फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   winds from these countries are polluting India

वैज्ञानिकों ने किया चौंकाने वाला खुलासा, इन देशों से आई हवाएं कर रहीं भारत को प्रदूषित

Wed, 04 Sep 2019 09:36 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Wed, 04 Sep 2019 09:36 AM IST
सार

  • नैनीताल स्थित आर्य भट्ट शोध एवं प्रेक्षण विज्ञान संस्थान (एरीज) के वैज्ञानिकों ने किया महत्वपूर्ण खुलासा
  • देश में वायु प्रदूषण का कारण केवल अपने देश की प्रदूषित हवा नहीं है बल्कि दक्षिण यूरोप और अफ्रीका तक से यहां पहुंचने वाली विषैली हवाएं भी इसका कारण हैं
  • ओजोन परत संरक्षण के लिए यह बहुत अहम जानकारी है

विज्ञापन
winds from these countries are polluting India
- फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

नैनीताल स्थित आर्य भट्ट शोध एवं प्रेक्षण विज्ञान संस्थान (एरीज) के वैज्ञानिकों ने अत्यंत महत्वपूर्ण शोध में सफलता प्राप्त की है जिसमें उन्होंने विश्व में पहली बार इस रहस्य से पर्दा उठाया है। 

विज्ञापन


आर्य भट्ट शोध एवं प्रेक्षण विज्ञान संस्थान (एरीज) के वैज्ञानिकों ने गहन शोध के बाद खुलासा किया है कि देश में वायु प्रदूषण का कारण केवल अपने देश की प्रदूषित हवा नहीं है बल्कि दक्षिण यूरोप और अफ्रीका तक से यहां पहुंचने वाली विषैली हवाएं भी इसका कारण हैं।
विज्ञापन


यह शोध एरीज में हाल ही में कार्य शुरू करने वाले विश्व के पहले 206.5 मेगा हर्ट्ज फ्रीक्वेंसी वाले स्ट्रेटोस्फियर-ट्रोपोस्फीयर (एसटी) रडार के माध्यम से किए गए विश्लेषण से संभव हो सका है।

विज्ञापन
विज्ञापन

नवनिर्मित प्रयोगशाला में स्थापित किया गया है यह राडार

एरीज में दस करोड़ रुपये के उपकरणों और छह करोड़ की राशि से नवनिर्मित प्रयोगशाला में यह रडार स्थापित किया गया है। रडार क्षैतिज और लंबवत दोनों दिशाओं में 18 किमी दूरी तक वायुमंडल का अध्ययन करने में सक्षम है।

इसके जरिये किए गए विश्लेषण में यह भी जानकारी मिली कि पश्चिमी विक्षोभ के साथ ही ओजोन की परत में भी अंतर देखने को मिलता है और यह कुछ नीचे को खिसक जाती है। ओजोन परत संरक्षण के लिए यह बहुत अहम जानकारी है।

प्रदूषित हवा यूरोप और अफ्रीका से आईं थीं

एसटी रडार से डाटा संग्रहण और विश्लेषण कर रहे वैज्ञानिक डॉ. मनीष नाजा ने बताया कि इस रडार से पहली बार हवा के दबाव में बदलाव के साथ ही उस हवा के स्रोत का भी अध्ययन संभव हो पाया और पता लगा कि प्रदूषित हवा यूरोप और अफ्रीका से आईं थीं। अध्ययन के दौरान वैज्ञानिकों ने सेंसर लगे गुब्बारे भी छोड़े जिन्होंने 18 किमी की ऊंचाई तक जाकर सफलतापूर्वक आंकड़े भेजे।

डॉ. मनीष ने बताया कि वायुमंडल के अध्ययन के लिए विश्व में 50 और 400 मेगा हर्ट्ज के रडार प्रचलित हैं। 50 मेगा हर्ट्ज के रडार से 30-40 किमी जबकि 50 मेगा हर्ट्ज से आठ किमी तक के वायुमंडल का अध्ययन किया जाता है। 18-20 किमी रेंज के स्पष्ट आंकड़े इन दोनों से ही नहीं मिल पाते। यहां स्थापित 206.5 मेगा हर्ट्ज रडार से इस रेंज के बेहतरीन आंकड़े मिले हैं जिनसे ये नई खोज संभव हो सकी। इस टीम में एरीज के निदेशक डॉ. वहाबुद्दीन, इंजीनयर समरेश भट्टाचार्जी और डॉ. मनीष शामिल हैं।

पूर्णतया स्वदेशी है आधुनिकतम एसटी रडार

एरीज में स्थापित एसटी रडार पूरी तरह स्वदेशी है। इसका निर्माण हैदराबाद की कंपनी ईसीआइएल ने किया है। 206.5 मेगा हर्ट्ज फ्रीक्वेंसी का रडार अब तक देश और विश्व में न होने के कारण इसके लिए इसरो से विशेष स्वीकृति मांगी गई थी।

इसरो की स्वीकृति के बाद ही इसकी स्थापना हो पाई। डॉ. मनीष नाजा ने बताया कि यह प्रोजेक्ट 2008 में शुरू हुआ था और विशाल प्रयोगशाला के निर्माण और उपकरणों की स्थापना विभिन्न चरणों में की गई। यह प्रोजेक्ट अब पूरा हुआ है और रडार क्रियाशील हुआ है। उन्होंने बताया कि तिरुपति और कोचीन में पूर्व से ही रडार कार्यरत हैं, जबकि 206.5 मेगा हर्ट्ज पर कार्य करने वाला यह विश्व का पहला रडार है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed