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Dehradun News: जब-जब बड़ा मौका आया, तब-तब हो गई हड़ताल
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राजधानी में स्वच्छ सर्वेक्षण चल रहा हैं। टीम घर-घर जाकर फीडबैक ले रही है, बावजूद दून के 76 वार्डों में डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने के लिए गाड़ी नहीं पहुंची। कंपनी के कर्मचारियों की यह पहली हड़ताल नहीं है। देहरादून को जब-जब अतिरिक्त सफाई की जरूरत पड़ी तब-तब कूड़ा उठाने वाली कंपनी के कर्मचारियों की हड़ताल हो गई। इसके बावजूद आज तक कंपनी के खिलाफ नगर निगम के अधिकारी कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर सके।
इकोन-वाटरग्रेस कंपनी के ड्राइवर हेल्पर तनख्वाह ना मिलने की वजह से परेशान हैं। कंपनी के कर्मचारी पूर्व में कई बार हड़ताल पर जा चुके हैं। करीब एक साल पहले देहरादून में नेशनल इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन किया गया था। पूरे देश से लोग देहरादून में आए हुए थे। राष्ट्रपति भी देहरादून में थीं। निगम को जरूरत थी शहर में अतिरिक्त सफाई व्यवस्था हो, लेकिन कंपनी के ड्राइवर हेल्पर हड़ताल पर चले गए। पिछले साल होली पर शहर भर में सफाई की जानी थी। हड़ताल की वजह से 47 वार्डों से कूड़ा नहीं उठा था। उसके बाद भी बीच में कई बार हड़ताल हुई। फिर दीपावली पर जहां लोग अपने घरों में सफाई कर रहे थे और सूखा कूड़ा सड़कों पर आ रहा था, उस वक्त भी वाटरग्रेस कंपनी के कर्मचारियों ने हड़ताल शुरू कर दी। इससे निगम के हाथ पांव फूल गए थे। देहरादून नए साल के जश्न में डूबा हुआ था, फिर शहर में कूड़ा नहीं उठा। अभी पिछले महीने जनवरी में राजधानी में राष्ट्रीय खेलों का मौका था। पूरे देश से खिलाड़ी शहर में आ रहे थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राजधानी में थे, लेकिन कंपनी के कर्मचारी 27 जनवरी से 29 जनवरी तक हड़ताल पर चले गए। तीन दिन तक हड़ताल चली। नगर निगम के अधिकारियों को शहर में कूड़ा उठान व्यवस्था को संभालने में पसीने आ गए। इसके बाद इसी महीने पांच, छह और आठ फरवरी को भी 47 वार्डों में हड़ताल रही।
Iमनमानी पर उतरी हुई है कंपनी, बेबस दिख रहे अधिकारी
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47 वार्डों में कूड़ा उठान में बरती जा रही लापरवाही पिछले दो साल से जारी है। शुरूआत में नगर निगम के अधिकारी नजरअंदाज करते रहे और धीरे-धीरे व्यवस्था बिगड़ती चली गई। आज स्थिति यह है कि नगर निगम की ओर से कूड़ा कूड़ा उठान का पैसा कंपनियों को दिया जा रहा है उसके बाद भी कूड़ा रोजाना नहीं उठ रहा है। कंपनी समय पर कर्मचारियों का भुगतान नहीं कर रही और आए दिन हड़ताल हो रही है। कंपनी की मनमानी के आगे अधिकारी बेबस दिख रहे हैं।
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इकोन-वाटरग्रेस कंपनी के ड्राइवर हेल्पर तनख्वाह ना मिलने की वजह से परेशान हैं। कंपनी के कर्मचारी पूर्व में कई बार हड़ताल पर जा चुके हैं। करीब एक साल पहले देहरादून में नेशनल इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन किया गया था। पूरे देश से लोग देहरादून में आए हुए थे। राष्ट्रपति भी देहरादून में थीं। निगम को जरूरत थी शहर में अतिरिक्त सफाई व्यवस्था हो, लेकिन कंपनी के ड्राइवर हेल्पर हड़ताल पर चले गए। पिछले साल होली पर शहर भर में सफाई की जानी थी। हड़ताल की वजह से 47 वार्डों से कूड़ा नहीं उठा था। उसके बाद भी बीच में कई बार हड़ताल हुई। फिर दीपावली पर जहां लोग अपने घरों में सफाई कर रहे थे और सूखा कूड़ा सड़कों पर आ रहा था, उस वक्त भी वाटरग्रेस कंपनी के कर्मचारियों ने हड़ताल शुरू कर दी। इससे निगम के हाथ पांव फूल गए थे। देहरादून नए साल के जश्न में डूबा हुआ था, फिर शहर में कूड़ा नहीं उठा। अभी पिछले महीने जनवरी में राजधानी में राष्ट्रीय खेलों का मौका था। पूरे देश से खिलाड़ी शहर में आ रहे थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राजधानी में थे, लेकिन कंपनी के कर्मचारी 27 जनवरी से 29 जनवरी तक हड़ताल पर चले गए। तीन दिन तक हड़ताल चली। नगर निगम के अधिकारियों को शहर में कूड़ा उठान व्यवस्था को संभालने में पसीने आ गए। इसके बाद इसी महीने पांच, छह और आठ फरवरी को भी 47 वार्डों में हड़ताल रही।
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Iमनमानी पर उतरी हुई है कंपनी, बेबस दिख रहे अधिकारी
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47 वार्डों में कूड़ा उठान में बरती जा रही लापरवाही पिछले दो साल से जारी है। शुरूआत में नगर निगम के अधिकारी नजरअंदाज करते रहे और धीरे-धीरे व्यवस्था बिगड़ती चली गई। आज स्थिति यह है कि नगर निगम की ओर से कूड़ा कूड़ा उठान का पैसा कंपनियों को दिया जा रहा है उसके बाद भी कूड़ा रोजाना नहीं उठ रहा है। कंपनी समय पर कर्मचारियों का भुगतान नहीं कर रही और आए दिन हड़ताल हो रही है। कंपनी की मनमानी के आगे अधिकारी बेबस दिख रहे हैं।
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