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सवाल: कितनी बरसा पानी, जवाब: मौसम विभाग को नहीं पता 

Tue, 30 Jul 2019 02:25 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal अनिल चन्दोला , अमर उजाला, देहरादून
अनिल चन्दोला , अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Tue, 30 Jul 2019 02:25 PM IST
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weather department do not know about rail fall
- फोटो : अमर उजाला

मानसून सीजन में उत्तराखंड में कितनी बारिश हो रही है, मौसम विभाग तक को इसका सही पता नहीं है। दरअसल राज्य में लगाए गए करीब 45 ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन और ऑटोमेटिक रेन गेज पिछले काफी समय से खराब हैं। इसके चलते मौसम विभाग को बारिश के सटीक आंकड़े नहीं मिल पा रहे हैं। 

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प्रदेश में बारिश और मौसम की स्थिति का सही आंकलन करने के लिए 107 ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन (एडब्ल्यूएस) लगाए गए हैं। इनमें से ज्यादातर राज्य सरकार और कुछ मौसम विभाग ने लगाए हैं। इसके अलावा 28 स्थानों पर ऑटोमेटिक रेन गेज (एआरजी) भी लगाए गए हैं। लेकिन विभाग को इनमें से केवल 90 के आंकड़े ही मिल पा रहे हैं। प्रदेश में करीब 45 एडब्ल्यूएस और एआरजी खराब हैं। खराबी, कनेक्टिविटी न होने व अन्य कारणों के चलते उन क्षेत्रों में होने वाली बारिश का सटीक रिकॉर्ड मौसम विभाग को नहीं मिल पा रहा है। 
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कई केंद्रों के आंकड़े गलत
प्रदेश में 45 ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन और ऑटोमेटिक रेन गेज के आंकड़े बिल्कुल नहीं मिल रहे हैं। इसके अलावा कई स्थानों से गलत या अपूर्ण आंकड़े मिल रहे हैं। ऐसे केंद्रों की संख्या करीब एक दर्जन बताई जा रही है। इस लिहाज से देखा जाए तो करीब 60 स्थानों की बारिश का सही आंकड़ा विभाग के पास नहीं है। 
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दून के ज्यादातर केंद्र भी खराब
राजधानी दून के ज्यादातर एडब्ल्यूएस और एआरजी भी खराब पड़े हैं। मोहकमपुर स्थित मौसम विभाग के मुख्यालय व घंटाघर में एआरजी और आशारोडी में एडब्ल्यूएस लगा है। इसके अलावा उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय में राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और सेवक आश्रम रोड पर केंद्रीय जल आयोग का रेन गेज लगा है। इन पांच में से मोहमकपुर को छोड़कर अन्य चारों खराब पड़े हैं। 


हमने राज्य सरकार को एडब्ल्यूएस और एआरजी के खराब होने की सूुचना दे दी है। पिछले कुछ दिनों के दौरान कई अन्य स्थानों में भी खराबी आई है। इससे उन स्थानों का सटीक आंकड़ा मिलने में दिक्कत हो रही है। 
-बिक्रम सिंह, निदेशक, मौसम केंद्र

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