उत्तराखंड मौसम अपडेटः उच्च हिमालयी क्षेत्र में चार दिनों से लगातार हो रहा हिमपात, मुनस्यारी मिलम सड़क का काम रुका
उच्च हिमालयी क्षेत्र में पिछले चार दिनों से लगातार हिमपात हो रहा है। मंगलवार को भी पंचाचूली और नागनीधूरा में दिनभर हिमपात होता रहा। छिपला की पहाड़ी भी सुबह बर्फ से लकदक नजर आई। हालांकि मुनस्यारी सहित अन्य निचले इलाकों में मौसम सामान्य रहा।
वहीं, उच्च हिमालयी क्षेत्र में हिमपात के कारण चीन सीमा के लिए बनाई जा रही मुनस्यारी-मिलम सड़क का काम अभी रुका है, लेकिन मौसम अनुकूल होने पर बीआरओ के लास्पा कैंप तक हेलीकॉप्टर से निर्माण सामग्री और खाद्यान्न पहुंचाया जा रहा है।
मुनस्यारी से मिलम के लिए सामरिक महत्व की सड़क का निर्माण किया जा रहा है लेकिन हिमपात के कारण वहां कार्यरत 200 से अधिक मजदूर लौट आए हैं। पिछले तीन माह से सड़क निर्माण कार्य रुका है। लास्पा में मौजूद बीआरओ के ऑपरेटर और मजदूर बर्फ पिघलने पर केवल जेसीबी की मदद से सड़क कटिंग कर रहे हैं। पिछले एक सप्ताह से बर्फबारी के कारण वहां पर दो फीट से अधिक बर्फ जमी है।
ऐसे में इस समय पोकलैंड से भी कटिंग बंद है। हालांकि उच्च हिमालयी क्षेत्र में मौसम अनुकूल होने पर हेलीकॉप्टर से निर्माण सामग्री और खाद्यान्न पहुंचाया जा रहा है। बीआरओ के अधिकारियों ने बताया कि बर्फ पिघलने के बाद अप्रैल से सड़क कटिंग का काम तेज किया जाएगा।
बता दें कि पर्वतीय इलाकों में मंगलवार को मौसम खराब रहने की संभावना जताई थी। वहीं, मैदानी इलाकों में घना कोहरा रहने का अनुमान था।
उत्तराखंड में स्थापित किया जाए प्रादेशिक मौसम केंद्र
गढ़वाल सांसद तीरथ सिंह रावत ने केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्री हर्ष वर्धन से उत्तराखंड में प्रादेशिक मौसम केंद्र स्थापित करने की मांग की है। उन्होंने दिल्ली में केंद्रीय मंत्री से मुलाकात की और उन्हें अपनी मांग से संबंधित एक पत्र सौंपा।
गढ़वाल सांसद ने कहा कि आपदा एवं एक्सट्रीम वेदर के लिहाज से पश्चिमी हिमालय क्षेत्र बहुत संवेदनशील है। इसके अंतर्गत उत्तराखंड, हिमाचल, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख मौसम केंद्र व उपकेंद्र आते हैं। इन सभी राज्यों की भौगोलिक और जलवायु की स्थितियां समान हैं।
उत्तराखंड राज्य आपदा की दृष्टि से बेहद संवेदनशील है। यहां अकसर आपदाएं आती रहती हैं। राज्य के पर्वतीय इलाकों में भूस्खलन, अत्यधिक वर्षा, बाढ़, बादल फटने की घटनाएं आम हैं। उन्होंने कहा कि आपदा की संवेदनशीलता को देखते हुए राज्य में मौसम के सटीक पूर्वानुमान के लिए प्रादेशिक मौसम केंद्र की आवश्यकता है।
यदि प्रादेशिक मौसम केंद्र स्थापित हो जाता है तो इससे राज्य में समय रहते आपदा प्रबंधन की तैयारी की जा सकेगी। उन्होंने लैंसडौन में डॉप्लर रडार की स्थापना में चल रही प्रगति के लिए केंद्रीय मंत्री का आभार व्यक्त किया।