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Dehradun News: ऑनलाइन हाजिरी के विरोध में ग्राम प्रधानों ने किया कार्य बहिष्कार का एलान
Mon, 17 Aug 2026 02:25 AM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
Updated Mon, 17 Aug 2026 02:25 AM IST
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नई ग्रामीण रोजगार योजना के तहत श्रमिकों की ऑनलाइन हाजिरी (एनएमएमएस) और फेस मैपिंग को अनिवार्य किए जाने के विरोध में पछवादून के ग्राम प्रधानों ने आर-पार की लड़ाई का एलान कर दिया है। शासन-प्रशासन के स्तर पर मांगों की सुनवाई न होने से खफा प्रधानों ने कार्य बहिष्कार की चेतावनी दी है। प्रधानों का कहना है कि गांवों की जमीनी हकीकत को दरकिनार कर थोपी गई इस व्यवस्था से ग्रामीण विकास कार्य बुरी तरह बाधित हो रहे हैं।
ग्राम प्रधानों के मुताबिक, दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट कनेक्टिविटी की भारी समस्या रहती है। ऐसे में ''''नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम'''' (एनएमएमएस) ऐप और फेस मैपिंग के जरिए श्रमिकों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। तकनीकी बाधाओं के कारण श्रमिकों को समय पर रोजगार नहीं मिल पा रहा है और विकास योजनाओं का क्रियान्वयन भी लटक रहा है।
ग्राम प्रधान संगठन के अध्यक्ष भूपेंद्र परमार ने बताया कि इन अव्यवहारिक नियमों को खत्म करने के लिए बीती 25 जुलाई को ग्राम्य विकास मंत्री, जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया था। सरकार को कार्रवाई के लिए 15 अगस्त तक का समय दिया गया था, लेकिन समयसीमा बीतने के बावजूद कोई ठोस पहल नहीं हुई। दूसरे ग्राम प्रधान संगठन के अध्यक्ष भरत सिंह ने कहा कि प्रधानों पर बिना जमीनी हकीकत जाने नई जिम्मेदारियां थोपी जा रही हैं। नियम ऐसे होने चाहिए जो विकास कार्यों को सुगम बनाएं, न कि उनमें बाधा बने।
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प्रधान संगठनों ने स्पष्ट किया है कि सोमवार को सभी ग्राम प्रधान विकासनगर ब्लॉक कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन करेंगे और सरकार को ज्ञापन भेजेंगे। जब तक फेस मैपिंग और ऑनलाइन हाजिरी की बाध्यता वापस नहीं ली जाती, तब तक प्रधानों का कार्य बहिष्कार जारी रहेगा।
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ग्राम प्रधानों के मुताबिक, दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट कनेक्टिविटी की भारी समस्या रहती है। ऐसे में ''''नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम'''' (एनएमएमएस) ऐप और फेस मैपिंग के जरिए श्रमिकों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। तकनीकी बाधाओं के कारण श्रमिकों को समय पर रोजगार नहीं मिल पा रहा है और विकास योजनाओं का क्रियान्वयन भी लटक रहा है।
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ग्राम प्रधान संगठन के अध्यक्ष भूपेंद्र परमार ने बताया कि इन अव्यवहारिक नियमों को खत्म करने के लिए बीती 25 जुलाई को ग्राम्य विकास मंत्री, जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया था। सरकार को कार्रवाई के लिए 15 अगस्त तक का समय दिया गया था, लेकिन समयसीमा बीतने के बावजूद कोई ठोस पहल नहीं हुई। दूसरे ग्राम प्रधान संगठन के अध्यक्ष भरत सिंह ने कहा कि प्रधानों पर बिना जमीनी हकीकत जाने नई जिम्मेदारियां थोपी जा रही हैं। नियम ऐसे होने चाहिए जो विकास कार्यों को सुगम बनाएं, न कि उनमें बाधा बने।
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प्रधान संगठनों ने स्पष्ट किया है कि सोमवार को सभी ग्राम प्रधान विकासनगर ब्लॉक कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन करेंगे और सरकार को ज्ञापन भेजेंगे। जब तक फेस मैपिंग और ऑनलाइन हाजिरी की बाध्यता वापस नहीं ली जाती, तब तक प्रधानों का कार्य बहिष्कार जारी रहेगा।