उत्तराखंड मौसम अपडेटः देहरादून में गर्मी ने तोड़ा दस साल का रिकॉर्ड, आज बादल छाए रहने के आसार
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देहरादून में फरवरी की गर्मी ने बुधवार को बीते दस साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया। दस साल में पहली बार फरवरी में अधिकतम तापमान 30 डिग्री के पार गया। इससे दिन के समय लोगों को खासी गर्मी का अहसास हुआ। लोगों को पंखे तक चलाने पड़े। वहीं, गुरुवार को बादल छाए रहने से लोगों को राहत मिल सकती है।
पिछले कुछ दिनों से राजधानी का तापमान लगातार बढ़ रहा है। दिन के साथ ही रात में भी ठंड कम होने लगी है। बीते दस साल के आंकड़ों पर नजर डाले तो 2020 में फरवरी में दून का अधिकतम तापमान 29.2 डिग्री था। जबकि, 2014 में दून का अधिकतम तापमान 25.4 डिग्री रहा।
अभी जिस तरह से गर्मी बढ़ रही है, माना जा रहा है कि इस साल फरवरी के तापमान का ओवरऑल रिकॉर्ड भी टूट सकता है। बुधवार को चटक धूप खिली रहने से लोगों को गर्मी का अहसास होने लगा। राहत पाने के लिए लोगों ने दुकान, मकान और कार्यालय में कुछ देर पंखे भी चलाए।
जबकि, शहर के कुछ बाजारों में लोग जूस पीकर गर्मी से राहत पाते नजर आए। मौसम विभाग के अनुसार बृहस्पतिवार को आसमान में बादल छाए रह सकते हैं। इससे लोगों को गर्मी से राहत मिल सकती है।
दस साल में फरवरी में देहरादून का तापमान
साल - तापमान
2020 - 29.2
2019 - 26.6
2018 - 29.5
2017 - 28.4
2016 - 28.5
2015 - 23.2
2014 - 25.9
2013 - 25.9
2011 - 27.5
शुष्क मौसम में बढ़ रही वनाग्नि की घटनाएं
रुद्रप्रयाग में शुष्क मौसम के बीच वनाग्नि की घटनाएं लगातार बढ़ रही है, जिससे वन विभाग के कर्मचारियों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। बीते दो दिनों में गुप्तकाशी यूनिट व रुद्रप्रयाग रेंज के कई जंगलों में आग से लाखों की वन संपदा को नुकसान पहुंचा है। वन कर्मियों द्वारा कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका।
रुद्रप्रयाग वन प्रभाग के डीएफओ वैभव कुमार ङ्क्षसह ने बताया कि गुप्तकाशी यूनिट के करोखी सिविल वन क्षेत्र में आग की सूचना मिली थी। वन कर्मियों द्वारा ग्रामीणों के सहयोग से आग पर काबू पया गया। यहां लगभग आधे हेक्टेयर क्षेत्र में वन संपदा को नुकसान हुआ है।
रुद्रप्रयाग रेंज के अंतर्गत जसोली सिविल वन क्षेत्र में भी अराजक तत्वों द्वारा आग लगाई गई थी। वहीं, धनपुर क्षेत्र में आरक्षित वन क्षेत्र में आग से लगभग एक हेक्टेयर क्षेत्र में नुकसान हुआ है। डीएफओ ने बताया कि शुष्क मौसम के कारण वनाग्नि की घटनाएं लगातर बढ़ रही हैं। जबकि विभागीय स्तर पर पीरूल उठान समेत कंट्रेल वर्निंग भी की जा चुकी है। उन्होंने ग्रामीणों से व्जंगलों को आग से बचाने के लिए विभाग का हरसंभव सहयोग करने की अपील की है।