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उत्तरकाशी आपदा : आपदा प्रबंधन सुस्त, वैज्ञानिकों की राय स्थानीय लोग अपने स्तर पर रहें तैयार 

Thu, 16 Jan 2020 08:55 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उत्तरकाशी 
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उत्तरकाशी  Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Thu, 16 Jan 2020 08:55 AM IST
सार

  • उत्तरकाशी में मोरी तहसील में अगस्त में आई आपदा की अध्ययन रिपोर्ट में सामने आई तस्वीर
  • 18 लोगों की जान चली गई थी इस आपदा में
  • 200 करोड़ का नुकसान उठाया था प्रदेश ने 

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uttarkashi disaster : Disaster management asked local people to remain ready
प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

उत्तरकाशी में अगस्त माह में आई आपदा के अध्ययन की नई रिपोर्ट ने यह साबित किया है कि  प्रदेश में आपदा प्रबंधन की तैयारी सुस्त है। लोग भी अपने स्तर पर अनदेखी के कारण अधिक नुकसान उठा रहे हैं। 

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उत्तरकाशी जिले के मोरी तहसील में अगस्त 2019 में अत्यधिक बारिश से उफनाए नालों की वजह से करीब 200 करोड़ का नुकसान हुआ और 18 लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा था। इसी घटना का अध्ययन आपदा प्रबंधन विभाग के सुशील खंडूरी और केएस सजवाण ने किया। इन वैज्ञानिकों की यह रिपोर्ट अब एक जर्नल में भी प्रकाशित हुई है। 
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रिपोर्ट के मुताबिक, मोरी तहसील भूकंप के लिहाज से जोन पांच और चार में है। 1991 के भूकंप की वजह से यहां चट्टानें कमजोर हो गई थीं। अत्यधिक बारिश के कारण चट्टानें जगह-जगह दरक गईं। यह पाया गया कि पिछले कुछ सालों से इस क्षेत्र में अत्यधिक बारिश के मामले भी बढ़ रहे हैं। 

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आपदा प्रबंधन विभाग सुस्त

रिपोर्ट में सीधे नहीं कहा गया है कि आपदा प्रबंधन की तैयारी में कमी थी। सुझाव दिया गया है कि क्षेत्र में पूर्व चेतावनी तंत्र का विकास होना चाहिए। अधिक मौसम केंद्र होने चाहिए और लोगों को खतरे के प्रति आगाह करने का पूरा तंत्र होना चाहिए। साफ है कि यह सब न होने की वजह से क्षेत्र के लोग अचानक ही इस आपदा में घिर गए। 

लोग भी कम जिम्मेदार नहीं

रिपोर्ट के मुताबिक संवेदनशील क्षेत्र में सेब के बगीचों का विस्तार किया गया। यहां पर मिट्टी को बांधे रखने के लिए गहरी जड़ों वाले पौधों का रोपण होना चाहिए था। यह भी पाया गया कि नालों और गदेरों के किनारे लोगों ने मकान बना लिए। सड़क निर्माण के कारण मलबे की मात्रा बढ़ गई। कमजोर पहाड़ियों वाले इलाकों में लोगों ने खेती की और आपदा के खतरों को नजरअंदाज किया। 

आपदा के बाद हरकत में आया तंत्र

रिपोर्ट के मुताबिक आपदा के बाद प्रबंधन तंत्र ने 410 लोगों को रहने का ठिकाना उपलब्ध कराया। आराकोट में संचार स्टेशन स्थापित किया जा सका और एसडीआरएफ की सक्रियता दिखाई दी। 

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