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Dehradun News: शौर्य स्थल की शान बढ़ाएगा विजयंत टैंक
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भारतीय सेना के शौर्य का प्रतीक विजयंत टैंक अब गढ़ी कैंट के चीड़बाग स्थित युद्ध स्मारक (शौर्य स्थल) की शान बढ़ाएगा। युवा पीढ़ी को फौज के प्रति आकर्षित करने के उद्देश्य से टैंक यहां लगाया गया है। यह टैैंक रविवार को दून पहुंचा।
शौर्य स्थल पर लड़ाकू विमान मिग-21 व नौसेना के युद्धपोत (विद्युत वर्ग) की प्रतिकृति पहले ही स्थापित है। युद्ध स्मारक के अध्यक्ष तरुण विजय, कैंट बोर्ड के मुख्य अधिशासी अधिकारी अभिनव सिंह ने इसे नव वर्ष की सौगात बताया। देश के सैन्य इतिहास में देवभूमि के रणबांकुरों के शौर्य के असंख्य किस्से दर्ज हैं। उनके इस अदम्य साहस और बलिदान के प्रतीक के रूप में पूर्व राज्य सभा सदस्य तरुण विजय की पहल पर युद्ध स्मारक की नींव रखी गई थी।
उन्होंने अपनी निधि से इस काम के लिए दो करोड़ रुपये की मदद दी थी। यही नहीं उनकी अध्यक्षता में गठित उत्तराखंड वार मेमोरियल ट्रस्ट के माध्यम से भी तमाम सुविधाएं यहां जुटाई गईं। देश के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीरभूमि उत्तराखंड के सैनिकों के नाम यहां दर्ज हैं। वहीं, वीर जवान की मुख्य मूर्ति के आधार के लिए बदरीनाथ क्षेत्र से छह फीट की करीब साढ़े नौ टन वजनी विशेष आधार शिला भी लाई गई।
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अब चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान और देहरादून जीओसी मेजर जनरल संजीव खत्री के विशेष प्रयास से भारत-पाक युद्ध में सक्रिय भूमिका निभाने वाला विजयंत टैंक यहां लाया गया है। पूर्व राज्य सभा सदस्य तरुण विजय ने बताया कि पूर्व सैनिक काफी समय से इसकी मांग कर रहे थे। सीडीएस से इस संबंध अनुरोध किया गया और उन्होंने तुरंत ही इस पर सहमति दे दी।
बताया कि टिहरी सांसद माला राज्य लक्ष्मी शाह ने भी अपनी सांसद निधि से 50 लाख रुपये की मदद दी है। इस रकम को युद्ध स्मारक पर अन्य संसाधन जुटाने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। वहीं, एक भव्य प्रवेश द्वार का भी निर्माण यहां किया जाएगा। मुख्य अधिशासी अधिकारी अभिनव सिंह ने कहा कि दून में सैन्य क्षेत्र में टैैंक स्थापित हैैं, पर सिविल क्षेत्र में अभी तक कोई टैैंक नहीं था।
14 जनवरी को रक्षा मंत्री करेंगे विधिवत उद्घाटन
पूर्व राज्य सभा सदस्य तरुण विजय ने बताया कि 14 जनवरी को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इस टैंक का विधिवत उद्घाटन करेंगे। इस मौके पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान भी मौजूद रहेंगे। वहीं कार्यक्रम में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और देहरादून निवासी अंडमान निकोबार के उप राज्यपाल एडमिरल देवेंद्र कुमार जोशी को भी आमंत्रित किया है।
उन्होंने बताया कि इस शौर्य स्थल के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आध्यात्मिक गुरु स्वामी नारायण संप्रदाय के प्रमुख स्वामी जी और उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ, उड़ीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक समेत हजारों सैनिक परिवारों ने सहयोग दिया।
