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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Uttarkashi: Flow of Yamuna river stopped again due to debris and boulders, lake started forming, highway close

Uttarkashi: चिंता...फिर मलबा-बोल्डर आने से रुका यमुना नदी का प्रवाह, बनने लगी झील, हाईवे बंद

Sun, 24 Aug 2025 09:39 AM IST
अलका त्यागी संवाद न्यूज एजेंसी, बड़कोट(उत्तरकाशी)
संवाद न्यूज एजेंसी, बड़कोट(उत्तरकाशी) Published by: अलका त्यागी Updated Sun, 24 Aug 2025 09:39 AM IST
सार

कुपड़ा खड्ड से बहकर आए मलबे और बोल्डर से यमुना नदी का पानी रुकने से झील बन गई थी। तेज बारिश के बाद यमुना नदी का जलस्तर बढ़ा और झील का मुहाना अपने आप ही खुल गया था। लेकिन अब फिर यहां झील बनने लगी है। 

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Uttarkashi: Flow of Yamuna river stopped again due to debris and boulders, lake started forming, highway close
यमुना नदी में फिर बनने लगी झील - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

भारी बारिश के चलते यमुनोत्री हाईवे कुथनौर, सिलाई बैंड, ओजरी डाबरकोट, जंगल चट्टी नारद चट्टी, फूलचट्टी में मलबा-बोल्डर आने और भू-धंसाव के कारण बंद है। वहीं, यमुनोत्री हाईवे पर स्याना चट्टी में यमुना नदी के मुहाने पर मलबा बोल्डर आने से दोबारा कृत्रिम झील बनने लगी है। हालांकि यमुना नदी के एक छोर से निकासी हो रही है। 

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तेज प्रवाह से खुद ही खुला था झील का मुहाना

स्यानाचट्टी में शुक्रवार रात हुई बारिश के बाद यमुना नदी का जलस्तर बढ़ गया था। नदी का प्रवाह तेज होने से यहां बनी झील का मुहाना अपने आप ही खुल गया था। लेकिन अब फिर यहां झील बनने लगी है। 

यहां खतरा अभी तक कम नहीं हुआ है। नदी का बहाव यमुनोत्री हाईवे पर बने पुल से सिर्फ तीन-चार फीट नीचे की ओर है लेकिन इसके बावजूद नदी के किनारे बने कुछ होटलों के निचले तल में अभी भी पानी भरा हुआ है।

दरअसल बुधवार को कुपड़ा खड्ड से बहकर आए मलबे और बोल्डर से यमुना नदी का पानी रुक गया था जिससे यहां जून माह में बनी झील का जलस्तर अचानक बढ़ गया था। देखते ही देखते पानी स्यानाचट्टी के होटलों, सरकारी स्कूल और घरों में घुसना शुरू हो गया। इसके बाद यमुनोत्री हाईवे पर बना पुल भी पानी में डूब गया था। जलस्तर इतनी तेजी से बढ़ा कि कुछ ही देर में पूरा स्यानाचट्टी दो मंजिला इमारतों तक डूब गया। लोग तुरंत वहां से भागे और करीब दो-तीन किलोमीटर दूर ऊंचे स्थानों पर जाकर शरण ली।

स्यानाचट्टी निवासी जयपाल सिंह रावत, नवदीप और पटमी देवी ने बताया कि उनका यह नुकसान प्रशासन की लापरवाही के कारण हुआ है। उन्होंने कहा अगर यह घटना रात में होती तो बड़ी आपदा आ सकती थी लेकिन दिन का समय होने के कारण लोग सतर्क हो गए और समय रहते अपनी जान बचा सके। उन्होंने यह भी कहा कि अभी खतरा पूरी तरह से टला नहीं है क्योंकि कुपड़ा खड्ड लगातार डर पैदा कर रहा है।

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