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विश्व आयुर्वेद कांग्रेस: AI और मशीन लर्निंग से बदलेगा जड़ी-बूटियों से इलाज का संसार, विशेषज्ञों ने बताया कैसे

Thu, 12 Dec 2024 10:17 PM IST
अलका त्यागी अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Thu, 12 Dec 2024 10:17 PM IST
सार

देहरादून में आयोजित विश्व आयुर्वेद कांग्रेस में ‘डिजिटल हेल्थ और आयुर्वेद : एक समग्र स्वास्थ्य दृष्टिकोण’ विषय पर विशेष सत्र हुआ। इसमें आयुष मंत्रालय से सचिव आयुष वैद्य राजेश कोटेचा ने भविष्य के आयुर्वेद पर प्रकाश डाला।

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World Ayurveda Congress in dehradun AI and machine learning will change the world of herbal treatment
विश्व आयुर्वेद कांग्रेस - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आयुर्वेद के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल) से जुड़ने के बाद जड़ी-बूटियों से इलाज का संसार बदल जाएगा। विश्व आयुर्वेद कांग्रेस में आए विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि एआई के आने से आयुष चिकित्सकों के भविष्य पर असर नहीं पड़ेगा। सरकार इस दिशा में आगे बढ़ रही है।

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देहरादून में आयोजित विश्व आयुर्वेद कांग्रेस में ‘डिजिटल हेल्थ और आयुर्वेद : एक समग्र स्वास्थ्य दृष्टिकोण’ विषय पर विशेष सत्र हुआ। इसमें आयुष मंत्रालय से सचिव आयुष वैद्य राजेश कोटेचा ने भविष्य के आयुर्वेद पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार आयुष के क्षेत्र में डिजिटल ढांचे को विकसित करने पर काम कर रही है। इसमें सभी हितधारकों को शामिल किया गया है। उन्होंने कहा, आयुर्वेद के अनुसार हर व्यक्ति की प्रकृति अलग होती है। एआई और मशीन लर्निंग व्यक्ति की स्वास्थ्य प्रोफाइल का विश्लेषण कर उसके लिए अनुकूल उपचार और आहार बताते हैं।
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आईआईटी जोधपुर और आयुष मंत्रालय एआई पर मिलकर काम कर रहे हैं। आईआईटी जोधपुर के बाला पेसाला ने कहा कि एआई बीमारी से निदान और उससे जुड़े सभी पहलुओं को गहराई से पकड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। पेसाला ने आयुए एआई की ओर से विकसित नए एप के बारे में जानकारी दी। सत्र में डॉ. प्रीति छाबड़ा, डॉ. राकेश नारायण भी मौजूद रहे।

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डिजिटल तकनीकी से बाजार भी बढ़ेगा

हर्बल उत्पादों की डिजिटल मार्केटिंग और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से आयुष उत्पादों को वैश्विक बाजार पर लाया जा सकेगा। ई-संजीवनी जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म से आयुष विशेषज्ञ दूरस्थ क्षेत्रों तक इलाज कर सकेंगे। फिटनेस ट्रैकर्स जैसे एप को आयुर्वेदिक सिद्धांतों से जोड़ने के बाद व्यक्ति की दिनचर्या, आहार, योगासन के बारे में मार्गदर्शन किया जा सकता है।


वाई-ब्रेक से खत्म होगा काम में तनाव

कोटेचा ने वाई-ब्रेक पहल पर भी चर्चा की, जो कर्मचारियों को काम से थोड़े समय के ब्रेक के दौरान कुछ योग मुद्राओं, सांस लेने की तकनीकों और ध्यान के साथ तनाव कम करने में मदद करने के लिए डिजाइन की गई है। उन्होंने कहा कि इस पहल ने पहले ही दस लाख से अधिक कर्मचारियों को आकर्षित किया है।

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