530 किमी थी इस टैंक की ऑपरेशनल रेंज
विजयंत टैंक 1971 में भारत-पाक युद्ध का हीरो रहा। 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाले इस टैंक की ऑपरेशनल रेंज 530 किलोमीटर थी। इसमें चार क्रू-मेंबर बैठते थे। इसका वजन 39 हजार टन, लंबाई 9.788 मीटर, चौड़ाई 3.168 मीटर और ऊंचाई 2.711 मीटर है। विजयंत टैंक अब सेवा में नहीं है लेकिन यह देश के युवाओं को आज भी प्रेरित कर रहा है।
टैंक लगाने के दौरान एसपी ट्रैफिक और सीईओ कैंट के बीच हुई बहस
चीड़ बाग स्थित शौर्य स्थल के बाहर टैंक लगाने के लिए कैंट बोर्ड की ओर से लगाई जेसीबी से कुछ देर जाम लग गया। इसी दौरान सीएम का काफिला गुजरने जा रहा था, जिसके कारण एसपी ट्रैफिक अक्षय प्रह्लाद कौंडे व एसपी सिटी सरिता डोबाल मौके पर पहुंचे और जेसीबी को रास्ते से हटाया। इस दौरान सड़क जाम करने के चलते एसपी ट्रैफिक और सीईओ कैंट अभिनव सिंह के बीच तीखी बहस हो गई।
इस मामले में जीओसी सब एरिया की ओर से डीजीपी को शिकायत दी गई है। कैंट बोर्ड की ओर से शौर्य स्थल के बाहर रात से ही चार जेसीबी मशीन लगाकर टैंक रखवाया जा रहा था। यह कार्य दोपहर एक बजे तक भी चलता रहा। इस दौरान विद्युत यांत्रिक ब्रांच के दो जवान सड़क बंद करवाकर जेसीबी से काम करवा रहे थे।
एसपी ट्रैफिक को मार्ग बाधित होने की सूचना मिली तो वह तुरंत मौके पर पहुंचे और जवान को डांटने लगे। थोड़ी दूर खड़े कैंट बोर्ड के सीईओ अभिनव सिंह भी वहां आए और एसपी ट्रैफिक से जवानों को डांटने का कारण पूछा। काफी देर तक दोनों अधिकारियों के बीच बहस हुई, जिसके बाद एसपी यातायात वहां से चले गए।
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शौर्य स्थल पर लड़ाकू विमान मिग-21 व नौसेना के युद्धपोत (विद्युत वर्ग) की प्रतिकृति पहले ही स्थापित है। युद्ध स्मारक के अध्यक्ष तरुण विजय, कैंट बोर्ड के मुख्य अधिशासी अधिकारी अभिनव सिंह ने इसे नव वर्ष की सौगात बताया। देश के सैन्य इतिहास में देवभूमि के रणबांकुरों के शौर्य के असंख्य किस्से दर्ज हैं। उनके इस अदम्य साहस और बलिदान के प्रतीक के रूप में पूर्व राज्य सभा सदस्य तरुण विजय की पहल पर युद्ध स्मारक की नींव रखी गई थी।
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उन्होंने अपनी निधि से इस काम के लिए दो करोड़ रुपये की मदद दी थी। यही नहीं उनकी अध्यक्षता में गठित उत्तराखंड वार मेमोरियल ट्रस्ट के माध्यम से भी तमाम सुविधाएं यहां जुटाई गईं। देश के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीरभूमि उत्तराखंड के सैनिकों के नाम यहां दर्ज हैं। वहीं, वीर जवान की मुख्य मूर्ति के आधार के लिए बदरीनाथ क्षेत्र से छह फीट की करीब साढ़े नौ टन वजनी विशेष आधार शिला भी लाई गई।
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अब चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान और देहरादून जीओसी मेजर जनरल संजीव खत्री के विशेष प्रयास से भारत-पाक युद्ध में सक्रिय भूमिका निभाने वाला विजयंत टैंक यहां लाया गया है। पूर्व राज्य सभा सदस्य तरुण विजय ने बताया कि पूर्व सैनिक काफी समय से इसकी मांग कर रहे थे। सीडीएस से इस संबंध अनुरोध किया गया और उन्होंने तुरंत ही इस पर सहमति दे दी।
