फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Wildlife census camera traps installed to monitor movement stolen forest department not informed Uttarakhand

Uttarakhand: वन्यजीवों की गणना, मूवमेंट पर नजर रखने के लिए लगाए गए कैमरा ट्रैप चोरी, वन विभाग को नहीं खबर

Mon, 27 Mar 2023 11:28 AM IST
रेनू सकलानी विनोद मुसान, अमर उजाला, देहरादून
विनोद मुसान, अमर उजाला, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Mon, 27 Mar 2023 11:28 AM IST
सार

वन्यजीवों की सुरक्षा और गणना के लिए समय-समय पर विभिन्न चिह्नित स्थानों पर गुप्त रूप से कैमरा ट्रैप लगाए जाते हैं, जिससे इनके आसपास होने वाली किसी भी हलचल को कैद किया जा सके। कई बार जब शिकारी या कुछ अवांछित तत्व इन कैमरों के सामने से गुजरते हैं तो इनकी फोटो क्लिक (ट्रिप-ट्रिप) की आवाज उन्हें सचेत कर देती है। ऐसे में शिकारी को लगता है कि उसकी तस्वीर भी कैमरा ट्रैप में कैद हो गई है।

विज्ञापन
Wildlife census camera traps installed to monitor movement stolen forest department not informed Uttarakhand
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : संवाद

विस्तार

प्रदेश के विभिन्न वन प्रभागों में वन्यजीवों की गणना, मूवमेंट पर नजर रखने और सुरक्षा के लिहाज से लगाए गए कैमरा ट्रैप चोरी होने की सूचना से वन विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। वन विभाग कैमरों के चोरी होने और उन्हें नुकसान पहुंचाए जाने की बात तो स्वीकार कर रहा है, लेकिन कितने कैमरे चोरी हुए हैं, इसका आंकड़ा विभाग के पास भी नहीं है।

विज्ञापन

वन्य जीवों के संरक्षण के लिए उत्तराखंड में छह राष्ट्रीय उद्यान, सात वन्य जीव विहार, चार संरक्षण वन क्षेत्र और एक उच्च स्थलीय प्राणी उद्यान व एक जैव सुरक्षित क्षेत्र है। यहां हाथी, बाघ, भालू, हिम तेंदुए, भूरा भालू, कस्तूरी मृग, भरल, थार, काला भालू, हिमालयन भालू, मस्क डियर, मोनाल, कस्तूरी मृग जैसे जीवों की सुरक्षा और गणना के लिए समय-समय पर विभिन्न चिह्नित स्थानों पर गुप्त रूप से कैमरा ट्रैप लगाए जाते हैं, जिससे इनके आसपास होने वाली किसी भी हलचल को कैद किया जा सके।

विज्ञापन

मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक ने स्वीकारी बात
कई बार जब शिकारी या कुछ अवांछित तत्व इन कैमरों के सामने से गुजरते हैं तो इनकी फोटो क्लिक (ट्रिप-ट्रिप) की आवाज उन्हें सचेत कर देती है। ऐसे में शिकारी को लगता है कि उसकी तस्वीर भी कैमरा ट्रैप में कैद हो गई है। खुद को बचाने के लिए शिकारी कैमरा अपने साथ ले जाता है या उसे तोड़ देता है।

विज्ञापन
विज्ञापन


मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक डॉ. समीर सिन्हा ने इस बात को स्वीकार किया है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ माह में विभिन्न प्रभागों से कैमरा ट्रैप चोरी होने या उन्हें नुकसान पहुंचाए जाने की सूचना मिली है, लेकिन कितने कैमरा ट्रैप चोरी हुए इसकी अभी जानकारी जुटाई जा रही है।

कई बार हाथी और दूसरे जानवर भी तोड़ देते हैं कैमरा ट्रैप

करीब 820.42 वर्ग किमी. क्षेत्रफल में फैला राजाजी टाइगर रिजर्व में विशेषकर हाथियों और बाघ की सुरक्षा के साथ उनके मूवमेंट पर नजर रखने के लिए 400 से अधिक लोकेशन पर कैमरा ट्रैप लगाए हैं। पार्क के निदेशक डॉ. साकेत बडोला ने बताया कि उनके यहां करीब पांच से छह मामले कैमरा चोरी होने के दर्ज किए गए हैं। उन्होंने बताया कि कई बार हाथी और दूसरे जानवरों की ओर से भी कैमरा ट्रैप को नुकसान पहुंचाया जाता है। यह कैमरे लोगों के किसी काम के नहीं होते हैं। कई बार लोग कैमरा उखाड़कर ले जाते हैं, लेकिन फिर वहीं जंगल में फेंक जाते हैं।

ये भी पढ़ें...Uttarakhand News: अगर आपके घर की छत है छोटी तो छोटे पैमाने पर कर सकते हैं बिजली पैदा, बिल में भी पाएंगे छूट

प्रदेश में कहां कितने कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं, सुरक्षा की दृष्टि से यह बताना उचित नहीं है। प्रदेश में कई वन प्रभागों ने समय-समय पर कैमरा चोरी की घटनाएं सामने आती रहती हैं। इन मामलों में संबंधित वन प्रभागों की ओर से कार्रवाई की जाती है। कुछ मामलों में एफआईआर भी दर्ज की गई है। कुछ लोगों को जेल भी भेजा गया है। - डॉ. समीर सिन्हा, मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक, वन विभाग

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed