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26 साल बाद पति लौटा तो पत्नी ने किया 'पुनर्विवाह'

Fri, 10 Oct 2014 10:15 PM IST
अमर उजाला, हल्द्वानी
अमर उजाला, हल्द्वानी Updated Fri, 10 Oct 2014 10:15 PM IST
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wife got her husband back after 26 year.

हल्द्वानी के रामगढ़ ब्लॉक के सदबूंगा, सूपी की नंदी विधवा से फिर सुहागन हो गईं। उनके पति गुलाब सिंह 26 साल बाद घर लौट आए हैं। गुलाब सिंह के गायब होने के बाद नंदी ने विधवा बनकर बच्चों को पढ़ा-लिखाकर पैरों पर खड़ा किया।

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नंदी दो दशक तक पति के लौटने का इंतजार करते रही। इसके बाद नंदी ने माथे का सिंदूर उजड़ा समझ दिल में पत्थर रखकर कुछ साल पहले ही हरिद्वार में पति का कर्मकांड करवाया, ताकि पति की आत्मा को शांति मिल सके, लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था।
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गुलाब सिंह की अचानक घर वापसी से नंदी और उसके बच्चे कुदरत के इस खेल पर विश्वास ही नहीं कर पा रहे हैं। गुरुवार को हिंदू रीति रिवाज से गुलाब सिंह का नामकरण एवं जनेऊ संस्कार के बाद विवाह भी कराया गया और करवाचौथ से ठीक दो दिन पहले नंदी की सूनी मांग में फिर से सिंदूर भर गया है।
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गुलाब सिंह सूपी में परचून की दुकान चलाते थे। 19 अक्तूबर 1988 में गांव के दीवान सिंह के साथ हल्द्वानी सामान खरीदने आए थे और लापता हो गए। तब उनकी उम्र 39 साल थी। गुलाब सिंह के तीन बेटे और दो बेटियां हैं। परिजनों ने उन्हें काफी ढूंढ़ा।

दीवान सिंह ने तब बताया कि उन लोगों ने जामा मसजिद के पास एक दुकान में चाय पी थी। इसके बाद गुलाब सिंह लापता हो गए। गुलाब सिंह के भाई खीम सिंह ने 20 अक्तूबर 1988 को हल्द्वानी कोतवाली में गुमशुदगी भी दर्ज कराई। पुलिस ने भी काफी खोजबीन की, लेकिन उनका कुछ पता नहीं चला।

विधवा बनकर नंदी ने काटी जिंदगी

wife got her husband back after 26 year.

जिस वक्त गुलाब सिंह लापता हुए वह बड़ी बेटी चना की शादी कर चुके थे। बाकी एक बेटी और तीन बेटों का बोझ नंदी के कंधों पर आ गया। नंदी ने खेत खलिहानों के साथ बच्चों को पालने के लिए पति की दुकान संभाल ली। दुकान से निकलने वाले खर्च से बच्चों को पढ़ाया। एक-एक कर उनकी शादी करवाकर अपनी जिम्मेदारियां निभाईं।

नंदी को पति के लौटने का इंतजार था, लेकिन सामाजिक रीति रिवाजों को मानते हुए वह विधवा की जिंदगी जीने लगी। दो दशक तक गुलाब सिंह के घर नहीं आने पर पांच साल पहले ही हरिद्वार में कर्मकांड कराया।

पांच अक्तूबर का दिन नंदी और उसके परिवार के लिए खुशियां लेकर आया। मुजफ्फरनगर से सूपी, हरिनगर निवासी सुनील ने फोन कर गुलाब सिंह की जानकारी दी। सुनील मुजफ्फरनगर में कोल डिपो में सुपरवाइजर है, जबकि गुलाब सिंह भी इसी कोल डिपो में गार्ड की नौकरी करता था। गुलाब सिंह के जिंदा होने की खबर पूरे गांव में फैल गई। अचानक इतनी बड़ी खुशी मिलने से नंदी विश्वास नहीं कर पाई। उसने तभी सुनील को फोन कर मुजफ्फरनगर में गुलाब सिंह से बात की।

छह अक्तूबर को नंदी के तीनों बेटे सोबन सिंह, मदन और किसन सिंह अपने रिश्तेदारों के साथ मुजफ्फरनगर गए। कोल डिपो में पिता गुलाब सिंह को देख उनकी आंखें भर आईं। बेटों की आंखों में पिता की तस्वीर भी धुंधली हो चुकी थी। वे 26 साल बाद पिता को देख रहे थे। अब गुलाब सिंह की उम्र 65 साल हो चुकी है। सात अक्तूबर को गुलाब सिंह बेटों के साथ हल्द्वानी ब्लॉक में रह रहे अपने भतीजे चंद्र सिंह गौड़ के घर पहुंचे।

पति को देखकर बहने लगी आंसुओं की धार

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हल्द्वानी में नंदी और उनके कई रिश्तेदार गुलाब सिंह की झलक पाने को बेताब थे। गुलाब सिंह को अपनी आंखों के सामने खड़ा देख खुशियों से नंदी की आंखों में आंसू निकल आए। गुरुवार को हिंदू रीति रिवाज से चंद्र सिंह के घर पर गुलाब सिंह का नामकरण और जनेऊ संस्कार हुआ। इसके बाद पंडित हेम चंद्र बहुगुणा ने गुलाब सिंह की स्वर्ण प्रतिमा के साथ शादी कराई।

सभी संस्कार पूरे होने के बाद अब शुक्रवार को गुलाब सिंह पत्नी और बेटों के साथ सूपी में अपने घर की दहलीज पर कदम रखेंगे। गुलाब सिंह की घर वापसी की खबर से गांव में दिवाली मनाई जा रही है और ग्रामीण उनका बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

एक ही जन्म में मिल गए तीन नाम
गुलाब सिंह के लापता होने से लेकर घर वापसी की कहानी किसी फिल्म की पटकथा से कम नहीं है। गुलाब सिंह हल्द्वानी से लापता हुए थे। अचानक उनकी याददाश्त चली गई और उन्हें अपना नाम तक याद नहीं रहा। वह मुजफ्फरनगर में कोल डिपो में काम करने लगे। कोल डिपो में उनका नाम बहादुर पड़ गया। इसी नाम के साथ उन्होंने 26 साल बिताए। घर वापसी होने पर नामकरण संस्कार में अब उसका नाम नैन सिंह पड़ा है।

एक सपने ने लौटा दी पति की याद्दाश्त

wife got her husband back after 26 year.

गुलाब सिंह बताते हैं कि डेढ़ महीने पहले वह काफी बीमार पड़ गए। इसी बीच बड़े भाई खीम सिंह उनके सपनों में आए। खीम सिंह ने काफी फटकारा। भाई बोला कि तू यहां है। गांव में तेरी बीवी विधवा और बच्चे अनाथों की तरह दिन काट रहे हैं।

गुलाब सिंह के मुताबिक भाई को सपने में देखकर उसकी पूरी याददाश्त लौट आई और उसने डिपो के कर्मचारियों को अपनी कहानी बताई। सुपरवाइजर सुनील कहानी सुनकर भौचक्का रह गया। सुनील भी सूपी का रहने वाला है और उसी ने गुलाब सिंह के परिजनों को उनके जिंदा होने की खबर दी।

हल्द्वानी से पकड़कर गोरखपुर ले गए थे
गुलाब सिंह बताते हैं कि हल्द्वानी से चार लोग उन्हें पकड़कर गोरखपुर ले गए। जो लोग उन्हें पकड़कर ले गए थे उन्होंने गुलाब सिंह के सिर में काफी राख फेंकी थी। वह मौका पाकर गोरखपुर में उनके चंगुल से भाग गए। किसी तरह एक बस में बैठे, जो उन्हें देहरादून ले गई।

देहरादून में उनकी याददाश्त चली गई। इसके बाद उन्हें पिछली जिंदगी का कुछ याद नहीं रहा। भटकते हुए मुजफ्फरनगर पहुंचे और डिपो में गार्ड की नौकरी कर जिंदा रहे।

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