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मौसम के तेवर देख हर कोई चकराया
अमर उजाला, देहरादून
Updated Sat, 15 Mar 2014 11:18 AM IST
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मौसम के तेवर से हर कोई चकराया हुआ है। देहरादून में शनिवार की सुबह बादल और धूप के बीच आंखमिचोली जारी रही।
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आसमान साफ रहने की संभावना
राज्य मौसम केंद्र ने शनिवार को उत्तराखंड में आम तौर पर दिन में मौसम सूखा और आसमान साफ रहने की संभावना है। तापमान में हालांकि किसी बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं।
अधिकतम तापमान 28 और न्यूनतम तापमान 11 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। शुक्रवार को भी दून में तेज धूप रही। दिन के वक्त लोग बगैर स्वेटर भी घूमते नजर आए।
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आर्द्रता का अधिकतम प्रतिशत 91, जबकि न्यूनतम प्रतिशत 38 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
अलनीनो की सक्रियता
इस बार भले ही विशेषज्ञ अलनीनो की सक्रियता और इसकी वजह से सूखे का अंदेशा जता रहे हों, लेकिन कई मानते हैं कि सूखे के बारे में कोई भी भविष्यवाणी करना अभी बेहद जल्दबाजी होगी।
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यह बात दीगर है कि जहां हर दशक में तापमान की औसत बढ़ोत्तरी 0.6 डिग्री सेल्सियस हो रही है, वहीं हर दशक में मानसूनी बारिश में 65 मिलीमीटर का इजाफा हो रहा है।
अलनीनो की सक्रियता को देखते हुए मौसम विज्ञान विभाग और कृषि विभाग परिस्थिति पर पूरी नजर रहा है।
बन सकती है सूखे की स्थिति
सूत्रों के मुताबिक सूखे की स्थिति अगर बनती है तो कृषि पर इसका असर न्यूनतम किया जा सके, इसे लेकर राज्यों में संबंधित अधिकारियों से कंटीजेंसी प्लान तैयार करने को कहा गया है।
वाडिया हिमालयन भू-विज्ञान संस्थान के निदेशक डॉ. अनिल गुप्ता की हालांकि मानें तो अब अलनीनो का मानसून से नाता बेहद कम रह गया है। इसकी मजबूती बहुत हद तक पछुवा हवाओं पर निर्भर करती है।
जलवायु परिवर्तन पर इंडियन सेंटर फार इंटरनेशनल माउंटेन डेवलपमेंट (आईसीमोड), नेपाल के विशेषज्ञ भी तापमान में हो रही बढ़ोत्तरी और ग्लोबल वार्मिंग को लेकर चिंता जता चुके हैं।
यहां पहाड़ों को जलवायु परिवर्तन के असर से बचाने के लिए यह केंद्र पहले भी एडवायजरी जारी कर चुका है।
यह है अलनीनो
अलनीनो दक्षिणी अमेरिका के पश्चिमी समुद्री किनारों से उठने वाली गर्म हवाओं का चक्रवात है, जो प्रशांत महासागर से होते हुए काफी बड़े क्षेत्र में मौसम परिवर्तन की वजह बनता है।
इसी क्षेत्र से उठने वाली ठंडी हवाओं के चक्र को लानीना कहा जाता है। दुनियाभर के मौसम विज्ञानियों की नजर अलनीनो पर रहती है, क्योंकि इसकी अति सक्रियता किसी भी देश में भारी बारिश, बाढ़, भूस्खलन जैसी आपदाओं का सबब बन सकती है।