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इन महिलाओं को नहीं पता क्या होता है वुमेंस डे

Sat, 08 Mar 2014 01:11 PM IST
अमर उजाला, रुद्रपुर
अमर उजाला, रुद्रपुर Updated Sat, 08 Mar 2014 01:11 PM IST
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women don't know about international day

यूं तो देश भर में शनिवार को महिला दिवस पर महिला उत्थान और सशक्तिकरण को लेकर चर्चा आम रहेगी, मगर रुद्रपुर के रविंद्रनगर की करीब छह सौ महिलाएं यह दिवस जानती तक नहीं।

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वह रोजाना की तरह इस दिवस को भी दूसरे के घरों में जाकर बर्तन और कपड़े धोने में ही बिताएंगी। रविंद्रनगर की आबादी करीब तीन हजार और महिलाओं की संख्या लगभग 1200 है।
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इसमें करीब छह सौ महिलाएं सुबह तड़के उठकर दूसरों के घरों में जाकर चूल्हा-चौका और बर्तनों की साफ सफाई करती हैं। साथ ही साथ अपने घर में बच्चों की देखरेख, खाना और साफ सफाई का दारोमदार भी इनके ही कंधों पर है।

ये कामकाजी महिलाएं सुबह छह बजे उठने के बाद बच्चों को तैयार व नाश्ता बनाने के बाद सात बजे दूसरों के घरों में बर्तन और कपड़े धोने निकल जाती हैं।

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दोपहर एक बजे से चार बजे तक घर के काम निपटाए और इसके बाद फिर से दूसरों के घरों की जिम्मेदारी उठाने जाना पड़ता है। औसतन हरेक महिलाएं एक दिन में तीन से चार घरों में साफ सफाई, बर्तन व कपड़े धोने का काम करती है।

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रात आठ बजे बाद ही फिर से अपने घर में कदम रख पाती हैं। इस तरह ये अपना परिवार चलाने लायक रकम जुटा पाती हैं। साल में मुश्किल से ही एक दो दिन की छुट्टी मिल पाती है।

इन सब के बीच इन्हें न तो सरकारी योजनाओं की जानकारी हो पाती है और न ही वे इन सब के लिए समय निकाल पाती हैं।

पति रिक्शा चलाता है, उसकी आमदनी घर का खर्च चलाना मुश्किल हो जाता है। इस कारण दूसरे घरों में बर्तन व कपड़े धोने में ही सारा दिन बीत जाता है। हमें नहीं पता कब और क्या होता है महिला दिवस।
- मीना विश्वास

घर का खर्च चलाने के लिए दूसरों के घरों में जाकर काम करना पड़ता है। मालिक की डांट डपट सुनने के बाद भी कम काम से निकाल दिया जाए, इसका हमेशा डर बना रहता है।
- कांती वर्मा

सरकार पता नहीं क्या कहती है और क्या प्रचार करती है। मगर सच्चाई यह है कि हमे आज तक कोई भी सरकारी योजना का न तो लाभ मिला न ही कोई इस तरह की जानकारी देने आया। पहली बार सुन रहे हैं कि महिलाओं का भी कोई दिन होता है।
- रामवती

पति बीमार है। खुद मेरे पैर में भी पोलियो है। अब बच्चे पालने व जीवन गुजारना है तो काम करना मजबूरी है। वोट लेने सब आते हैं मगर फिर पलट कर कोई नहीं पूछता कि हमें क्या परेशानी है।
- तुलसी मंडल

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