वीरप्पन का 'दि एंड' करने वाले IPS ने किया खुलासा, बोले एनकाउंटर नहीं ऐसे मारना चाहती थी पुलिस
कुख्यात चंदन तस्कर वीरप्पन का एनकाउंटर करने वाले आईपीएस के विजय कुमार ने खुलासा किया कि पुलिस एनकाउंटर नहीं बल्कि किसी और तरीके से मारना चाहती थी। आगे जानिए...
कुख्यात चंदन तस्कर वीरप्पन को जिंदा पकड़ पाने में नाकामयाब रही पुलिस उसे जहर देकर मारना चाहती थी। इसके लिए मधुमेह (शुगर) के लिए उसे दी जाने वाली इंसुलिन में जहर मिलाने की योजना बनाई गई। लेकिन वीरप्पन को इसका पता चल गया और पुलिस की योजना फेल हो गई।
वीरप्पन का एनकाउंटर करने वाली एसटीएफ का नेतृत्व करने वाले आईपीएस के विजय कुमार ने रविवार को राजधानी में चल रहे इंटरनेशनल लिटरेचर एंड आर्ट फेस्टिवल ‘वैली ऑफ वर्ड्स’ में यह खुलासा किया।
वैली ऑफ वर्ड्स में पूर्व आईपीएस अधिकारी के विजय कुमार की पुस्तक ‘वीरप्पन : चेजिंग द ब्रिगेंड’ पर परिचर्चा हुई। उत्तराखंड पुलिस के पूर्व डीजीपी अशोक लाल ने भी परिचर्चा में हिस्सा लिया।
विजय कुमार ने बताया कि वीरप्पन बेहद चालाक था। उसका नेटवर्क भी बेहद मजबूत था। पुलिस उसे पकड़ने की कोई प्लानिंग करती, तो वीरप्पन को उसकी भनक लग जाती थी। उन्होंने बताया कि इलाके के कई आदिवासी और ग्रामीण भी उसकी बचने में मदद करते थे।
कौन था वीरप्पन, जनिए
करीब 30 साल की मेहनत के बाद भी जब वीरप्पन हाथ नहीं आया तो स्पेशल टास्क फोर्स ने अन्य तरीके अपनाए। पानी में धतूरा डालकर उसे पकड़ने की कोशिश भी हुई, लेकिन जंगल में वह लगातार अपने ठिकाने बदलता रहता था।
इसके अलावा उसको मधुमेह की दवाओं में जहर मिलाकर मारने की कोशिश भी कई। हालांकि, वीरप्पन तक यह सब सूचनाएं लगातार पहुंचती रहीं, जिसके चलते उसको कोई नुकसान नहीं पहुंचा।
मुमकिन नहीं था जिंदा पकड़ना
के विजय कुमार ने बताया कि पुख्ता सूचना मिलने के बाद जब एसटीएफ टीम रवाना हुई तो वीरप्पन को जिंदा पकड़ने और मारने दोनों विकल्पों पर विचार किया गया। लेकिन जब जंगल में आमना-सामना हुआ तो फायरिंग होने लगी। उस स्थिति में वीरप्पन को जिंदा पकड़ने की कोशिश टीम की जान के लिए खतरा बन सकती थी। वीरप्पन और उसके साथियों ने टीम को कोई मौका नहीं दिया।
कौन था वीरप्पन
तीन दशक से अधिक समय तक वीरप्पन तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल के जंगलों में आतंक का पर्याय बना रहा। इस दौरान वह चंदन और हाथी दांत का कुख्यात तस्कर बन गया। हाथी दांत की तस्करी के लिए उसने करीब 900 जंगली हाथियों की हत्या कर दी। तीन राज्यों की पुलिस 30 साल से अधिक समय तक उसके पीछे लगी रही।
इस पूरे अभियान पर 20 करोड़ से अधिक खर्च आया। साथ ही 44 पुलिसकर्मियों और 84 सिविलियंस समेत करीब डेढ़ सौ लोगों को जान गंवानी पड़ी। 2004 में तमिलनाडु के धमरपुरी जिले में हुए एनकाउंटर में वीरप्पन अपने तीन साथियों के साथ मारा गया। टीम का नेतृत्व आईपीएस के विजय कुमार ने किया था।