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Dehradun News: एंबुलेंस पहुंचते ही मरीज को अंदर ले जाएंगे वार्ड ब्वाय
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राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल की इमरजेंसी में मरीजों को अब एंबुलेंस से उतरने के बाद स्ट्रेचर या व्हीलचेयर के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा। एंबुलेंस के इमरजेंसी गेट पर पहुंचते ही वार्ड ब्वाय मरीज को स्ट्रेचर या व्हीलचेयर से सीधे अंदर ले जाएंगे। गंभीर मरीजों को तत्काल इमरजेंसी तक पहुंचाने के लिए अस्पताल प्रशासन ने कर्मचारियों की तैनाती प्रवेश द्वार के पास कर दी है।
दरअसल, सितंबर में चिकित्सा शिक्षा निदेशक डा. आशुतोष सयाना ने दून अस्पताल की इमरजेंसी का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान सामने आया कि मरीजों को एंबुलेंस से इमरजेंसी के अंदर पहुंचाने में कई बार समय लग जाता है। इसे देखते हुए उन्होंने वार्ड ब्वाय को इमरजेंसी के भीतर बैठाने के बजाय प्रवेश द्वार के पास तैनात करने के निर्देश दिए थे।
निर्देश के बाद अस्पताल प्रशासन ने व्यवस्था में बदलाव किया है। अब इमरजेंसी के गेट पर ही वार्ड ब्वाय स्ट्रेचर और व्हीलचेयर के साथ मौजूद रहेंगे। एंबुलेंस के पहुंचते ही कर्मचारी मरीज को उतारकर तत्काल अंदर पहुंचाएंगे। खासकर गंभीर हालत वाले मरीजों के मामले में इससे शुरुआती समय बचाने में मदद मिलेगी।
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रोज एक से दो घंटे इमरजेंसी में बैठ रहे चिकित्सा अधीक्षक
इमरजेंसी की व्यवस्थाओं की निगरानी के लिए चिकित्सा अधीक्षक डा. आरएस बिष्ट भी रोज सुबह एक से दो घंटे यहां बैठ रहे हैं। इस दौरान मरीजों को उपचार मिलने में आने वाली दिक्कतों, कर्मचारियों की उपलब्धता और अन्य व्यवस्थाओं को मौके पर देखा जा रहा है।
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि इमरजेंसी में पहुंचने वाले मरीजों को अनावश्यक इंतजार न करना पड़े, इस पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मरीज के पहुंचने से लेकर उसे चिकित्सक तक पहुंचाने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए व्यवस्थाओं की लगातार निगरानी की जा रही है।
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दरअसल, सितंबर में चिकित्सा शिक्षा निदेशक डा. आशुतोष सयाना ने दून अस्पताल की इमरजेंसी का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान सामने आया कि मरीजों को एंबुलेंस से इमरजेंसी के अंदर पहुंचाने में कई बार समय लग जाता है। इसे देखते हुए उन्होंने वार्ड ब्वाय को इमरजेंसी के भीतर बैठाने के बजाय प्रवेश द्वार के पास तैनात करने के निर्देश दिए थे।
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निर्देश के बाद अस्पताल प्रशासन ने व्यवस्था में बदलाव किया है। अब इमरजेंसी के गेट पर ही वार्ड ब्वाय स्ट्रेचर और व्हीलचेयर के साथ मौजूद रहेंगे। एंबुलेंस के पहुंचते ही कर्मचारी मरीज को उतारकर तत्काल अंदर पहुंचाएंगे। खासकर गंभीर हालत वाले मरीजों के मामले में इससे शुरुआती समय बचाने में मदद मिलेगी।
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रोज एक से दो घंटे इमरजेंसी में बैठ रहे चिकित्सा अधीक्षक
इमरजेंसी की व्यवस्थाओं की निगरानी के लिए चिकित्सा अधीक्षक डा. आरएस बिष्ट भी रोज सुबह एक से दो घंटे यहां बैठ रहे हैं। इस दौरान मरीजों को उपचार मिलने में आने वाली दिक्कतों, कर्मचारियों की उपलब्धता और अन्य व्यवस्थाओं को मौके पर देखा जा रहा है।
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि इमरजेंसी में पहुंचने वाले मरीजों को अनावश्यक इंतजार न करना पड़े, इस पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मरीज के पहुंचने से लेकर उसे चिकित्सक तक पहुंचाने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए व्यवस्थाओं की लगातार निगरानी की जा रही है।