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Dehradun News: गैर प्रमाणित प्रकाशकों की पुस्तकें बेच रहे थे विक्रेता, धोखाधड़ी के आरोप में हुए मुकदमे

Mon, 31 Mar 2025 12:17 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Mon, 31 Mar 2025 12:17 AM IST
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Vendors were selling books of non-certified publishers
Iकई नामी पुस्तकों के आईएसबीएन नंबर निकले फर्जी, पठन सामग्री की कोई प्रमाणिकता नहीं
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Iपुस्तक प्रकाशन के लिए दिया जाता है प्रकाशकों को नंबर, कई तो ऑनलाइन ट्रेस ही नहीं हुएI
Iराजधानी में पुस्तक विक्रेताओं के यहां छापे में कई ऐसी बातें सामने आईं जिनसे फर्जीवाड़े का भी खुलासा हुआ। कई पुस्तक ऐसी बेची जा रही थीं जिनके न तो असल प्रकाशकों का पता है और नही लेखकों का।I
Iपुस्तक पर प्रकाशकों के अंतरराष्ट्रीय मानक पुस्तक संख्या (आईएसबीएन) नंबर ही सत्यापित नहीं हुए। इससे यह भी आशंका जताई जा रही है कि बहुत सी पुस्तकें उनके असल प्रकाशक के बजाय कहीं और से फर्जीवाड़ा कर खरीदकर बेची जा रही हैं। ऐसे में इन तीनों पुस्तक विक्रेताओं के खिलाफ धोखाधड़ी की धाराओं में मुकदमे दर्ज हुए हैं।I
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Iबता दें कि जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देश पर शनिवार को तीन प्रमुख पुस्तक विक्रेताओं नेशनल बुक हाउस, एशियन बुक डिपो और ब्रदर पुस्तक भंडार पर छापा मारा गया था। अभिभावकों का आरोप था कि यहां से खरीदी गई पुस्तकों का उन्हें बिल नहीं दिया जाता है। इस तरह यह मामला जीएसटी चोरी का भी बन रहा था, लेकिन सबसे ज्यादा गंभीर बात सामने तब आई जब शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने यहां पुस्तकों की जांच की। प्रमुख कक्षाओं में विभिन्न बोर्ड की सिफारिश पर पढ़ाई जाने वाली पुस्तकों के प्रकाशन में झोल नजर आया।
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Iनेशनल बुक हाउस पर कक्षा नौ और 10 की कई ऐसी पुस्तकें मिलीं जिन पर आईएसबीएन नंबर की पुष्टि ही नहीं हो पाई। इसके संबंध में विस्तृत पूछताछ भी विक्रेता से की गई, लेकिन कोई वाजिब जवाब नहीं आया। इसी तरह एशियन बुक डिपो पर भी साहित्य सागर अभ्यास पुस्तिका पर आईएसबीएन नंबर नहीं था। कैमिस्ट्री लैब मैनुअल जो कि कक्षा नौ में पढ़ाई जाती है पर जो आईएसबीएन नंबर लिखा था वह ऑनलाइन सत्यापित ही नहीं हो पाया। इसी तरह बसुधा नाम की पुस्तक पर भी यह नंबर सत्यापित नहीं हुआ।
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Iयही नहीं कक्षा छह में पढ़ाई जाने वाली जावा मेड सिंपल पर प्रकाशक का कोई विवरण नहीं था। इस पर आईएसबीएन नंबर लिखा ही नहीं था। इन सभी पुस्तकों को जब्त कर लिया गया। वाजिब जवाब न आने पर इनके खिलाफ प्रशासन ने मुकदमे दर्ज कराए हैं। इसी तरह ब्रदर्स पुस्तक भंडार पर भी अनियमितताएं पाई गईं। शहर कोतवाल चंद्रभान सिंह अधिकारी ने बताया कि प्रशासन ने कई तथ्य उपलब्ध कराए हैं। इनके आधार पर मुकदमों की विवेचना की जा रही हैI
Iयह होता है आईएसबीएन नंबर
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Iआईएसबीएन नंबर पुस्तक की 13 अंकों की एक विशिष्ट पहचान संख्या होती है। यह प्रकाशक और लेखक आदि के लिए आवश्यक होता है। भारत में यह नंबर राजा राम मोहन राय एजेंसी उपलब्ध कराती है। इस नंबर से पुस्तक के बारे में सभी जानकारियां प्राप्त की जा सकती हैं। एक तरह से यह कॉपीराइट जैसा ही होता है। मसलन जिस प्रकाशक को पुस्तक का यह नंबर दिया जाता है, वही उसे छाप सकता है। यानी सभी तरह से वही उसका जिम्मेदार होता है।I

Iगलत हुआ तो कौन होगा जिम्मेदारI
Iदरअसल, किसी भी पुस्तक में कोई तथ्य पढ़ाए जाते हैं, उनके लिए प्रकाशक और लेखक जिम्मेदार होते हैं। एक निजी प्रकाशन के एरिया मैनेजर प्रशांत मिश्रा ने बताया कि बिना आईएसबीएन नंबर या गलत नंबर वाली पुस्तकों का कोई अता पता नहीं होता है कि वह कहां और किसने छापी। ऐसे में इनमें अगर कोई पठन सामग्री गलत होती है तो उसके बारे में पता नहीं किया सकता। यह सामग्री किसी समुदाय या सभ्यता के संबंध में हो तो यह एक बड़ा मुद्दा भी हो सकता है।I
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