Uttarakhand Weather Today : कई जिलों में आज भी बारिश के आसार, दो एनएच सहित 107 सड़कें अब भी बंद
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राजधानी देहरादून समेत प्रदेश के कुछ जिलों में सोमवार को भी हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश होने का अनुमान है।
मौसम के निदेशक बिक्रम सिंह ने बताया कि फिलहाल हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। अगले कुछ दिनों में भारी बारिश का सिस्टम बन सकता है।
दो एनएच सहित 107 सड़कें अब भी बंद
प्रदेश में दो राष्ट्रीय राजमार्गों सहित कुल 107 सड़कें अब भी बंद हैं। कड़ी मशक्कत कर सोमवार को 50 से अधिक सड़कें खोली गई हैं। इनमें अधिकांश ग्रामीण सड़कें हैं। लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) मशीनों से मलबा हटाने और सड़कों को दुरुस्त करने में जुटा है। रविवार तक मलबा आ जाने के कारण 158 सड़कें बंद थी।
सोमवार को मलबा आने व जगह-जगह क्षतिग्रस्त होने से कई मार्ग बाधित हुए। अब भी बदरीनाथ और यमुनोत्री नेशनल हाईवे नहीं खुल पाया है। लोनिवि और बीआरओ की मशीनरी मार्गों को खोलने में जुटी है, लेकिन बीच बीच पहाड़ से मलबा आने के कारण मार्ग बाधित हो रहे हैं। इनके अलावा नौ स्टेट हाईवे भी बंद पड़े हैं, जिन्हें खोलने का काम जारी है। मार्गों को खोलने के लिए 294 मशीनें तैनात की गई हैं।
हेलीकॉप्टर से निकाले गए आपदा प्रभावित गांवों में फंसे लोग
पिथौरागढ़ में बंगापानी तहसील के आपदा प्रभावित गांवों में हेलीकॉप्टर से फंसे लोगों को निकालने के लिए रेस्क्यू अभियान जारी रहा। मोरी और लुम्ती सहित विभिन्न गांवों से लोगों को निकालकर बरम स्थित शिविर में पहुंचाया गया। इसके अलावा बीमार लोगों को अस्पताल पहुंचाया गया। मेतली और जारा जिबली में मलबे में दबी महिलाओं की खोजबीन जारी रही, लेकिन कोई सुराग नहीं लग सका।
19 जुलाई से 27 जुलाई की रात तक तबाही मचाने के बाद अब सीमांत क्षेत्र में मौसम शांत है, हालांकि रुक रुककर अभी भी बारिश हो रही है, लेकिन दिन में धूप खिलने से आपदा प्रभावित गांवों मोरी, लुम्ती, जाराजिबली, मेतली, देवलेक और धामीगांव सहित अन्य गांवों में राहत बचाव कार्यों में काफी मदद मिली। गांवों में फंसे लोग निकाल लिए गए हैं।
सोमवार को मलबे पर गिरने से घायल मदरमा गांव निवासी कौशल्या देवी को भी हेलीकाप्टर से धारचूला अस्पताल पहुंचाया गया। बरम इंटर कॉलेज में बनाए गए शिविर में ढाई सौ से अधिक लोगों को रखा गया है। इन सभी आपदा प्रभावितों के लिए प्रशासन की ओर से भोजन की व्यवस्था की जा रही है। स्कूल भवनों में भोजन माताएं खाना बना रही हैं।
सेना की कुमाऊं स्काउट, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और पुलिस सहित विभिन्न विभागों के 141 कर्मी रेस्क्यू में जुटे हैं। 19 जुलाई की रात तबाह हुए टांगा गांव के लोग सेरा स्कूल में बनाए गए राहत कैंप में रह रहे हैं। वहां मलबे में दफन 11 लोगों में से एक पार्वती देवी का अभी भी पता नहीं चल पाया है। इधर, 27 जुलाई की रात मेतली और जाराजिबली गांवों में आई आपदा में मलबे में दबी दो महिलाओं का भी सुराग नहीं लग सका है।