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चार विदेशी जोड़े, चार भाषा, हिंदू रीति-रिवाज से शादी
अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 19 Nov 2013 09:51 PM IST
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पिछले कुछ दशकों से विदेशियों को भारत की संस्कृति बहुत प्रभावित कर रही है। विशेष रूप से यहां का सुखी दाम्पत्य जीवन पश्चिम में चर्चा का विषय बना हुआ है। हरिद्वार, ऋषिकेश, पुष्कर, काशी और उज्जैन में अनेक विदेशी जोड़े ब्याह रचाने के लिए आते हैं। आज मंगलवार को रूस के सेंट पीर्ट्सबर्ग से आए तीन जोड़ों ने कनखल में ब्याह रचाया।
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मुस्लिम परिवार ने भी की शादी
सनातन पद्धति से दाम्पत्य सूत्र में बंधने वाला एक युगल धर्म से मुस्लिम है। पश्चिम में तलाक का डर हर समय बना रहता है। जबसे संसार खुलने लगा है तब से भारतीय परंपराएं, रीति-रिवाज और वैवाहिक संस्कार दुनिया भर पर प्रभाव डालने लगे हैं। पीर्ट्सबर्ग से तीन जोड़े कनखल में भारतीय प्राच्य विद्या सोसायटी के अध्यक्ष डॉ प्रतीक मिश्रपुरी के निवास पर पहुंचे। डॉ मिश्रपुरी के संयोजन में तीनों युगलों का विवाह हिन्दु-पद्धति से संपन्न हुआ।
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हिन्दू धर्म से परिचित हैं ततियाना
ततियाना शूबेएकोव सौभाग्यशाली है कि उनकी दादी का विवाह धीरेन्द्र ब्रह्मचारी ने तथा मां का विवाह प्रख्यात योगाचार्य बीकेएस आयंगर ने संपन्न कराया था। हिन्दू संस्कारों को करीब से देख चुकी ततियाना ने आज अपने मंगेतर ऑटोमोबाइल इंजीनियर सरनोव के साथ सात फेरे लिये। धर्म से मुस्लिम मैक्सीम पेशे से प्रोफेसर है और इकोनोमिक्स पढ़ाते हैं।
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उनकी मंगेतर येकटरीना आर्किटेक्ट है। दोनों का धर्म मुस्लिम है लेकिन उन्होंने आज हिन्दु पद्धति से विवाह किया। गणित की अध्यापिका आना कालीनीना का विवाह उनके मंगेतर व्यापारी अलेक्जेंडर से संपन्न हुआ। तीनों विवाह डॉ मिश्रपुरी के निवास पर वैदिक परंपराओं के साथ संपन्न हुए।
अब तक साठ जोड़ों के विवाह करा चुके मिश्रपुरी
डॉ मिश्रपुरी ने बताया कि वे अब तक साठ विदेशी युगलों को दाम्पत्य सूत्र में बांध चुके हैं। विदेशियों के मन में तलाक का डर रहता है। वे लगातार ऐसी पद्धतियों की तलाश में रहते हैं जिनसे गृहस्थ लंबा चल सके। भारतीय विवाह पद्धति का बंधन पश्चिमी को बहुत रास आ रहा है। मैक्समूलर ने वेद को गड़रियों का गीत कहकर उपहास उड़ाया था। वे आज जिंदा होते तो देखते कि उनके धर्म के लोग किस तरह भारतीय दर्शन के प्रति पागल हैं।
धर्म नहीं आता आड़े
मैक्सीम और येकटरीना मानते है कि उनका वैवाहिक जीवन सुखमय बीतेगा। दोनों ने बताया कि भारत ऐसा अद्भुत देश है, जहां एक बार पाणिग्रहण संस्कार हो जाने के बाद युगलों को मृत्यु ही जुदा करती है। दोनों ने बताया कि वे भले ही वैदिक परंपरा के अनुसार विवाह बंधन में बंधे हैं किंतु इस्लाम को उसी तरह मानते रहेंगे, जैसे पहले मानते आए थे।
चार भाषाओं का हुआ प्रयोग
तीन जोड़ों के विवाह को संपन्न कराने में चार भाषाएं प्रयुक्त की गयी। मंत्र संस्कृत में पढ़े गए और उनका अर्थ पंडित ने हिंदी में बताया। डॉ मिश्रपुरी ने अंग्रेजी अनुवाद किया, जबकि एक रूसी दुभाषिए ने युगलों को रूसी भाषा में अर्थ बताया। अलबत्ता संकेतों की भाषा से अधिकांश कामकाज मजे में चलता रहा। तीनों युगल चूंकि पहले भी वास्तु सीखने के लिए हरिद्वार आते रहे हैं, अत: यह क्षेत्र उन्हें अपना सा ही लगा। कनखल के कईं गणमान्य लोगों ने पुष्प वर्षा कर युगलों को आशीर्वाद प्रदान किया।