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Dehradun News: आसन रामसर साइट के अस्तित्व को बचाने की तैयारी
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I- आसन कंजर्वेशन समिति इसके लिए तैयार कर रही योजनाI
संरक्षित रामसर साइट के लिए खरपतवार मुसीबत बन रही है। किनारों से लेकर भीतर बने टापुओं पर उग रही तरह-तरह की घास वेटलैंड के अस्तित्व के लिए खतरा बन रही है। वन विभाग की आसन रिजर्व कंजर्वेशन प्रबंधन समिति ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त की है। समिति अब खरपतवार नष्ट करने और पक्षियों के लिए समतल तल बनाने की योजना तैयार कर रही है।
आसन कंजर्वेशन रिजर्व को उत्तराखंड का पहला रामसर साइट होने का दर्जा मिला हुआ है। लगभग साढ़े चार हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैले साइट में उग रही खरपतवार चिंताजनक है। दो दिन पहले रामपुर मंडी में आयोजित बैठक में आसन कंजर्वेशन रिजर्व प्रबंधन समिति के पदाधिकारी, मुख्य वन संरक्षक गढ़वाल नरेश कुमार व मुख्य वन संरक्षक यमुनावृत कहकशां नसीम ने इसका उल्लेख किया था। उन्होंने साइट के किनारों व टापुओं से घास को नष्ट करके पक्षियों के लिए समतल तल बनाने के संबंध में एक प्रस्ताव भी तैयार किया है। चकराता वन प्रभाग की एसडीओ विभु ने बताया कि समिति अपना प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजेगी।
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संरक्षित रामसर साइट के लिए खरपतवार मुसीबत बन रही है। किनारों से लेकर भीतर बने टापुओं पर उग रही तरह-तरह की घास वेटलैंड के अस्तित्व के लिए खतरा बन रही है। वन विभाग की आसन रिजर्व कंजर्वेशन प्रबंधन समिति ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त की है। समिति अब खरपतवार नष्ट करने और पक्षियों के लिए समतल तल बनाने की योजना तैयार कर रही है।
आसन कंजर्वेशन रिजर्व को उत्तराखंड का पहला रामसर साइट होने का दर्जा मिला हुआ है। लगभग साढ़े चार हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैले साइट में उग रही खरपतवार चिंताजनक है। दो दिन पहले रामपुर मंडी में आयोजित बैठक में आसन कंजर्वेशन रिजर्व प्रबंधन समिति के पदाधिकारी, मुख्य वन संरक्षक गढ़वाल नरेश कुमार व मुख्य वन संरक्षक यमुनावृत कहकशां नसीम ने इसका उल्लेख किया था। उन्होंने साइट के किनारों व टापुओं से घास को नष्ट करके पक्षियों के लिए समतल तल बनाने के संबंध में एक प्रस्ताव भी तैयार किया है। चकराता वन प्रभाग की एसडीओ विभु ने बताया कि समिति अपना प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजेगी।
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