विकलांगता को पीछे छोड़ लांस एंजेलिस में फहराया तिरंगा
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शरीर ने भले ही साथ देने से इनकार किया हो, पर टिहरी के खर्क गांव के दसवीं के छात्र विजय सिंह ने अपनी लगन से लांस एंजेलिस में हुए स्पेशल ओलंपिक वर्ल्ड गेम्स में एक स्वर्ण और दो कांस्य पदक जीत लिए।
विकलांगता को जीत की राह में बाधा न बनने देने का हौसला रखने वाले विजय सिंह को गुरुवार को बीजापुर में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सम्मानित किया।
सरकार ने माना कि विजय सिंह की खेल प्रतिभा को निखारने में उनके कोच और राजकीय उच्चतर माध्यमिक खोला कड़ाकोट के व्यायाम शिक्षक सतीश बलूनी का भी खासा योगदान है। बलूनी को शिक्षा विभाग पांच सितंबर को शिक्षक दिवस पर सम्मानित करेगा।
पिता दर्मियान सिंह को खो चुके विजय सिंह के सामने चुनौतियों के पहाड़ हैं। शरीर से कुछ हद तक लाचार विजय सिंह ने कड़ाकोट में शरीर से भले चंगे विद्यार्थियों के बीच में दौड़ की अपनी प्रतिभा का परिचय इससे पहले भी दिया।
खेल प्रतिभाओं को तराशने का काम करें शिक्षक
युवा खेल मंत्रालय की ओर से आयोजित राष्ट्रीय खेल में विजय सिंह ने गोला फेंक और 400 मीटर की दौड़ में स्वर्ण पदक हासिल किया था। यहीं से राह बनी और विजय सिंह न लांस एंजेलिस में हुए स्पेशल ओलंपिक वर्ल्ड गेम्स में 800 मीटर दौड़ मेंस्वर्ण, 400 मीटर दौड़ और 400 मीटर रिले में कांस्य पदक जीत लिए।
मुख्यमंत्री हरीश रावत ने विजय सिंह और उनके कोच की उपलब्धि को सराहा और कहा कि प्रदेश के शिक्षक इसी तरह से खेल प्रतिभाओं को तराशने का काम करें।
बृहस्पतिवार को विधानसभा में आयोजित प्रेस वार्ता में शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी ने विवेकाधीन कोष से विजय सिंह को एक लाख रुपये देने की पैरवी का ऐलान किया। मंत्री ने कहा कि पांच सितंबर को शिक्षक दिवस पर विजय सिंह केकोच को भी सम्मानित किया जाएगा।
1998 में जन्मा विजय सिंह इस समय खर्क गांव में अपनी मां रजनी देवी के साथ रह रहा है। उत्तराखंड में आयोजित स्पेशल ओलंपिक में भी विजय सिंह ने 100 मीटर की दौड़ और गोला फेंक में पहला स्थान हासिल किया था। प्रमुख सचिव एस राजु के मुताबिक विजय सिंह इस तरह की उपलब्धि हासिल करने वाला सरकारी स्कूल से निकला प्रदेश का पहला छात्र है।