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Dehradun News: सेवानिवृत्त सैनिक समाज चलती-फिरती अकादमी
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-राज्यपाल दिल्ली में राष्ट्रीय सैनिक संस्था के 18वें अधिवेशन में हुए शामिल
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) ने मंगलवार को राष्ट्रीय सैनिक संस्था के 18वें राष्ट्रीय अधिवेशन में कहा कि सेवानिवृत्त सैनिक समाज की चलती-फिरती अकादमी है।
नई दिल्ली में आयोजित अधिवेशन में राज्यपाल ने बतौर मुख्य अतिथि प्रतिभाग किया। उन्होंने संस्था के सदस्यों को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित किया। कहा कि यह संगठन केवल पूर्व सैनिकों का मंच नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण की एक जीवंत ऊर्जा है, जो अनुभव और युवा शक्ति को एक सूत्र में पिरोकर समाज को दिशा दे रहा है।
राज्यपाल ने कहा, वर्दी उतरने के बाद भी सैनिक का उत्तरदायित्व समाप्त नहीं होता। उन्होंने पूर्व सैनिकों से आह्वान किया कि वे शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और युवा मार्गदर्शन जैसे क्षेत्रों में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं। आज के दौर में समाज में अनुशासित एवं सजग नेटवर्क की आवश्यकता है, जिसमें राष्ट्रीय सैनिक संस्था की भूमिका महत्वपूर्ण है। सेना में बिताया गया समय युवाओं को अनुशासन, आत्मविश्वास और राष्ट्र प्रथम की भावना से ओतप्रोत करता है। उन्होंने युवाओं से राष्ट्र रक्षा को अपना धर्म मानकर आगे आने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पलायन रोकना और सीमांत क्षेत्रों को सुदृढ़ बनाना रणनीतिक आवश्यकता है, इसमें पूर्व सैनिकों का योगदान महत्वपूर्ण हो सकता है। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए प्रत्येक नागरिक को सैनिक की भांति अनुशासित, समर्पित और राष्ट्र प्रथम के भाव से कार्य करना होगा।
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अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) ने मंगलवार को राष्ट्रीय सैनिक संस्था के 18वें राष्ट्रीय अधिवेशन में कहा कि सेवानिवृत्त सैनिक समाज की चलती-फिरती अकादमी है।
नई दिल्ली में आयोजित अधिवेशन में राज्यपाल ने बतौर मुख्य अतिथि प्रतिभाग किया। उन्होंने संस्था के सदस्यों को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित किया। कहा कि यह संगठन केवल पूर्व सैनिकों का मंच नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण की एक जीवंत ऊर्जा है, जो अनुभव और युवा शक्ति को एक सूत्र में पिरोकर समाज को दिशा दे रहा है।
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राज्यपाल ने कहा, वर्दी उतरने के बाद भी सैनिक का उत्तरदायित्व समाप्त नहीं होता। उन्होंने पूर्व सैनिकों से आह्वान किया कि वे शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और युवा मार्गदर्शन जैसे क्षेत्रों में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं। आज के दौर में समाज में अनुशासित एवं सजग नेटवर्क की आवश्यकता है, जिसमें राष्ट्रीय सैनिक संस्था की भूमिका महत्वपूर्ण है। सेना में बिताया गया समय युवाओं को अनुशासन, आत्मविश्वास और राष्ट्र प्रथम की भावना से ओतप्रोत करता है। उन्होंने युवाओं से राष्ट्र रक्षा को अपना धर्म मानकर आगे आने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पलायन रोकना और सीमांत क्षेत्रों को सुदृढ़ बनाना रणनीतिक आवश्यकता है, इसमें पूर्व सैनिकों का योगदान महत्वपूर्ण हो सकता है। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए प्रत्येक नागरिक को सैनिक की भांति अनुशासित, समर्पित और राष्ट्र प्रथम के भाव से कार्य करना होगा।
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