बताया कि टिहरी सांसद माला राज्य लक्ष्मी शाह ने भी अपनी सांसद निधि से 50 लाख रुपये की मदद दी है। इस रकम को युद्ध स्मारक पर अन्य संसाधन जुटाने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। वहीं, एक भव्य प्रवेश द्वार का भी निर्माण यहां किया जाएगा। मुख्य अधिशासी अधिकारी अभिनव सिंह ने कहा कि दून में सैन्य क्षेत्र में टैैंक स्थापित हैैं, पर सिविल क्षेत्र में अभी तक कोई टैैंक नहीं था।
14 जनवरी को रक्षा मंत्री करेंगे विधिवत उद्घाटन
पूर्व राज्य सभा सदस्य तरुण विजय ने बताया कि 14 जनवरी को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इस टैंक का विधिवत उद्घाटन करेंगे। इस मौके पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान भी मौजूद रहेंगे। वहीं कार्यक्रम में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और देहरादून निवासी अंडमान निकोबार के उप राज्यपाल एडमिरल देवेंद्र कुमार जोशी को भी आमंत्रित किया है।
उन्होंने बताया कि इस शौर्य स्थल के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आध्यात्मिक गुरु स्वामी नारायण संप्रदाय के प्रमुख स्वामी जी और उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ, उड़ीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक समेत हजारों सैनिक परिवारों ने सहयोग दिया।
530 किमी थी इस टैंक की ऑपरेशनल रेंज
विजयंत टैंक 1971 में भारत-पाक युद्ध का हीरो रहा। 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाले इस टैंक की ऑपरेशनल रेंज 530 किलोमीटर थी। इसमें चार क्रू-मेंबर बैठते थे। इसका वजन 39 हजार टन, लंबाई 9.788 मीटर, चौड़ाई 3.168 मीटर और ऊंचाई 2.711 मीटर है। विजयंत टैंक अब सेवा में नहीं है लेकिन यह देश के युवाओं को आज भी प्रेरित कर रहा है।
टैंक लगाने के दौरान एसपी ट्रैफिक और सीईओ कैंट के बीच हुई बहस
चीड़ बाग स्थित शौर्य स्थल के बाहर टैंक लगाने के लिए कैंट बोर्ड की ओर से लगाई जेसीबी से कुछ देर जाम लग गया। इसी दौरान सीएम का काफिला गुजरने जा रहा था, जिसके कारण एसपी ट्रैफिक अक्षय प्रह्लाद कौंडे व एसपी सिटी सरिता डोबाल मौके पर पहुंचे और जेसीबी को रास्ते से हटाया। इस दौरान सड़क जाम करने के चलते एसपी ट्रैफिक और सीईओ कैंट अभिनव सिंह के बीच तीखी बहस हो गई।
इस मामले में जीओसी सब एरिया की ओर से डीजीपी को शिकायत दी गई है। कैंट बोर्ड की ओर से शौर्य स्थल के बाहर रात से ही चार जेसीबी मशीन लगाकर टैंक रखवाया जा रहा था। यह कार्य दोपहर एक बजे तक भी चलता रहा। इस दौरान विद्युत यांत्रिक ब्रांच के दो जवान सड़क बंद करवाकर जेसीबी से काम करवा रहे थे।
एसपी ट्रैफिक को मार्ग बाधित होने की सूचना मिली तो वह तुरंत मौके पर पहुंचे और जवान को डांटने लगे। थोड़ी दूर खड़े कैंट बोर्ड के सीईओ अभिनव सिंह भी वहां आए और एसपी ट्रैफिक से जवानों को डांटने का कारण पूछा। काफी देर तक दोनों अधिकारियों के बीच बहस हुई, जिसके बाद एसपी यातायात वहां से चले गए।