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पर्यावरण दिवस 2020: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने किया वृक्षारोपण, राज्य को दिया यह संदेश

Fri, 05 Jun 2020 01:57 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Fri, 05 Jun 2020 01:57 PM IST
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world environment day 2020: uttarakhand cm tree plantation today
trivendra singh rawat - फोटो : amar ujala

विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर आज उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सीएम आवास में वृक्षारोपण किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने सभी को पर्यावरण दिवस की शुभकामनाएं दीं।

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कहा कि उत्तराखंड देवभूमि है और हम प्रकृति के बेहद नजदीक रहते हैं। हम प्रकृति की पूजा करते हैं। कहा कि उत्तराखंड में आज भी लगभग 70 प्रतिशत वन क्षेत्र है और 48 प्रतिशत भू-भाग वनों से ढका हुआ है। यहीं चिपको आंदोलन की शुरूआत हुई। एक दूरस्थ गांव में गौरा देवी जैसी महिला ने दुनिया को पर्यावरण के प्रति जागरुक करने का काम किया। वृक्ष बचाने के लिए उन्होंने अपनी जान की भी परवाह नहीं की। 
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मैं आज आप से यह अपील करता हूं कि हम यह संकल्प लें कि हमारे घर में कोई भी मांगलिक कार्य हो तो उस दिन वृक्ष लगाकर उसे यादगार बना सकते हैं। हमारे जो पितृ नहीं रहे, पेड़ लगाकर हम उन्हें भी यादगार के रूप में रख सकते हैं। 
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विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आज उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने बैराज स्थित अपने कैंप कार्यालय सहित भरत मंदिर इंटर कॉलेज एवं आईडीपीएल इंटर कॉलेज के प्रांगण में विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण किया।

जैव विविधता पर सीएम करेंगे अफसरों से संवाद

विश्व पर्यावरण दिवस पर राज्य की पर्यावरण रिपोर्ट राज्य पर्यावरण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जारी करेगा। इसके साथ ही जिलाधिकारियों, डीएफओ, कृषि एवं उद्यान तथा अन्य विभागों के अधिकारियों से मुख्यमंत्री जैव विविधता पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से संवाद करेंगे। इस समारोह की थीम जैव विविधता है और इसमें वन मंत्री हरक सिंह, प्रमुख सचिव वन आनंद वर्द्धन, जैव विविधता बोर्ड, वन विभाग के अधिकारी आदि शामिल होंगे।

समारोह के तहत वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सीएम सभी जिलाधिकारियों, जिला प्रभागीय अधिकारियों और अन्य विभागों के अधिकारियों से बात करेेंगे। विश्व पर्यावरण दिवस के तहत ही वन अनुसंधान केंद्र हल्द्वानी की ओर से नेचर पार्क की शुरूआत की जाएगी। विश्व पर्यावरण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव एसपी सुबुद्धि ने बताया कि पर्यावरण दिवस पर जारी होने वाली रिपोर्ट को अल्मोड़ा स्थित जीबी पंत संस्थान के सहयोग से तैयार किया गया है। रिपोर्ट में प्रदेश के पर्यावरण की स्थिति का आकलन प्रस्तुत किया गया है। यह पहली रिपोर्ट है जो पूरे प्रदेश को आधार मानकर तैयार की गई है।

मनुष्य के संस्कारों में हो पर्यावरण को शुद्ध रखना : चंडी प्रसाद भट्ट

प्रकृति संरक्षण का जज्बा हमारे संस्कारों से जुड़ा होना चाहिए। अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए प्रकृति के साथ समन्वय जरूरी है, लेकिन आज विकास के नाम पर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। गांधी शांति पुरस्कार प्राप्त प्रख्यात पर्यावरणविद् चंडी प्रसाद भट्ट ने अमर उजाला से खास बातचीत में यह बात कही।

वे कहते हैं कि अपने आसपास के पर्यावरण को शुद्ध रखना मनुष्य के संस्कारों में होना चाहिए। इसके लिए किसी को जागरूक करने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी। कोरोना महामारी के कारण घोषित लॉकडाउन के कारण आज नदियां शुद्ध हो गई हैं और पर्यावरण स्वच्छ हो गया है। पहले लोग अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ ही प्रकृति के साथ समन्वय बनाकर चलते थे।

लोग बुग्यालों में नंगे पांव जाते थे, जिससे बुग्यालों को नुकसान न हो, हिमालय क्षेत्र में ऊंची आवाज में बात नहीं करते थे, जिससे ग्लेशियर न टूटे और वन देवियों के डर से बिना वजह जड़ी-बूटियों का दोहन नहीं करते थे। यानी प्रकृति संरक्षण के लिए लोगों को धार्मिक मान्यताओं से भी जोड़ा गया था, लेकिन मौजूदा समय में लोग पर्यावरण का दोहन कर रहे हैं। जब तक हमारे संस्कारों में पर्यावरण संरक्षण की ललक पैदा नहीं होती तब तक दूषित पर्यावरण के दुष्प्रभाव झेलने पड़ सकते हैं।

कार्बन उत्सर्जन कम होने के कारण पर्यावरण रहा सुरक्षित

लॉकडाउन के कारण पिछले तीन महीनों से डीजल व पैट्रोल से निकलने वाला कार्बन उत्सर्जन एवं प्रदूषक कम होने के कारण प्राकृतिक वनस्पतियों, ग्लेशियरों और नदियों को जीवनदान मिला। वहीं चारधाम यात्रा शुरू न होने के कारण हाई एल्टीट्यूट पर हवाई सेवाओं की ध्वनि तरंगें और मानवीय गतिविधियां न होने के कारण पर्यावरण भी सुरक्षित रहा। 

बदरीनाथ यात्रा पर पिछले तीन सालों में कुल 2,98,189 वाहनों से देश के विभिन्न राज्यों से यात्री बदरीनाथ आए। लेकिन इस बार यात्रियों के न आने से वाहन भी कम आए। ऐसे में कार्बन उत्सर्जन एवं प्रदूषक और मानवीय गतिविधियां कम हुईं हैं जिससे हनुमान चट्टी से बदरीनाथ के आसपास तक 8-10 जगहों पर अभी भी एक फुट बर्फ जमी है। घरेलू अपशिष्ट में कमी होने के कारण नदियों का जल भी स्वच्छ रहा।

पीजी कॉलेज ऋषिकेश के प्रोफेसर राजेश नौटियाल का कहना है कि मानवीय गतिविधियां सीमित होने के कारण तापमान में भी कमी आई। कई जगह बर्फ नहीं पिघली। ये बर्फ नदियों के लिए वाटर रिचार्ज का काम करेगी।

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