उत्तराखंड: रिश्वत लेने के मामले में रिटायर्ड सहायक निबंधक को विजिलेंस कोर्ट ने सुनाई छह साल की सजा
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घूस लेते रंगे हाथ पकड़े गए सहकारी समिति के पूर्व सहायक निबंधक को विजिलेंस कोर्ट ने छह साल कारावास की सजा सुनाई है। आरोपी को हरिद्वार में वर्ष 2013 में एक लाख रुपये की रिश्वत के साथ गिरफ्तार किया गया था। दोषी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
शासकीय अधिवक्ता राजीव कुमार गुप्ता ने बताया कि मामला हरिद्वार का करीब आठ साल पुराना है। उस वक्त उमराव सिंह सैनी हरिद्वार सहकारी समितियों के सहायक निबंधक के पद पर तैनात थे।
इस मामले में जगदीश शर्मा ने विजिलेंस को शिकायत की थी। शर्मा उस वक्त रिटायर्ड हुए थे। इसके बाद उन्हें ग्रेच्युटी और पेंशन के रूप में 13 लाख रुपये मिलने थे। इसके लिए उन्होंने आवेदन किया तो सहायक निबंधक सैनी टाल मटोल करने लगे।
कुछ दिन बाद में पता चला कि सैनी उनसे इसकी एवज में 25 प्रतिशत का हिस्सा मांग रहे हैं। यह रकम तीन लाख 25 हजार रुपये बैठती थी। इस रिश्वत की पहली किश्त के लिए जगदीश शर्मा ने उन्हें अपने घर बुलाया था। पहली किश्त के रूप में एक लाख रुपये दिया जाना था।
चूंकि, विजिलेंस इसमें ट्रैप बिछा चुकी थी। ऐसे में सैनी को एक लाख रुपये की रिश्वत के साथ सैनी को गिरफ्तार कर लिया। सैनी के खिलाफ कोर्ट में विजिलेंस ने आठ गवाह पेश किए थे। इन गवाहों और लिखित साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने छह साल की सजा और 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
विवादों में रहते थे सैनी
अपने कार्यकाल के दौरान पूर्व सहायक निबंधक सैनी काफी विवादों में रहते थे। कई बार उनके खिलाफ विभागीय जांच भी हुई थी। 2010 में ऊधमसिंहनगर में गेहूं खरीद मामले में भी आरोप लगे थे। इससे पहले पंचायत चुनावों में सहायक निबंधक रहते हुए उन पर चुनाव परिणामों में गड़बड़ी का आरोप भी लगा था।
एंटी ड्रग टास्क फोर्स ने मसूरी में नशा तस्करों को किया गिरफ्तार
एसटीएफ की एंटी ड्रग टास्क फोर्स ने मसूरी में बुधवार को दो नशा तस्करों गिरफ्तार किया है। आरोपियों के पास से ढाई किलो चरस बरामद की है। एनडीपीएस एक्ट में कार्रवाई करते हुए मसूरी थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है।
एसटीएफ के मुताबिक आरोपी देवेन्द्र लाल साह पुत्र बच्चू लाल साह, निवासी भटवाड़ी मनेरी उत्तरकाशी और राकेश शर्मा पुत्र तुलाराम शर्मा निवासी ढुण्डा उत्तरकाशी को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी चरस को भटवाड़ी से लाकर देहरादून और हरिद्वार में बेचा करते थे।