मां-बाप ने उंगली छोड़ी तो थामा इस शख्स ने हाथ और फिर बन गई स्टॉर
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रातों रात कोई बड़ा स्टार नहीं बन जाता है। इसके लिए कड़ी मेहनत जरूरी है। जो लड़की कभी देहरादून जाने के नाम से घबराती थी वो अब विश्व की सबसे ऊंचे पर्वत शिखर एवरेस्ट पर फतह करने के लिए पूरी तरह से तैयार है।
बड़ा स्टार बनने के लिए कड़ी मेहनत के साथ हर दिन एक कदम आगे बढ़ना पड़ता है। कुछ ऐसा ही जज्बा उत्तरकाशी की 20 वर्षीय इस लड़की के अंदर देखने को मिला। जो कभी देहरादून जाने के नाम से घबराती थी वो अब विश्व की सबसे ऊंचे पर्वत शिखर एवरेस्ट पर फतह करने के लिए पूरी तरह से तैयार है।
उत्तरकाशी जिले में नाल्ड गांव निवासी पूनम राणा के साथ जिंदगी ने कदम कदम पर परीक्षा ली है। लेकिन वह घबराई नहीं और आज कड़े संघर्ष के बीच आगे बढ़ रही है। बचपन में पांच वर्ष की उम्र में पूनम के माता पिता स्वर्ग सिधार गये थे। जिसके बाद उसके तीन भाई उसका सहारा बने। लेकिन विगत वर्ष 2016 में उसके बड़े भाई भगवान सिंह और फिर सितंबर में सबसे छोटे भाई कमलेश की एक्सीडेंट में मौत हो गई।
मंझला भाई रामकृष्ण का अपना परिवार है। उस पर भी काफी जिम्मेदाररियां आ गई थी। ऐसे में पूनम के सामने अपने भविष्य के साथ परिवार के दूसरे सदस्यों की भी जिम्मेदारी आ गई थी।
ऐसे में उत्तरकाशी में होटल व्यवसाही अजय पुरी और दिपेन्द्र पंवार ने पूनम का परिचय नेहरू पर्वतारोहण संस्थान में बचेंद्री पाल से करवाया। बचेन्द्रीपाल ने पूनम का हौसला बढ़ाया और पर्वतारोहण के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
... और इस तरह शुरू हुई पूनम की ट्रेनिंग
बचेंद्रीपाल के मार्गदर्शन में पूनम ने एनआईएम से पहले बेसिक और फिर एडवांस कोर्स किये। दोनो कोर्स में ही वह बेस्ट ट्रेनी चुनी गई। बचेंद्रीपाल ने पूनम को टाटा स्टील एडवेंचर फाउंडेशन में नौकरी भी दी। इसके बाद उन्होंने फाउंडेशन के साथ जुड़कर एवरेस्ट बेस कैंप ट्रेकिंग के साथ 18500 फिट ऊंचा काला पत्थर, नेपाल में ग्योखोरी, 19100 फिट ऊंचा रुद्र गैरा, हिमाचल प्रदेश के स्पीती पर्वत के साथ 19600 फिट ऊंचे कनामो पर फतह किया।
पूनम के अंदर छिपी हुई प्रतिभा को निखार कर और उसके संषर्घ को देखते हुए टाटा स्टील एडवेंचर फाउंडेशन ने उसे विश्व की सबसे ऊंचे पर्वत शिखर एवरेस्ट और साउथ अमेरिका की सबसे ऊंची चोटी माउंट एकांकागुआ आरोहण अभियान के लिए चुना है। पूनम ने पर्वतारोहण के साथ ही अपनी पढ़ाई भी जारी रखी है। वर्तमान में वह डिग्री कॉलेज उत्तरकाशी में बीए तृतीय वर्ष की छात्रा भी है।
आज पूनम फाउंडेशन में हर माह नौकरी के दौरान मिलने वाले पैसे से अपने परिवार की मदद भी करती है। उन पर उनके बड़े भाई की पत्नी और उनके बच्चों की भी जिम्मेदारियां हैं। पूनम अपने पुराने दिन याद करके बताती हैं कि एक बार उन्हें पासपोर्ट बनाने के लिए देहरादून जाना था और उसे पता नहीं था कि देहरादून कितना बड़ा है और पासपोर्ट कहां बनता है।
पूनम 20 मार्च 2016 का दिन अपने लिये सबसे लकी मानती है जब फाउंडेशन की तरफ से उन्हें कॉल आई थी। पूनम बताती हैं कि उसे पता नहीं है कि उसकी मां कैसी दिखती थी लेकिन उसने मां का प्यार बचेंद्री पाल से पाया है। बचेंद्री पाल ही उनकी रोल मॉडल है।