जहां पति ने दी थी जान, पत्नी ने वहीं त्यागे प्राण
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मसूरी में पति की मौत के तीन दिन बाद ही गहरे सदमे में आई पत्नी ने आत्महत्या कर ली। युवा व्यापारी की पत्नी ने भी उसी जगह से कूदकर जान दी, जहां से उसके पति ने जान दी थी। गुरुवार को मसूरी में इस हृदय विदारक घटना से हर कोई स्तब्ध है।
बीते सोमवार मसूरी के युवा व्यापारी सुमित अग्रवाल ने लाइब्रेरी स्थित श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर की पांचवीं मंजिल से कूदकर जान दे दी थी। पति की मौत के बाद उसकी पत्नी चारु (35) गहरे सदमे में थी। गुरुवार सुबह वह करीब चार बजे घर से बाहर निकली तो घर के लोगों, रिश्तेदारों और होटल के कर्मचारियों ने चारु को रोका।
इस पर चारु यह कहकर तेजी से निकल गई कि वह सुमित के जैसे बुजदिल नहीं है कि आत्महत्या जैसा कदम उठाए। चारु ने परिजनों से ये भी कहा कि सुमित तो बेटे हर्ष को छोड़कर चला गया, लेकिन वह ऐसा नहीं करेगी। कहा कि वह बेटे का लालन-पालन करेगी।
इसके बाद चारु सीधे श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर की उसी छत पर गई जहां से उसके पति ने कूदकर जान दी थी। इसके बाद चारु भी यहां से नीचे कूद गई। कुछ देर में परिजन और घर के नौकर, होटल कर्मी चारु को ढूंढते हुए निकले, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
बताया गया कि जिस वक्त चारु ने छत से छलांग लगाई तब बारिश हो रही थी। चारु ने मंदिर की छत से नीचे स्कूल की छत पर छलांग लगाई थी। वहां चारु का लहूलुहान शरीर पड़ा था। कुछ देर में मौके पर काफी संख्या में होटल मालिक, व्यापारी और अन्य लोग जमा हो गए। बाद में पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया। उसके बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
पहले उठा बाप का साया अब ममता की छाया
तीन दिन पहले पिता और अब मां की मौत के बाद उनका 10 साल का बेटा हर्ष अकेला हो गया है। हालांकि, मासूम की दादी भी है, लेकिन जवान बेटे और बहू की मौत के बाद वह टूट गई है। सुमित की बूढ़ी मां और उसका मासूम बेटा अब किसके सहारे जिंदगी गुजारेंगे... यह सवाल गुरुवार को हर शख्स की जुबां पर था।
बताया गया कि सुमित का बेटा हर्ष नगर के एक प्रतिष्ठित स्कूल में कक्षा 4 में पढ़ता है। बृहस्पतिवार को जब उसकी मां ने सुसाइड किया तो परिजनों ने मासूम को यही बताया कि वह पूजा करने मंदिर जा रही है।
काफी देर तक जब मां घर नहीं आई तो मासूम की आंखें उसे ढूंढ रही थीं। मासूम को यह बताने की हिम्मत किसी में नहीं थी कि उसके पिता के बाद अब उसकी मां ने भी उसका साथ हमेशा के लिए छोड़ दिया है। अब उसके सिर पर न बाप का साया है न ममता की छाया।
मासूम बोल, यह एक और मुसीबत हो गई
गुरुवार सुबह जब मासूम की मां काफी देर तक घर नहीं आई तो हर्ष कहने लगा कि यह एक और मुसीबत हो गई। दरअसल, पिता की मौत के बाद से मासूम स्कूल नहीं गया था। बीती रात उसकी मां ने उसकी स्कूल ड्रेस प्रेस कर दी थी।
उसे आज स्कूल जाना था। जब मां घर नहीं आई तो स्कूल न जा पाने के चलते मासूम की जुबां पर यह बात अपने आप आ गई। उसे क्या पता था कि उसकी मां अब कभी घर नहीं आएगी।
रेलिंग ऊंची होती तो शायद बच जाती चारु की जान
तीन दिन के अंदर पति-पत्नी की आत्महत्या और करीब दो साल पहले लाइब्रेरी के ही एक व्यापारी की पत्नी ने भी मंदिर की छत से छलांग लगाकर मौत को गले लगाया था। इसे लेकर लोगों में तरह-तरह की चर्चाएं होती रहीं।
बताया गया कि मंदिर समिति द्वारा छत पर ऊंची रेलिंग लगाने का काम शुरू होने ही वाला था, लेकिन उससे पहले ही चारु ने आत्महत्या कर ली। मंदिर की छत से सुसाइड की एक और घटना से मंदिर के ट्रस्टी भी दुखी हैं।