इस तरह दुनिया भर में मनाई जाती है दिवाली
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दुनिया के कई हिस्सों में दिवाली का पर्व किसी न किसी रूप में मनाया जाता है। इसी दिन अन्य देशों में मिलते-जुलते त्योहार मनाने को सिर्फ संयोग नहीं माना जा सकता।
यह बात प्रवासी भारतीयों की नहीं बल्कि उन देशों की मूल परंपराओं से जुड़ी है। चीन में यह महीना सफाई के लिए नियत है। घरों के द्वार पर चीनी भाषा में ‘शुभ-लाभ’ लिख पुर्वजों की स्मृति में दीप जलाए जाते हैं।
हमारी अमावस्या के दिन चीन में दिवारात होती है। इस रात में सर्वत्र रोशनी की जाती है। मॉरिशस और नेपाल में तो दीपावली हमारे देश की तरह ही मनाई जाती है, किंतु यहां नववधुएं दीप जलाती हैं। थाईलैंड में दिवाली को क्रायोग कहा जाता है। केले के पत्ते से बने पात्र में दीप प्रज्ज्वलित कर नदी अथवा समुद्र में बहाए जाते हैं।
जापान में इस दिन झाड़ू नहीं लगती और तीन दिनों तक घरों को धोया जाता है। मान्यता है कि झाड़ू लगाने से धन की देवी नाराज हो जाती हैं।
श्रीलंका में भी मनती है दिवाली
म्यांमार में कलात्मक वस्तुओं को खरीद कर पूजा स्थलों पर रखा जाता है और उन पर दीप जलाए जाते हैं। मुस्लिम देश होने के बावजूद मलयेशिया में दीपमालिका होती है और एक-दूसरे को गले मिलकर बधाई दी जाती है।
जर्मनी में अमावस्या के दिन सूर्य आराधना की जाती है। स्पेन में बुरी आत्माओं को भगाने के लिए इस अमावस्या की रात चौराहों पर सैकड़ों मोमबत्तियां जलाई जाती हैं। डेनमार्क में दिवाली के दिन गौ पूजा होती है और गौशालाओं में शाम होते ही दीप जलते हैं।
भारत में श्रीराम के विजयी होकर लंका से लौटने की खुशी में दीपावली मनाई जाती है। जिस रावण का वध कर राम लौटे थे, उसके देश में भी कार्तिक अमावस्या के दिन दीपावली मनाई जाती है।
वास्तव में रावण के बाद नए राजा बने विभीषण ने अयोध्या की भांति लंका में भी दिवाली मनाने का आदेश दिया था। लंका के कई क्षेत्रों में कार्तिक अमावस्या के दिन बुराई पर अच्छाई की विजय के प्रतीक दीप जलाए जाते हैं।