फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Vishnu Priya tree has several hundred years of history, even the cannons of China could not touch it

कई सौ साल का इतिहास समेटे है विष्णु प्रिया पेड़, चीन की तोपों के गोले भी छू नहीं पाए थे इसे 

Fri, 05 Jun 2020 05:05 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Fri, 05 Jun 2020 05:05 PM IST
विज्ञापन
Vishnu Priya tree has several hundred years of history, even the cannons of China could not touch it
vishnu priya tree - फोटो : amar ujala

प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण के प्रतीक और अपने में कई सौ साल का इतिहास समेटे कई पेड़ भी हैं। वन विभाग अगर चैंपियन ट्री की देखभाल करता है तो प्रदेेश के कई अलग-अलग हिस्सों में ऐसे पेड़ भी हैं जिनसे धार्मिक मान्यताएं जुड़ीं हैं और लोग इनकी पूजा करते हैं। जोशीमठ में कल्पवृक्ष नाम का बेहद पुराना पेड़ है।

विज्ञापन


मान्यता है कि इसी वृक्ष के नीचे बैठकर आदिगुरू शंकराचार्य ने तपस्या की थी। माना जाता है कि यह पेड़ करीब 1200 साल पुराना है। इसी तरह चीन सीमा से लगी नीति घाटी में मलारी गांव में विष्णु प्रिया वृक्ष है। गांव के सिंचित धान वाले क्षेत्र (सेरा) में स्थित इस पेड़ की पूजा होती है। हर बारह साल में यहां यज्ञ होता है। माना जाता है कि भारत-चीन युद्ध के दौरान चीनी सेना की ओर से दागे गए गोले इस पेड़ को छू नहीं पाए, जबकि आसपास के पेड़ों को नुकसान पहुंचा।
विज्ञापन



तीर्थ पुरोहित महापंचायत के प्रवक्ता डा. बृजेश सती के मुताबिक इस पेड़ के फल को घिसा जाए तो इससे चंदन जैसी खुशबू आती है। मलारी जोशीमठ मार्ग पर ही स्थित बड़ागांव में देवदार का एक पेड़ है जिसकी लंबे समय से पूजा होती आ रही है। जिस दिन बदरीनाथ धाम के कपाट खुलते हैं, उसी दिन इस पेड़ की भी पूजा होती है। हर बार नई फसल का एक अंश इस पेड़ को अर्पित किया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

 

वन विभाग का चैंपियन ट्री

Vishnu Priya tree has several hundred years of history, even the cannons of China could not touch it
champion tree - फोटो : amar ujala

वन विभाग को कुछ समय पहले ही कुमाऊं में नंधौर में जौलासाल के जंगल में साल का एक पेड़ मिला था। यह पेड़ करीब 200 साल पुराना बताया जा रहा है। मुख्य वन संरक्षक पराग मधुकर धकाते के मुताबिक इस पेड़ के तने की मोटाई करीब 54 फीट है। यह मोटाई इतनी है कि करीब एक दर्जन आदमी घेरा बनाकर इस पेड़ को घेर पाते हैं। वन विभाग इस पेड़ को चैंपियन पेड़ कहता है।

कई पेड़ों को देवस्वरूप मानकर होती है पूजा

प्रदेश में पूरे-पूरे जंगल देवी देवताओं को समर्पित करने के कई उदाहरण मौजूद हैं। इसी तरह कई पेड़ भी हैं जिन्हें जीवंत देवताओं की श्रेणी में माना जाता है। लोग इनकी पूजा करते हैं और इष्ट-अनिष्ट का अनुमान भी इनसे लगाते हैं। देवदार, पीपल, बड़, बेलपत्र आदि को देव स्वरूप में पूजा जाता है। इसी तरह से थुनेर, भोजपत्र आदि का भी धार्मिक महत्व है। ब्रह्मकमल को भी इसी श्रेणी में रखा जा सकता है। बुरांश फूल को यमुनोत्री क्षेत्र में फूल त्योहार के दिन भगवान सोमेश्वर को अर्पित किया जाता है। इनसे अलग हटकर प्रदेश में ऐसे पेड़ भी हैं जिनकी भगवान स्वरूप में पूजा लंबे समय से हो रही है। ये पेड़ हमारी सांस्कृति और अध्यात्मिक धरोहर भी हैं।
-बृजेश सती, तीर्थ पुरोहित

प्रदेश में 45 प्रतिशत हैं सेक्रेड ग्रोव

देव वनों पर विस्तृत अध्ययन कर रहे पिथौरागढ़ के चंदर सिंह नेगी के मुताबिक प्रदेश में पवित्र क्षेत्रों का करीब 44 प्रतिशत पवित्र पेड़ों के समूह (सेक्रेड ग्रोव) का है। 45 प्रतिशत पवित्र जंगल हैं। पांच प्रतिशत बुग्याल और छह प्रतिशत जल क्षेत्र हैं। इन सबसे धार्मिक विश्वास, मान्यताएं, टोटके, टैबू आदि जुड़े हुए हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed