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वन्य जीव तस्कर को तीन साल की सजा
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देहरादून। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विवेक श्रीवास्तव की कोर्ट ने वन्य जीव तस्कर को तीन साल साधारण कैद की सजा सुनाई है। तस्कर लगभग ढाई साल पहले संरक्षित प्रजाति के कछुए के साथ पकड़ा गया था। दोषी पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
जानकारी के मुताबिक 22 मई 2018 को वन रक्षक नीरज कुमार कालूवाला क्षेत्र में गश्त कर रहे थे। इस दौरान एक संदिग्ध व्यक्ति को देखकर रुकने को कहा गया, लेकिन व्यक्ति भागने लगा। कुछ देर बाद व्यक्ति पकड़ा गया और तलाशी लेने पर उसके पास से संरक्षित प्रजाति का एक कछुआ बरामद हुआ। पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम केशु निवासी सपेरा बस्ती भानियावाला बताया। उसके खिलाफ वन्य जीव संरक्षण अधिनियम व अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया।
सीजेएम कोर्ट में मुकदमे का ट्रायल चला तो वन विभाग की ओर से कुल तीन गवाह प्रस्तुत किए गए। इनके आधार पर आरोपी को दोषी करार दिया गया। इस मामले में उसे वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत तीन साल साधारण कारावास और 10 हजार रुपये की सजा सुनाई गई। इसके साथ ही भारतीय वन अधिनियम 1927 के तहत छह माह के साधारण कैद की सजा हुई। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
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जानकारी के मुताबिक 22 मई 2018 को वन रक्षक नीरज कुमार कालूवाला क्षेत्र में गश्त कर रहे थे। इस दौरान एक संदिग्ध व्यक्ति को देखकर रुकने को कहा गया, लेकिन व्यक्ति भागने लगा। कुछ देर बाद व्यक्ति पकड़ा गया और तलाशी लेने पर उसके पास से संरक्षित प्रजाति का एक कछुआ बरामद हुआ। पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम केशु निवासी सपेरा बस्ती भानियावाला बताया। उसके खिलाफ वन्य जीव संरक्षण अधिनियम व अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया।
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सीजेएम कोर्ट में मुकदमे का ट्रायल चला तो वन विभाग की ओर से कुल तीन गवाह प्रस्तुत किए गए। इनके आधार पर आरोपी को दोषी करार दिया गया। इस मामले में उसे वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत तीन साल साधारण कारावास और 10 हजार रुपये की सजा सुनाई गई। इसके साथ ही भारतीय वन अधिनियम 1927 के तहत छह माह के साधारण कैद की सजा हुई। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
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