाद मौके पर पहुंचे। उनका कहना है कि इतने शव एक साथ पोस्टमार्टम के लिए पहुंचना अप्रत्याशित है।
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