उत्तरायणी से शुरू हो जाएगा देवताओं का दिन, मकर राशि में सूर्य का संक्रमण आज रात
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सूर्यो उपासना का महापर्व उत्तरायणी अब शुरू हो रहा है। भगवान भास्कर सोमवार की रात धनु राशि छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इस पर्व का पुण्यकाल और स्नान मंगलवार को होगा। मकर संक्रांति पर महाराष्ट्र में गुडी पड़वा का पर्व मनेगा तो दक्षिण भारत में पोंगल। समूचे उत्तर भारत में खिचड़ी और तिल का पर्व मकर संक्रांति के रूप में मनाया जाएगा। सूर्य के राशि प्रवेश करते ही दक्षिणायन समाप्त हो जाएगा और उत्तरायण शुरू होगा।
छह महीने के दक्षिणायन को देवों की रात और छह महीने के उत्तरायण को देवों का दिन माना जाता है। देवों का दिन होते ही मुंडन, यज्ञोपवीत, विवाह आदि सभी मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे। मकर संक्रांति को गंगा सहित देश की तमाम नदियों में पुण्य स्नान होगा। इस दिन खिचड़ी का भोजन करने और गुड़ व तिल से बने पदार्थ खाने की परंपरा है। असम में इस पर्व को बिहू के रूप में मनाया जाता है। बिहार प्रांत में इस पर्व पर चूड़ा दही के भोज आयोजित किए जाते हैं। गुजरात में यह पर्व उत्तरायण, हरियाणा और हिमाचल में माघी पर्व, कश्मीर में शिशुर सेक्रांत, बंगाल में पोही आदि के रूप में मनाया जाता है। देश के उत्तरी भागों में यह पर्व एक दिन लोहड़ी और दूसरे दिन स्नान पर्व मकर संक्रांति के रूप में मनाया जाता है।
सोमवार की शाम 7.50 बजे सूर्य का प्रवेश मकर राशि में होगा
देश के अनेक भागों में महीने का आरंभ संक्रांति पर होता है, अत: यह दिन महीने का पहला दिन भी माना जाता है। जबकि विक्रमी संवत का हिसाब अलग है। इस बार सोमवार की शाम 7.50 बजे सूर्य का प्रवेश मकर राशि में हो जाएगा। परिणाम स्वरूप इसका पुण्यकाल सूर्योदय के साथ शुरू होगा और दोपहर 12:30 बजे तक बना रहेगा। 15 जनवरी को यहीं स्नान का मुहूर्त है। प्रयाग में अर्द्धकुंभ का शाही स्नान भी 15 जनवरी को होगा।
पर्वों के दिनों में आ रहा अंतर
आमतौर पर मकर संक्रांति का पर्व प्रतिवर्ष 14 जनवरी और वैशाखी का पर्व प्रतिवर्ष 13 अप्रैल को पड़ते हैं। अब कुछ समय से पर्वों के दिनों पर अंतर आ रहा हैं। इसका कारण यह है कि सूर्य का धनु से मकर राशि में प्रवेश प्रतिवर्ष 20 मिनट विलंब से होता है। 72 वर्षों में बढ़ते बढ़ते यह अंतर एक दिन का हो जाता है। वर्ष 2012 से इस कारण मकर संक्रांति का पुण्यकाल कभी 14 तो कभी 15 जनवरी को पड़ता आ रहा है। ज्योतिषाचार्य पंडित रविशंकर जोशी के अनुसार इसी प्रकार बढ़ते बढ़ते पांच हजार वर्ष बाद मकर संक्रांति फरवरी में पड़ेगी। यह पर्व सूर्य को नमन करने का है। शास्त्रीय मान्यता है कि इस दिन से सूर्य का तापमान तिल तिल कर बढ़ने लगता है। मकर संक्रांति पर गंगा स्नान करते समय ओम नमो भगवते सूर्याय नम: का जाप करना चाहिए। स्नानोपरांत तिल से बने मिष्ठान्न और खिचड़ी भोज का दान शास्त्रों में श्रेष्ठ बताया गया है। हरिद्वार तीर्थ पर 14 और 15 को संक्रांति का स्नान होगा, जबकि पुण्यकाल 15 जनवरी को पड़ेगा।