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उत्तराखंड: दो कैबिनेट मंत्रियों और विधायकों के खिलाफ वारंट जारी

Sun, 07 May 2017 05:13 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 07 May 2017 05:13 PM IST
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Warrants against two cabinet ministers and one MLA
harak - फोटो : amarujala

विधानसभा घेराव के दौरान मार्ग में जाम लगाने और पुलिस पर पथराव कर 15 पुलिसकर्मियों को घायल करने के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने प्रदेश सरकार के दो कैबिनेट मंत्रियों हरक सिंह रावत और सुबोध उनियाल समेत कुछ अन्य के खिलाफ वारंट जारी किया है। 

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विधानसभा सत्र के दौरान तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष व वर्तमान में कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत पर आरोप है कि उनके नेतृत्व में छह से सात हजार लोगों ने 21 दिसंबर वर्ष 2009 को रिस्पना पुल के पास जाम लगाया और आने जाने वाले लोगों को धमकाया।
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धारा 144 लागू होने के बावजूद उन्होंने लोगों में उत्तेजना फैलाने का काम किया। इतना ही नहीं पुलिस के साथ धक्का-मुक्की कर उन पर पथराव किया। इससे ड्यूटी पर तैनात 15 पुलिसकर्मियों को चोटें आईं।
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मामले में पुलिस की ओर से धारा 47, 149, 332, 353, 336 एवं 504 के तहत मुकदमा दर्ज किया, लेकिन मुकदमा दर्ज होने के बावजूद आरोपी कोर्ट से लगातार अनुपस्थित चले आ रहे हैं। 

इन पुलिसकर्मियों को आई थीं चोटें 

Warrants against two cabinet ministers and one MLA

​इस पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने दो मंत्रियों के साथ ही विधायक कुंवर प्रणव, पूर्व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय, ब्रहमस्वरूप ब्रहमचारी, ट्विकल अरोड़ा, सतपाल ब्रहमचारी समेत कई लोगों के खिलाफ वारंट जारी किए हैं। 

इन पुलिसकर्मियों को आई थीं चोटें 
धक्का-मुक्की और पथराव में पुलिसकर्मी धीरेंद्र रावत, कैलाश पंवार, चंदन सिंह बिष्ट, अजय सिंह, उप निरीक्षक उर्मिला बडोला, ज्ञान लाल, मनीष चौधरी, कुलदीप, विजय सिंह, देवेंद्र, अजय सिंह, गोपाल, इंदु शर्मा, श्वेता भट्ट, सुधा और सुनीता को चोटें आई थीं। 

अदालत पूर्व में मुकदमा वापसी का प्रार्थना पत्र कर चुकी है खारिज 
इसके पहले अदालत इस मामले में आरोपियों के खिलाफ मुकदमा वापसी का प्रार्थना पत्र खारिज कर चुकी है। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में आरोपियों के खिलाफ मुकदमा वापसी के आदेश जारी हुए थे। अभियोजन की ओर से इसके लिए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में प्रार्थना पत्र दिया गया, लेकिन तत्कालीन मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट राजीव कुमार की अदालत ने यह कहते हुए इसे खारिज कर दिया कि मामला जनहित का नहीं है। इसे खारिज करने से जनता में विपरीत संदेश जाएगा। 

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