लगातार बारिश से बढ़ने लगा टिहरी झील का जलस्तर, बांध प्रभावित परिवारों की मुश्किलें बढ़ी
- आरएल 825 से ऊपर पहुंचा टिहरी झील का जलस्तर
- जलस्तर अधिक होने से प्रभावितों की भी बढ़ने लगी मुश्किलें
विस्तार
उत्तराखंड में टिहरी और उत्तरकाशी जिले में हो रही बारिश के कारण बांध की झील का जलस्तर भी लगातार बढ़ रहा है। वर्तमान में जलस्तर आरएल 825 मीटर से ऊपर पहुंच गया है। जलस्तर बढ़ने से टीएचडीसी विद्युत उत्पादन में वृद्धि होगी, लेकिन इससे बांध प्रभावित 415 परिवारों की मुश्किलें बढ़ने लगी हैं। झील क्षेत्र के आसपास भूस्खलन होने से प्रभावित परिवारों को दिक्कतें उठानी पड़ती हैं।
टिहरी बांध की झील को अधिकतम आरएल 830 मीटर तक भरा जा सकता है, लेकिन सरकार ने टीएचडीसी को झील को आरएल 828 मीटर तक ही भरने की अनुमति दी हुई है। मंगलवार को झील का जलस्तर आरएल 825.30 मीटर पहुंच गया है।
भागीरथी से 297.47, भिलंगना से 91.83 और सहायक गाड-गदेरों से 116 क्यूमेक्स पानी झील में आ रहा है। झील से 253 क्यूमेक्स पानी छोड़ा जा रहा है, जबकि डैम से करीब 11 मिलियन यूनिट विद्युत उत्पादन हो रहा है।
गांवों का भू-गर्भीय सर्वे करवाया था
लगातार बढ़ रहे झील के जलस्तर से भूस्खलन के कारण नंदगांव, उठड़, पिपोला, रौलाकोट, गडोली, चांठी, तिवाडगांव समेत 17 बांध प्रभावितों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। वर्ष 2010 के बाद से सरकार ने विशेषज्ञ कमेटी बनाकर प्रभावित गांवों का भू-गर्भीय सर्वे करवाया था।
सर्वे में 415 परिवारों को पुनर्वास के लिए चिह्नित किया गया था लेकिन भूमि न मिलने के कारण प्रभावितों का पुनर्वास नहीं हो पाया। प्रभावित परिवार खतरे की जद में रहने को मजबूर बने हुए हैं।
प्रभावितों के पुनर्वास लेकर सरकार गंभीरता से प्रयास कर रही है। चार सितंबर को इस संबंध में शासन में बैठक में हो चुकी है। आयुक्त गढ़वाल की अध्यक्षता में प्रभावितों की समस्याओं के निराकरण को कमेटी बनाई गई है। उम्मीद है कि जल्द ही समस्या का समाधान हो जाएगा।
- डा. धन सिंह नेगी विधायक टिहरी।