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अपनी पहली किताब का जश्न चाट के साथ
अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 11 Feb 2014 03:32 PM IST
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मुझे याद है, जब मेरी पहली किताब ‘रूम ऑन द रूफ’ कड़ी मशक्कत के बाद प्रकाशित हुई थी तो मैंने अपने दोस्तों संग घंटाघर स्थित चाट वाली गली में चाट खाकर जश्न मनाया था।
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छात्रों से साझा किए अनुभव
मैं आज भी उस चाट वाले से मिलना पसंद करूंगा। ऐसे तमाम अनुभव पद्मभूषण से सम्मानित अंग्रेजी के उपन्यासकार रस्किन बांड ने छात्रों से साझा किए। रस्किन बांड सोमवार को नटराज पब्लिशर्स में आयोजित सम्मान कार्यक्रम में पहुंचे।
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उन्हें शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। इस मौके पर विभिन्न स्कूलों के बच्चे और राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कॉलेज (आरआईएमसी) के कैडेट उनसे रूबरू हुए। बच्चों ने उनकी जिंदगी और करियर से जुड़े अहम सवाल पूछे।
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एक सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि उनकी मां हमेशा चाहती थी कि वह सेना में जाकर देशसेवा करें। लेकिन उनका मन पढ़ने लिखने में ज्यादा लगता था। एक अच्छा लेखक बनने के पीछे का राज यह है कि वे स्कूली दिनों से ही काफी किताबें पढ़ते थे।
भूतों पर विश्वास नहीं
उन्होंने युवाओं को नसीहत दी कि लेखक बनने के लिए पहले पढ़ना जरूरी है। रस्किन ने कहा कि वे केवल भूतों को आधार बनाकर किताबें लिखते हैं लेकिन उन्हें भूतों पर विश्वास नहीं है।
इस मौके पर नटराज पब्लिशर्स के उपेंद्र अरोड़ा, आरआईएमसी कमांडेंट कर्नल एचएस बैंसला, अदिती अरोड़ा, आरआईएमसी उप प्राचार्य सीएस विश्वकर्मा आदि मौजूद रहे।
स्कूल न जाने पर मां से हुआ था विवाद
रस्किन ने बताया कि उनके पिता आर्मी में थे। बार-बार तबादला होने की वजह से वे लंबे समय तक स्कूल नहीं जा पाए। घर पर मस्ती की आदत पड़ गई, लेकिन जब स्कूल जाना पड़ा तो बड़ा जोर पड़ा।
मां ने स्कूल जाने को कहा तो उन्होंने मना कर दिया। मां से झगड़ा हुआ लेकिन अंत में बोर्डिंग स्कूल में जाना ही पड़ा।