देवभूमि के इन जिलों से हुआ एड्स का सफाया
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उत्तराखंड के इन जिलों ने पिछले साल की अपेक्षा इस साल एड्स पर काफी हद तक काबू पा लिया है।
हालांकि दो जिले ऐसे हैं जहां एड्स मरीजों की संख्या बढ़ी है। एड्स की रोकथाम के लिए काउंसलिंग से लेकर, प्रचार-प्रसार, जांच और ब्लड सेफ्टी समेत अन्य पर आठ से दस करोड़ रुपए प्रतिवर्ष राज्य में खर्च किया जा रहा है।
वर्ष 2002 में कुमाऊं मंडल के छह जिलों में एड्स के सिर्फ आठ मरीज नैनीताल में थे। मगर आबादी बढ़ने और बाहर से लोगों के आने के साथ ही एड्स का दानव पांव पसारता गया और सभी जिले इसकी चपेट में आ गए।
राहत भरी बात यह है कि पिछले वर्ष की तुलना में नैनीताल, ऊधमसिंह नगर, बागेश्वर, चंपावत जिले ने एड्स पर काबू पाया है।
जागरूकता के सामने हार गया एड्स
अधिकारी इन रोगियों की संख्या में कमी आने का बड़ा कारण जागरूकता बता रहे हैं। दूसरी तरफ रोकथाम के तमाम उपायों के बावजूद पिथौरागढ़ जिले में एड्स रोगियों की संख्या बढ़कर 38 और अल्मोड़ा जिले में 16 हो गई है।
दवाएं निशुल्क, जांच भी निशुल्क
जिला - वर्ष 2014 - वर्ष 2015 (जनवरी से अक्टूबर तक)
पिथौरागढ़ - 33 - 38
अल्मोड़ा - 12 - 16
बागेश्वर - 12 - 06
चंपावत - 12 - 06
नैनीताल - 171 - 99
ऊधमसिंह नगर - 81 - 68
एड्स की रोकथाम के लिए हरसंभव प्रयास किया जा रहा है। गर्भवती महिला या बच्चे के संक्रमित होने पर एनएचएम के तहत घर से अस्पताल तक निशुल्क लाने और छोड़ने की व्यवस्था है। दवाएं निशुल्क देने के साथ ही जांच भी निशुल्क होती है।
- गगनदीप लूथरा, सहायक निदेशक मानीटरिंग, उत्तराखंड राज्य एड्स नियंत्रण समिति'