मोदी कैबिनेट में विस्तार से उत्तराखंड को आस
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आगामी दस नवम्बर को मोदी कैबिनेट के विस्तार पर उत्तराखंड के भाजपाइयों की भी निगाह लगी है। उम्मीद तो है लेकिन विधानसभा के तीन उपचुनावों के बाद प्रदेश के नेताओं से पार्टी के नए कमांडर अमित शाह की नाराजगी भी जगजाहिर हो चुकी है।
वैसे भी जो नाम छनकर सामने आ रहे हैं उनमें उत्तराखंड का कोई नाम नहीं होने से मायूसी का आलम खत्म होता नहीं दिख रहा है।
पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा ने पांचों लोकसभा सीटों पर शानदार और बड़े मार्जिन वाली जीत दर्ज की। उम्मीद थी कोई केंद्र में मंत्री जरूर बनेगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके बाद कैबिनेट विस्तार का इंतजार होने लगा और इसी बीच प्रदेश में तीन विधानसभा सीटों के उप-चुनाव घोषित हो गए।
लेकिन यह उप-चुनाव प्रत्याशियों के साथ ही भाजपा के बड़े नेताओं के लिए भी हादसे की तरह रहा और तीनों सीटें हाथ से निकल कर कांग्रेस की झोली में चली गई।
पार्टी में भितरघात से हुआ नुकसान
केंद्रीय नेतृत्व को डोईवाला सीट से चुनाव लड़ रहे पार्टी के तत्कालीन राष्ट्रीय सचिव त्रिवेंद्र सिंह रावत की हार ने सबसे ज्यादा आहत किया। इस चुनाव में पार्टी में भितरघात की बात भी सामने आई।
इसके बाद हरिद्वार पतंजलि योगपीठ में हिस्सा लेने आए भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के समक्ष जब यह बात उठी तो उन्होंने साफ कहा कि सीटें नहीं जिता पाए इसलिए तो कोई मंत्री नहीं बना।
लेकिन अब विस्तार की तारीख दस नवम्बर तय हो गई है। प्रदेश के नेताओं को आस तो है लेकिन भरोसा कौन दिलाए। पांच सीटें थी पांचों जीत ली, इसलिए मंत्री बनना चाहिए, यह फार्मूला फेल हो चुका है। राजस्थान का उदहारण सबके सामने है।
25 एमपी जीतने के बाद एक मंत्री बना। और, जो गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पारिकर समेत जो नाम मीडिया में छनकर आ रहे हैं उनमें उत्तराखंड से किसी का जिक्र नहीं है। इसलिए राज्य के नेताओं को उम्मीद तो लेकिन पृष्ठभूमि पर गौर करने के बाद भरोसा करने की हिम्मत नहीं हो रही है।