बच्चे का गलत ब्लड ग्रुप बताने पर भड़के परिजन, अस्पताल में हंगामा
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परिजनों ने आरोप लगाया है कि अस्पताल के चिकित्सकों और सहायक स्टाफ ने बच्चे का गलत ब्लड ग्रुप बताया। बाद में प्राइवेट पैथोलॉजी लैब में बच्चे का सही ब्लड ग्रुप पता चला। उन्होंने सवाल उठाया कि इस दौरान स्टाफ की लापरवाही से अगर कुछ गलत हो जाता तो इसकी जवाबदेही किसकी होती।
चुक्खूवाला निवासी विक्रम सिंह मौर्य ने बताया कि रविवार पांच जून को दून महिला अस्पताल में उनके पौत्र का जन्म हुआ। मंगलवार को बच्चे की तबियत बिगड़ने पर उसे वेंटिलेटर पर रखा गया। ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर ने बताया कि बच्चे के ब्लड टेस्ट के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा।
प्राइवेट पैथॉलॉजी से जांच में सामने आया सच
परिजनों का आरोप है कि रिपोर्ट देखने के बाद डॉक्टर ने ब्लड ग्रुप बी पॉजिटिव बताया। शक होने पर परिजनों ने जब प्राइवेट पैथोलॉजी लैब से जांच कराई तो ब्लड ग्रुप ओ पॉजिटिव निकला। इसके बाद परिजन देर शाम बच्चे को लीव अंगेंस्ट मेडिकल एडवाइज (लामा) घर ले गए। बुधवार सुबह बच्चे की मां को डिस्चार्ज कराने के बाद उन्होंने अस्पताल में हंगामा किया।
उन्होंने कहा कि चिकित्सक और सहायक स्टाफ मानने को तैयार नहीं हुआ कि बच्चे का ब्लड ग्रुप ओ पॉजिटिव है। प्राइवेट लैब की रिपोर्ट मानने से भी उन्होंने इंकार कर दिया। परिजनों ने कहा कि अगर ब्लड ग्रुप के आधार पर बच्चे को गलत खून चढ़ा दिया जाता तो उसकी जान को खतरा हो सकता था।
उन्होंने आरोपी डॉक्टर और सहायक स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि किसी की जान के मामले में इतनी गंभीर लापरवाही करने वालों को कड़ा सबक मिलना चाहिए। मौके पर पहुंचे अस्पताल के चिकित्साधीक्षक डॉ. केके टम्टा ने मामले की जांच का आश्वासन दिया।