बच्चे के जन्म के बाद अस्पताल में महिला की मौत
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दून महिला अस्पताल में इलाज के दौरान महिला की मौत होने पर परिजनों ने जमकर हंगामा किया। परिजनों का आरोप था कि डॉक्टरों और अस्पताल स्टाफ की लापरवाही के कारण महिला की मौत हो गई। महिला ने आठ घंटे पहले ही अस्पताल में एक शिशु को जन्म दिया था। परिजन देर रात तक शव को अस्पताल में रखकर कार्रवाई की मांग कर रहे थे।
हरिद्वार जिले के नसीकुरखुर्द, चांचक (लक्सर) निवासी गर्भवती किरन (25) पत्नी मनजीत सिंह को परिजन हरिद्वार जिला अस्पताल से रेफर कर बुधवार शाम दून महिला अस्पताल लाए थे। डॉक्टरों की सलाह पर परिजनों ने किरन को भर्ती कर लिया। शुक्रवार सुबह लगभग 12 बजे ऑपरेशन के बाद महिला ने बेटे को जन्म दिया।
शाम चार बजे महिला को जनरल वार्ड में भर्ती कर दिया गया। करीब सात बजे महिला की तबियत बिगड़ने लगी। परिजनों का आरोप है कि कई बार बुलाने पर भी डॉक्टर और नर्स अथवा अन्य कोई स्टाफ महिला को देखने नहीं आया। महिला के दर्द से चिल्लाने पर नर्स ने इंजेक्शन दे दिया।
अस्पताल ने डॉ. नौटियाल के नेतृत्व में जांच बैठाई
इंजेक्शन देने के थोड़ी देर बाद महिला तड़पने लगी। शाम करीब आठ बजे महिला की मौत हो गई। डॉक्टरों की लापरवाही और हंगामे की सूचना पर अस्पताल की कार्यवाहक सीएमएस डॉ. मीनाक्षी जोशी और पुलिस भी अस्पताल पहुंची। देर रात तक हंगामा चल रहा था।
डॉ. जोशी के मुताबिक, महिला का ब्लड प्रेशर बढ़ा था और वह एनिमिक भी थी। शुक्रवार को ब्लड प्रेशर मेनटेन कर ऑपरेशन किया गया। ऑपेरशन के बाद महिला के शरीर में कुछ काम्पलीकेशंस आने लगे।
डॉक्टरों ने महिला को बचाने की कोशिश की। महिला को हायर सेंटर रेफर करने की तैयारी थी, लेकिन तब तक महिला की मौत हो गई। डॉ. जोशी ने बताया कि लापरवाही और स्टाफ के दुर्व्यवहार पर अपर निदेशक स्तर की अधिकारी डॉ. अंजलि नौटियाल के नेतृत्व में जांच बैठा दी गई है।
घबराए मरीज, कई गए दूसरे अस्पताल
दून महिला अस्पताल में महिला की मौत के बाद वहां भर्ती कुछ महिलाओं को परिजन दूसरे अस्पतालों में लेकर चले गए। उनका साफ कहना था कि कई बार बुलाने पर भी डॉक्टर उनकी बात नहीं सुनते हैं। ऐसे अस्पताल में कैसे इलाज कराया जा सकता है?
यह भी आरोप लगाया कि अस्पताल के दूसरे स्टाफ का भी व्यवहार मरीजों और तीमारदारों के साथ ठीक नहीं रहता है। इसलिए वह दूसरे अस्पतालों में जा रहे हैं।
किशननगर निवासी राफिया के परिजनों ने बताया कि वह पांच दिन से भर्ती है। प्रसव की जो तिथि डॉक्टर ने दी थी, उससे ज्यादा दिन हो गए हैं। महिला को दर्द की शिकायत बढ़ रही है, लेकिन न तो डॉक्टर कुछ बताने को तैयार हैं और न नर्स का व्यवहार ठीक रहता है। इसलिए हम दूसरे अस्पताल शिफ्ट कर रहे हैं।
बिजनौर निवासी सविता पत्नी घनश्याम आठ दिन से अस्पताल में भर्ती हैं। घनश्याम ने बताया कि डॉक्टर कुछ भी नहीं बताते। दर्द बढ़ने पर डॉक्टरों या स्टाफ को बुलाओ तो देखने भी नहीं आते हैं। कहा कि हम तो गरीब हैं, दूसरे अस्पताल जाएं भी तो कैसे? इस संबंध में दून महिला अस्पताल की कार्यवाहक सीएमएस डॉ. मीनाक्षी जोशी ने बताया कि मरीजों के दूसरे अस्पताल जाने का मामला उनके संज्ञान में नहीं है।
पहले भी अस्पताल पर लगे लापरवाही के आरोप
दून महिला अस्पताल में इलाज के दौरान लापरवाही से हो रही मौत से अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ की कार्यप्रणाली पर लगातार सवालिया निशान लग रहे हैं। लापरवाही के बावजूद दोषियों पर कार्रवाई न होना भी कई सवाल खड़े कर रहा है।
जानिए कब-कब हुआ ऐसा
12 फरवरी 2015 : अधोईवाला निवासी आयशा बानो और उनके गर्भस्थ शिशु की मौत। आरोप तबियत बिगड़ने पर कई बार बुलाने पर भी नहीं पहुंचे डॉक्टर।
सात फरवरी 2015 : एक महिला के गर्भस्थ शिशु की मौत। इलाज में लापरवाही का आरोप
अक्तूबर 2014 : महिला अस्पताल में दो दिन के भीतर चार शिशुओं की मौत हुई। डॉक्टरों और अस्पताल कर्मियों पर लापरवाही के आरोप साबित हुए। फिर भी आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।